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ग़ाज़ा युद्ध: इसराइली बमबारी शुरू होने के बाद, 212 स्कूल बने 'सीधे निशाना'

ग़ाज़ा युद्ध में बुनियादी ढाँचे को भीषण हानि हुई है जिसमें स्कूलों की तबाही भी शामिल है.
© UNICEF/Eyad El Baba
ग़ाज़ा युद्ध में बुनियादी ढाँचे को भीषण हानि हुई है जिसमें स्कूलों की तबाही भी शामिल है.

ग़ाज़ा युद्ध: इसराइली बमबारी शुरू होने के बाद, 212 स्कूल बने 'सीधे निशाना'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक विश्लेषण में बुधवार को कहा गया है कि ग़ाज़ा पट्टी में, लगभग छह महीने की इसराइली भीषण बमबारी में 212 स्कूलों को “सीधे रूप” में निशाना बनाया गया है.

सैटेलाइट तस्वीरों में नज़र आता है कि 7 अक्टूबर 2023 को भड़के इस युद्ध में, कम से कम 53 स्कूल पूरी तरह तबाह हो गए हैं.

यूएन बाल कोष – यूनीसेफ़, ग़ैरसरकारी संगठन ऐजूकेशन क्लस्टर और सेव द चिल्ड्रन के अनुसार मध्य फ़रवरी के बाद से, स्कूल परिसरों पर हमलों में लगभग 9 प्रतिशत वृद्धि भी दर्ज की गई है.

रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि स्कूल सुविधाओं पर हमलों के बढ़ते चलन ने, ग़ाज़ा में पहले से ही भीषण स्थिति को, और भी बदतर बना दिया है, जिसमें इसराइली बमबारी हवा से, ज़मीन और समुद्री रास्तों से, पूरे ग़ाज़ा पट्टी में की गई है.

असीम विध्वंस

ग़ाज़ा में लगभग 563 स्कूल इमारतें हैं. 212 स्कूल इमारतों में से, 165 पर उन हमलों में सीधे हमले किए गए जिन्हें इसराइली सेना ने, ख़ाली कराने के लिए चिन्हित किया था.

रिपोर्ट के अनुसार, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA द्वारा संचालित आधे से भी अधिक (57%) स्कूलों को, इन हमलों में सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है. 

इसके अलावा इसराइली बमबारी और ज़मीनी हमलों में सरकारी इमारतों को भी निशाना बनाया गया है.

यूएन समर्थित इस रिपोर्ट में, इस युद्ध के प्रभाव के दायरे को रेखांकित किया गया है. 

साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि यह युद्ध शुरू होने से पहले, सवा 6 लाख छात्रों और 22 हज़ार अध्यापक, 813 स्कूलों में उपस्थित रहते थे.