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ग़ाज़ा: रफ़ाह पर हमले की आशंका के बीच, खाद्य सहायता के स्तर में वृद्धि की उम्मीद

ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में भारी तबाही हुई है. रफ़ाह में एक तबाह इमारत का दृश्य.
UN News/Ziad Taleb ग़ाज़ा में इसराइली बमबारी में भारी तबाही हुई है. रफ़ाह में एक तबाह इमारत का दृश्य.

ग़ाज़ा: रफ़ाह पर हमले की आशंका के बीच, खाद्य सहायता के स्तर में वृद्धि की उम्मीद

मानवीय सहायता

ग़ाज़ा पट्टी में लड़ाई के बीच ज़रूरतमन्दों तक विशाल स्तर पर खाद्य सहायता पहुँचाने और अकाल टालने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों को इस सप्ताह मज़बूती मिली. इसराइल ने मदद के प्रवाह को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक रूप से संकल्प व्यक्त किया जिससे यह सम्भव हो पाया है. हालांकि रफ़ाह में इसराइली सैन्य बलों के आक्रमण की आशंका प्रबल है.

हमास द्वारा हमले के बाद आरम्भ हुए संघर्ष के ठीक छह महीने बाद, संयुक्त राष्ट्र समाचार से बातचीत में, कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में मौजूद मानवतावादी समन्वयक, जेमी मैकगोल्डरिक ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की सम्पूर्ण राहत कोशिशों का एकमात्र लक्ष्य ज़िन्दगियाँ बचाना है, और कुछ नहीं. 

जेमी मैकगोल्डरिक ने यह बात तह कही, जब रविवार को इसराइली रक्षा बलों ने घोषणा की थी कि सप्ताह के अन्त में "आगे की कार्रवाई" की तैयारी के लिए ग़ाज़ा से सैनिकों की बड़ी टुकड़ी को वापस बुला लिया गया है.लेकिन इसके साथ ही, अमेरिकी दबाव में इसराइली नेतृत्व ने राहत सहायता की मात्रा और प्रवाह बढ़ाने का वादा भी किया है, हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि नीति में बदलाव कब तक किया जाएगा.

जेमी मैकगोल्डरिक ने कहा कि यह राजनैतिक व घरेलू दबाव और वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात सहायता कर्मियों की हत्या के बाद हुई अन्तरराष्ट्रीय निन्दा एवं संयुक्त राष्ट्र की महीनों की पैरोकारी के मिला-जुला प्रभाव ही है, जो हताश ग़ाज़ावासियों के लिए सहायता वृद्धि में तब्दील हो सकता है.

"धीरे ही सही, लेकिन निश्चित तौर पर" इसराइलियों को ख़ासतौर पर उत्तरी ग़ाज़ा में उपजे विशाल मानवीय संकट का अहसास हो रहा है. उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि इन सभी रास्तों के खुलने से, हम इलाक़े को भोजन व अन्य ज़रूरत की चीज़ों से भर पाएँगे. यह जब भी हो, हमे ख़ुद को इसके लिए तैयार रखना होगा.”

इंटरव्यू को स्पष्टता के लिए सम्पादित किया गया है.

कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र के मानवतावादी समन्वयक, जेमी मैकगोल्डरिक, दक्षिणी ग़ाज़ा के रफ़ाह में फ़लस्तीनी रेड क्रैसेंट के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात करते हुए.
OHCA/oPt

यूएन न्यूज: दक्षिणी ग़ाज़ा से इसराइल की सेना की वापसी के बारे में सामने आ रही रिपोर्टों से शुरुआत करें, तो उस पर आपकी क्या टिप्पणी होगी?

जेमी मैकगोल्डरिक: मुझे लगता है कि ख़ान यूनिस में सैन्य अभियान का यह चरण समाप्त हो गया होगा. मुझे लगता है कि यहीं से वो ब्रिगेड को वापस ले जा रहे हैं. इसका मतलब यह है कि उम्मीद है कि यह क्षेत्र अधिक सुरक्षित होगा और हो सकता है कि लोग वापस वहीं जाना शुरू कर सकें जहाँ से वे आए थे. लेकिन यह एक मायने में चिन्ताजनक भी है कि शायद वो दोबारा संगठित होने तथा रफ़ाह पर हमले के लिए तैयार होने जा रहे हों.

यूएन न्यूज: आपने बताया कि संयुक्त राष्ट्र की लगातार अपीलों के कारण, इसराइल ने ग़ाज़ा में राहत सहायता में वृद्धि के कई वादे किए हैं. आपने सात प्रतिबद्धताओं का ज़िक्र किया है. क्या आप बता सकते हैं कि इनमें से सबसे अहम क्या है?

जेमी मैकगोल्डरिक: "मुझे लगता है कि इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है ग़ाज़ा में बेहतर पहुँच व अधिक राहत लाने के अधिक ज़रिए. मेरा मतलब है, अभी हम बहुत सीमित राहत सामग्री ही ला पा रहे हैं.

दक्षिणी ग़ाज़ा के रफ़ाह में कुछ बच्चे पीने के लिए पानी भर रहे हैं.
UN News/Ziad Taleb

रफ़ाह जाने के लिए हमारे पास केवल एक प्रमुख चौकी है, केरेम शालोम, और यहाँ से हम प्रतिदिन 250 ट्रक ही ले जा सकते हैं. हमें प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक ट्रक भरी सामग्री पहुँचाने की आवश्यकता है. और ऐसा करने के लिए हम पहले दिन से ही जॉर्डन के रास्ते, अधिक ज़रियों की माँग कर रहे हैं, लेकिन हमें प्रति सप्ताह केवल 100 ट्रक ही ले जाने की अनुमति मिली है.हमें प्रतिदिन 30 से 50 ट्रक ले जाने की अनुमति होनी चाहिए. 

और फिर उत्तर में स्थित आधुनिक बंदरगाह, अशदोद को भी दोबारा खोलने का आग्रह किया गया है. वहाँ से हम प्रतिदिन 100 ट्रक और ला सकते हैं.तो केरेम शालोम के साथ मिलकर, हमारे पास प्रतिदिन लगभग 500 ट्रक होंगे, जो ज़मीनी स्तर पर बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करेंगे. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण होगा उत्तर में राहत सहायता पहुँचाना, जो अकाल के कगार पर है.

यूएन न्यूज: इसराइली पक्ष में आपके जानकारों के मुताबिक़ इन वादों को कब पूरा किया जाएगा, और ग़ाज़ावासियों को इससे कब तक राहत मिलने की उम्मीद है?

जेमी मैकगोल्डरिक: उम्मीद है कि जल्दी ही. शुक्रवार को हुई बैठक में हमें बताया गया कि तैयारियाँ जारी हैं. और कल जॉर्डन में सभी पक्षों व अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र तथा जॉर्डन के सशस्त्र बलों के साथ एक बैठक हुई है, जिसमें वर्तमान में मौजूद सीमित मार्गों की समस्या से निपटने के तरीक़ों पर विचार-विमर्श हुआ.

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इसके साथ ही, हम इसराइली अधिकारियों पर दबाव बनाकर, अशदोद बंदरगाह खोलने के बारे में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे दक्षिण से लाने की बजाय, सीधे इरेज़, या अन्य उत्तरी चौकियों सेअधिक आपूर्ति लाई जा सके.मुझे लगता है कि इससे हम खाद्य सहायता की मात्रा में बहुत तेज़ी से वृद्धि कर पाएँगे. 

फ़िलहाल, हम उत्तर की ओर एक दिन में केवल 10 से 20 ट्रक ही ले जा पा रहे हैं, जबकि हमें 30 ट्रकों बराबर सामग्री पहुँचाने की आवश्यकता है - वो भी हर एक दिन, बिना चूक के.तभी हम गम्भीर खाद्य असुरक्षा और ख़ासतौर पर सबसे कमज़ोर समूहों को अकाल व भुखमरी से बचा सकेंगे.

यूएन न्यूज: योजना से लेकर इरादे और आश्वासन तक, विभिन्न वादे हैं. लेकिन क्या यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा सहायता वितरण को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने और ग़ाज़ा में मुँह बाँए खड़ी अकाल की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त हैं?

जेमी मैकगोल्डरिक: मुझे लगता है कि हमें इन्हीं चीज़ों का वादा दिया गया है. और जैसा कि आपको याद होगा, यह यूएन की टीम द्वारा एक लम्बी पैरोकारी के बाद सम्भव हुआ है.

दुखद बात यह है कि यह पिछले दिनों हुई गम्भीर घटना के परिणामस्वरूप हासिल हुआ, जिसमें वर्ल्ड सेंट्रल किचन के सात लोग मारे गए थे. साथ ही, इसे सम्भव बनाने में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत करने जैसे राजनैतिक कारण भी शामिल हैं. मुझे लगता है कि इससे बात सार्थक रूप से आगे बढ़ी है और हालाँकि हमें तुरन्त इसके आरम्भ होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, लेकिन इसकी तैयारी ज़रूर शुरू की जा सकती है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सार्वजनिक घोषणा से एक सकारात्मक शुरूआत हो गई है, और अब हम वापस जाकर उनपर जल्दी कार्यवाही करने का दबाव बना सकते हैं. इस क्षेत्र में और तेल अवीव में हमारे कई उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद हैं, जो इन नए वादे व रियायतों को जल्दी अमल में लाने के लिए ज़ोर लगा रहे हैं.

यूएन न्यूज: आपने कहा कि हाल ही में इसराइल ने ग़ाज़ा में लोगों की पीड़ा को स्वीकार करते हुए, राहत सहायता के आवागमन को सुविधाजनक बनाने की अपनी भूमिका को माना है. तो क्या यह समझा जाए कि संयुक्त राष्ट्र वास्तव में सभी-कुछ करने के लिए तैयार था, लेकिन रास्ते में बाधाएँ बहुत थीं? और आपके हिसाब से क्या इसराइली अधिकारियों को पहले इस अपार पीड़ा और सुविधा प्रदान करने की अपनी क्षमता स्पष्ट नहीं थी?

जेमी मैकगोल्डरिक: मुझे लगता है कि आपको यह समझना होगा कि इसराइल में केवल एक पक्ष सक्रिय नहीं है. मतलब यह कि वो एक समरूप निकाय नहीं है. उसका राजनैतिक पक्ष अब बहुत हद तक दक्षिणपंथी विचारधारा का है.

इसके अलावा एक युद्ध मंत्रिमंडल भी है, जिसमें 7 अक्टूबर की दुखद घटनाओं के बाद गम्भीर युद्ध की मंशा रखने वाले लोग मौजूद हैं. और फिर नागरिक समाज है, जो बंधकों की रिहाई के लिए बहुत ज़ोर दे रहा है.तो इसराइली नागरिक समाज और राजनेताओं के संयुक्त हिस्से हैं. और फिर सेना है, आईडीएफ़ है. हमारे पास समन्वय सम्पर्क प्रशासन है, और उनके पास COGAT है, जिससे हमें नियमित रूप से निपटना पड़ता है. तो वहाँ कई अलग-अलग हिस्से हैं.

और इसलिए, हमें उन्हें समझाने का तरीक़ा ढूँढना होगा. लेकिन धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से यह होता नज़र आ रहा है. और मुझे लगता है कि यह उन कोशिशों का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसमें हमने उत्तर में कुपोषण और दुर्बलता के कारण अनुमान से अधिक बच्चों के मरने के सबूत दिए थे.

उन्हें समझना चाहिए कि हम वहाँ क्यों हैं और क्या करने की कोशिश कर रहे हैं. इन प्रयासों का मक़सद जिन्दगियाँ बचाने के अलावा और कुछ नहीं है.

और मुझे लगता है कि यह सब राजनीति के साथ-साथ, राष्ट्रपति बाइडेन जैसे राजनेताओं के दबाव और इस क्षेत्र में आई उनकी टीम के कारण सम्भव हुआ है. आम धारणा यह है कि प्रगति नहीं हुई है और हम लम्बे समय से इसकी माँग करते आ रहे हैं.

ग़ाज़ा के दीयार अल-बलाह के एक अस्थाई आश्रय के बीच, भोजन के डिब्बों से बनाया गया एक तम्बू.
UN News/Ziad Taleb

यूएन न्यूज: और अगर यह प्रतिबद्धताएँ पूरी हो जाती हैं, तो सहायता वितरण के सामने कौन सी अन्य चुनौतियाँ होंगी?

जेमी मैकगोल्डरिक: मुझे लगता है कि हमारे सामने मौजूदा स्थिति, बहुत अस्थिर व प्रतिकूल सैन्य गतिविधि से भरपूर है. लाखों लोग इसका ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं. ग़ाज़ा पट्टी में हर किसी को हमसे किसी न किसी तरह के समर्थन की आवश्यकता है.चूँकि लोग बेहद हताशा है, वहाँ क़ानून-व्यवस्था का मुद्दा निश्चित रूप से बहुत बड़ा है. इसलिए ट्रक नज़र आने पर लोग उन्हें लूटते हैं, तोड़फोड़ करते हैं.

मतलब यह है कि शायद पूरी तरह भोजन सभी लोगों को नहीं मिल पा रहा है. इसलिए, हमारे लिए स्थिति पर क़ाबू पाना बहुत महत्वपूर्ण है. और स्थिरता लाने का केवल एक तरीक़ा है, उस क्षेत्र में हर जगह भोजन की भरमार कर देना.

उसे विमुद्रीकृत करके, उसका मूल्य छीन लिया जाना चाहिए, ताकि इलाक़े में स्थिरता क़ायम हो और हमें सहायता प्रदान करने में आसानी हो.

क्योंकि अभी हम योजना के अनुसार किसी भी देश में दो से तीन दिन का भण्डार ही रखते हैं, इसलिए हमें इसे बदलना होगा और अस्थिरता, अराजकता, शून्य सुरक्षा की स्थिति में भारी मात्रा में भोजन की उपलब्धता रखनी होगी. चूँकि हम जानते हैं कि रफ़ाह पर आक्रमण हो सकता है, इसलिए हमें पहले से ही भण्डार भरने की व्यवस्था करनी होगी. और अभी, हमारे लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं है.

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यूएन न्यूज: आप कह रहे हैं कि रफ़ाह पर आक्रमण हो सकता है, तो क्या इसे टालने की कोई उम्मीद भी नज़र आ रही है, ख़ासतौर पर अब, जबकि इसराइली पक्ष सुनने लगा है और दुनिया भर से दबाव पड़ने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है?

जेमी मैकगोल्डरिक: मुझे लगता है कि वो सुन तो रहे हैं. लेकिन उनका मक़सद युद्ध के ज़रिए काफ़ी-कुछ हासिल करना भी है, और मुझे लगता है कि उनका यह मक़सद किसी भी मानवीय उद्देश्य पर भारी पड़ेगा.

उनके लिए युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है, वो अभी अन्तिम पड़ाव पर नहीं पहुँचे हैं. मेरे ख़्याल से ख़ान यूनिस से सैन्य वापसी, आगे की रणनीति तैयार करने के लिए की गई है.

साथ ही इसराइली आबादी में ऐसे लोग भी हैं, जो बंधकों की वापसी चाहते हैं. जनता की राय पर किए गए किसी भी सर्वेक्षण में स्पष्ट हो जाएगा कि उनका एक बड़ा प्रतिशत रफ़ाह पर चढ़ाई किए जाने के पक्ष में नहीं है.

हालाँकि किसी भी लोक-आंदोलन में हमारी कोई भूमिका नहीं है, लेकिन हमें लोगों के रफ़ाह छोड़ने की स्थिति के लिए तैयार रहना होगा, क्योंकि उनके जाने लायक जगह कम ही बची हैं. हमें पर्याप्त सामग्री, गैर-खाद्य वस्तुओं, आश्रय, ज़रूरतों की चीज़ों व पानी उपलब्ध करवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, ख़ासतौर पर वर्ष के इस समय में जब मौसम बहुत गर्म है और चालित स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षा का अभाव है.

तो, ये सभी बड़े मुद्दे हैं, और हमारे पास पर्याप्त क्षमता व संसाधन नहीं हैं व इसकी तैयारी के लिए हमें संघर्ष करना पड़ रहा है. तो उम्मीद है कि रास्तों के खुलने से, हम उस क्षेत्र में भोजन व अन्य वस्तुएँ भरना शुरू कर सकते हैं, आने वाली विपदा के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं.

यूएन न्यूज: तो एक तरह से आप समय के विरूद्ध दौड़ लगाने की कोशिश में हैं?

जेमी मैकगोल्डरिक: बिल्कुल सही. अभी हम मुश्किल से ही ज़रूरतें पूरी कर पा रहे है. हमारे पास छोटा सा स्टॉक है, और जरूरतें विशाल हैं.

और निस्संदेह, इसमें अभी उत्तर का इलाक़ा शामिल नहीं है, जहाँ मानवीय ज़रूरतों हृद्य-विदारक हैं. जब तक हम इसका समाधान नहीं कर लेते, तब तक हम यह नहीं कह सकते हैं कि हम अन्य आपात स्थितियों की तरह, इनसे निपटने के लिए भण्डार रख सकते हैं. फिर रफ़ाह में आक्रमण की योजना चल रही है, जिससे 8 लाख लोग विस्थापित हो सकते हैं.