ग़ाज़ा: सहायता कर्मियों पर इसराइली हवाई हमले की कड़ी निन्दा, 7 की मौत
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों ने, ग़ाज़ा में इसराइली सेना के हवाई हमलों में, परोपकारी संगठन – वर्ल्ड सैंट्रल किचन के सात सहायता कर्मियों की मौत की कड़ी निन्दा की है. मंगलवार को ये चिन्ताएँ एक बार फिर दोहराई गई हैं कि “ग़ाज़ा में कोई भी स्थान सुरक्षित नहीं है”.
इसराइल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्र के लिए, यूएन मानवीय सहायता समन्वयक जेमी मैकगोल्ड्रिक ने कहा है, “यह कोई अकेली घटना नहीं है. क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों में, अक्टूबर 2023 से 20 मार्च तक, कम से कम 196 मानवीय सहायताकर्मी मारे जा चुके हैं.”
उन्होंने कहा कि यह संख्या, एक वर्ष में किसी एक टकराव में मारे गए लोगों की संख्या से लगभग तीन गुना अधिक है.
जेमी मैकगोल्ड्रिक ने, इसराइल सरकार सहित, युद्ध के सभी पक्षों से, अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का सम्मान करने की अपीलें दोहराई हैं, जिसमें मानवीय सहायता कर्मियों को निशाना बनाना निषिद्ध है.
उन्होंने कहा, “सहायता कर्मियों की भूमिका, किसी संकट स्थिति में लोगों की तकलीफ़ो को दूर कनरा है. उनकी और जिन लोगों को वो सहायता मुहैया कराते हैं, उन सभी की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित की जानी होगी.”
सहायता में जीवन बलिदान
संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकार जेमी मैकगोल्ड्रिक की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वर्ल्ड सैंट्रल किचन ने बताया कि दियर अल-बलाह में उसके सहायता कर्मियों की मौत के लिए, एक इसराइली हमला ज़िम्मेदार है.
यूएन आपदा राहत समन्वयक मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने इन हमलों पर आक्रोष व्यक्त किया है और इसराइली हमले में मारे गए इन सहायता कर्मियों को ऐसे “हीरो क़रार दिया, जिन्होंने भुखमरी का सामना कर रहे लोगों तक भोजन पहुँचाने की कोशिश में अपने जीवन का बलिदान दिया”.
WHO की प्रवक्ता डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने, मार्टिन ग्रिफ़िथ्स के इस सन्देश को दोहराते हुए कहा कि वर्ल्ड सैंट्रल किचन के इस सहायता मिशन, इसराइल से पूर्व अनुमति मिली थी और संगठन की कार पर भी “स्पष्ट रूप में उसकी पहचान लिखी हुई थी – वर्ल्ड सैंट्रल किचन”.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने एक ट्वीट सन्देश में कहा है, “युद्धविराम होने तक, और कितने जीवनों की हानि होगी.”
उन्होंने कहा कि वो सहायता कर्मियों की मौत पर क्रुद्ध हैं और सहायता कार्य करने वालों को पुख़्ता सुरक्षा मुहैया कराना, बुनियादी अनिवार्यता है.
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA ने कहा है कि वो सात मानवीय सहायता कर्मियों की मौत पर बहुत दुखी है और शोक सन्तप्त है. एजेंसी ने, ये भी ध्यान दिलाया कि 7 अक्टूबर (2023) को हिंसा और युद्ध भड़कने के बाद से, एजेंसी 176 सहायता कर्मी मारे गए हैं.
इससे पहले वर्ल्ड सैंट्रल किचन के एक वक्तव्य में बताया गया कि उसकी गतिविधियों के स्थानों और रास्तों की जानकारी इसराइली सेना को दिए जाने के बावजूद, उसके क़ाफ़िले पर हमला किया गया.
अस्पताल मलबे में तब्दील
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि 750 बिस्तरों वाला अल-शिफ़ा अस्पताल, इसराइली हमले का बाद बन्द हो गया है और सहायता टीमें, तबाह हुए इस अस्पताल में पहुँचने के लिए, कई दिनों से इसराइली मंज़री का इन्तेज़ार कर रही थीं.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा है कि अल-शिफ़ा अस्पताल में, कर्मचारियों और मरीज़ों को भीषण हिंसा का सामना करना पड़ा है.
WHO की प्रवक्ता डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने मंगलवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया, “हमन अस्पताल के कर्मचारियों के साथ सम्पर्क किया है, और अस्पताल के निदेशकों ने बताया कि अल-शिफ़ा अस्पताल ख़त्म हो चुका है, यह अस्पताल अब किसी भी रूप या आकार में या तरीक़े से काम करने लायक नहीं बचा है.”
डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने बताया कि अल-शिफ़ा अस्पताल अब मलबे में तब्दील हो चुका है और इसराइली सैनिकों की, लगभग दो सप्ताह की घेराबन्दी व हमले के दौरान कम से कम 21 मरीज़ मारे गए हैं.
संगठन की प्रवक्ता ने बताया कि अस्पताल में जैसे-जैसे हालात बिगड़े, चिकित्सा कर्मचारियों ने, मरीज़ों को अस्पताल के तहख़ाने में स्थित एक दफ़्तर में पहुँचाया गया, जहाँ कोई भोजन, पानी या शौचालय भी उपलब्ध नहीं थे. 15 लोगों के लिए, पानी की केवल एक ही बोतल उपलब्ध थी.
डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने बताया कि चिकित्सा स्टाफ़ के पास, मरीज़ों की देखभाल करने के लिए कोई साधन नहीं बचे हैं. “आप वहाँ जारी भीषण स्थिति का अन्दाज़ा लगा सकते हैं.”
प्रवक्ता ने कहा कि अगर अल-शिफ़ा अस्पताल और उत्तरी ग़ाज़ा में बाक़ी बची स्वास्थ्य सेवाओं में पहुँचने के लिए, इसराइली अनुमति मिलने पर, वहाँ दवाएँ, ईंधन और भोजन सामग्री पहुँचाए जाने की योजना है.
इसराइली अनुमति से इनकार
डॉक्टर मार्गरेट हैरिस ने बताया, “हम कई दिनों से वहाँ पहुँचने की कोशिशें कर रहे हैं और हमारे मिशनों को लगातार रोक दिया गया है.”
उन्होंने बताया कि अस्पताल का आकलन किया जाना ज़रूरी है और अगर वहाँ बचे मरीज़ों को बेहतर स्थान पहुँचाने की ज़रूरत होगी, तो वह भी किया जाना ज़रूरी है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की अधिकारी ने कहा कि अभी तक, सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी, अपना काम करते हुए, मारे जा चुके हैं.
7 अक्टूबर को हमास द्वारा इसराइल में किए गए आतंकी हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए थे और लगभग 240 लोगों को बन्धक बनाया गया था. उसके बाद ग़ाज़ा में, इसराइली बमबारी में 32 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 70 प्रतिशत महिलाएँ और बच्चे हैं.