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ब्राज़ील के साओ पाउलो में स्थित एक बाज़ार में ग्राहक आम व अन्य फ़लों की ख़रीदारी कर रहे हैं.

ब्राज़ील: भोजन की बर्बादी रोकने के प्रयास

© FAO/Miguel Schincariol
ब्राज़ील के साओ पाउलो में स्थित एक बाज़ार में ग्राहक आम व अन्य फ़लों की ख़रीदारी कर रहे हैं.

ब्राज़ील: भोजन की बर्बादी रोकने के प्रयास

जलवायु और पर्यावरण

ब्राज़ील, आबादी के मामले में विश्व में छठे स्थान पर है और वहाँ हर साल लगभग दो करोड़ टन खाद्य कचरा पैदा होता है. सरकारी अनुमान के मुताबिक़, देश में लगभग दो करोड़ 70 लाख लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं. लेकिन डेटा संग्रह, नीति निर्माण और सहयोग के ज़रिए, ब्राज़ीलियाई सरकार इसे बदलने के लिए तेज़ी से कार्रवाई कर रही है.

19 साल की उम्र में रैजीना चैली, अपना सपना पूरा करने के लिए पूर्वोत्तर ब्राज़ील में स्थित अपना घर छोड़कर, रियो डी जनेरियो पहुँचीं. सपना था एक प्रसिद्ध शेफ़ बनने का.

चैली को बचपन से ही भोजन बर्बाद ना करने की सीख दी गई थी. यहाँ पहुँचने के बाद उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि दुकानदार खाने योग्य भोजन भी सड़कों पर फेंक देते हैं.

इससे चैली को कुछ अलग करने की सूझी. घरेलू सेविका के अपने काम से त्यागा हुआ भोजन, उन्होंने घर ले जाना शुरू किया और फिर उससे केले व अदरक की ब्रेड और ब्रॉकली के डंठल की 'कीश’ जैसे नवीन व्यंजन बनाए. इस अनुभव ने उन्हें आगे चलकर Favela Orgânica नामक कम्पनी की स्थापना की प्रेरणा दी. 

इस संगठन के ज़रिए, आज हज़ारों कम आय वाले व्यक्तियों, सड़क विक्रेताओं और रसोइयों ने भोजन की बर्बादी रोकने, भूख से निपटने व भोजन की बर्बादी से उत्पन्न विनाशकारी पर्यावरणीय प्रभावों से निपटने के गुर सीखे हैं.

अब 42 साल की हो चुकी चैली कहती हैं, ''भोजन को ज़रा भी नहीं फेंकना चाहिए. इससे हम अपने ग्रह को नुक़सान पहुँचा रहे हैं. हमें अपना व्यवहार बदलना होगा. हम जलवायु संकट से गुज़र रहे हैं." 

"यहाँ, लोगों को सिखाया जाता है कि किस तरह स्वस्थ भोजन और स्थाई आदतें, हमारे स्वास्थ्य एवं ग्रह, दोनों को लाभ पहुँचा सकती हैं."

चैली, ब्राज़ील में एक ऐसी मुहिम का हिस्सा हैं, जो खाद्य बर्बादी रोकने के लिए तेज़ी से दुनिया भर में फैल रहा है.

रियो डी जनेरियो में, 42 वर्षीय रैजीना चैली, 13 वर्षों से भोजन की बर्बादी रोकने की दिशा में काम कर रही हैं.
© Favela Orgânica/Nathalie Ran

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) की हाल ही में जारी, 2024 की खाद्य अपशिष्ट सूचकाँक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर, 78.3 करोड़ लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है.

लेकिन इसके बावजूद, घरों में हर दिन लगभग एक अरब लोगों को खिलाने लायक भोजन की बर्बादी होती है. वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 8 से 10 प्रतिशत हिस्सा, खाद्य उत्पादन और फेंके गए भोजन के अपघटन (decomposition) से आता है.

यूनेप की जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण शाखा की प्रमुख, रूथ जुगमैन डो कोउटो कहती हैं कि, "खाद्य बर्बादी को कम करना न केवल खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए आवश्यक है, बल्कि जलवायु परिवर्तन, प्रकृति और जैव विविधता हानि, एवं प्रदूषण तथा अपशिष्ट के तिहरे ग्रहीय संकट से लड़ने के लिए भी आवश्यक है." 

"2050 तक शहरों में अनुमानित 80 प्रतिशत भोजन की खपत होगी, जिससे भोजन की बर्बादी पर कार्रवाई करने के लिए स्थानीय सरकारों को शामिल करना महत्वपूर्ण होगा. हम भोजन और पोषक तत्वों के पुनर्वितरण, पुनर्चक्रण या री-सायकलिंग के लिए शहरों के घने नैटवर्क का उपयोग कर सकते हैं.

मेन्यू में बदलाव

2010 में, ब्राज़ील ने ठोस कचरे पर एक राष्ट्रीय नीति स्थापित की, जिसके तहत नगर पालिकाओं को कम्पोस्टिंग यानि अपशिष्ट विघटन प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य है. हालाँकि, इस क़ानून में भोजन की बर्बादी को रोकने के उपाय स्पष्ट नहीं किए गए हैं.

UNEP, गैर-लाभकारी संगठनों और शहरी नेतृत्व के सहयोग से, ब्राज़ील में खाद्य अपशिष्ट घटाने व खाद बनाने पर एक नई राष्ट्रीय नीति का मसौदा विकसित किया जा रहा है. अनुमान है कि यह 2025 की शुरुआत तक लागू हो जाएगा. 

यह नीति देश भर के मेयरों व अन्य सम्बन्धित हितधारकों को खाद्य बर्बादी रोकने तथा खाद परियोजनाओं को लागू करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करेगी.

ब्राज़ील चक्रीय अर्थव्यवस्था पर अपनी पहली राष्ट्रीय रणनीति भी विकसित कर रहा है, जिसके अन्तर्गत उत्पादन, वितरण और खपत के दौरान बर्बादी को कम करने के लिए खाद्य प्रणालियों में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

ब्राज़ील के शहरी पर्यावरण और पर्यावरण गुणवत्ता के राष्ट्रीय सचिव, एडालबर्टो मालुफ़ कहते हैं, " UNEP की मदद से, हम यह समझ पाए कि केन्द्रीय सरकार को एकीकृत प्रयासों के ज़रिये, सभी को इस समस्या से अवगत करवाना होगा.

"हम अपने भोजन का 22 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बर्बाद कर रहे हैं. ऐसे में, (कार्रवाई के बिना), हम कभी भी भुखमरी ख़त्म करने के लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाएँगे.''

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य बर्बादी कम करके व टिकाऊ खपत को बढ़ावा देकर, खाद्य असुरक्षा से निपटा जा सकता है.
© Rovena Rosa/Agência Brasil

स्थानीय भोजन का महत्व

ब्राज़ील की सरकार भोजन की बर्बादी के प्रति अपना दृष्टिकोण तो बदल ही रही है, मालुफ़ के अनुसार इसके लिए कृषि अनुसंधान निगम (Embrapa) सहित कई साझीदारों के साथ भागेदारी भी कर रही है.

Embrapa, देश के कृषि मंत्रालय से सम्बद्ध एक सार्वजनिक अनुसंधान एजेंसी है.Embrapa के विशेषज्ञ और यूनेप खाद्य अपशिष्ट सूचकाँक रिपोर्ट 2024 में योगदान देने वाले, गुस्तावो पोरपिनो का कहना है कि भोजन की बर्बादी को ख़त्म करने से दूरगामी लाभ हासिल हो सकते हैं.

उन्होंने बताया कि, "खाद्य प्रणाली का एजेंडा आर्थिक रूप से लाभदायक है. इसके सामाजिक लाभ हैं, पर्यावरणीय लाभ हैं. इसके कई सकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं." ब्राज़ील इस साल, जी20 समूह के शिखर सम्मेलन और अगले साल, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) की मेज़बानी कर रहा है. 

पोरपिनो कहते हैं कि सरकारी प्रयासों को सफल बनाने के लिए सामुदायिक नेतृत्व महत्वपूर्ण है. खाद्य बर्बादी से निपटने के लिए ज़मीनी स्तर के अभियानों का उदाहरण देते हुए समय, उन्होंने Favela Orgânica के असाधारण काम की सराहना की.

परिवर्तन की बयार

रियो डी जनेरियो में, रैजिना चैली, अपने संगठन की प्रशंसा सुनकर प्रसन्नता से खिल उठती हैं, “यह एक ऐसी जगह है जहाँ हम आपसी प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग से काम करते हैं. यहाँ, हम यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि हर व्यक्ति सक्षम है, और सभी जन एक-दूसरे की मदद करते हैं.

चैली के नेतृत्व में, Favela Orgânica द्वारा "वैकल्पिक गैस्ट्रोनॉमी" नामक कार्यशालाएँ आयोजित करती हैं: जिसमें सामग्री के पूर्ण उपयोग, घर में बनी खाद को प्रोत्साहन व शहरों में छोटी सी जगहों में पौधे उगाने को बढ़ावा दिया जाता है. इससे समुदाय के सदस्यों को भोजन सम्बन्धी आदतों पर पुनर्विचार करके बर्बादी कम करने में मदद मिलती है.

यह संगठन, वर्तमान में रियो डी जनेरियो के गाँवों में 160 महिलाओं को शहरी बागवानी और जीवनचक्र दृष्टिकोण के महत्व पर प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बचे हुए उत्पाद, खाद्य श्रृँखला में वापस आ सकें.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ख़ासतौर पर रियो डी जनेरियो के ग्रामीणों के लिए बेहद अहम है, जिन्हें अक्सर खाद्य असुरक्षा और बिजली, पेयजल एवं स्वच्छता की कमी से जूझना पड़ता है. मौजूदा परिस्थितियों में सामुदायिक स्तर पर काम करना महत्वपूर्ण हो जाता है. 

ब्राज़ील के विभिन्न हिस्सों में काम कर चुकीं चैली कहती हैं, "भोजन का एकीकृत उपयोग हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए, और इसके लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम करना बहुत महत्वपूर्ण है. हम लोगों को बीज मुहैया करवाते हैं, उन्हें बीज बोना, कटाई करना और बीज को वापस धरती को सौंपना सिखाते हैं."

यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.