वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

हिंसक संघर्ष से जान बचाने की कोशिश में, हर तीन में से एक प्रवासी ने गँवाई जान

तट पर पहुंचने के बाद एक नया शरणार्थी कंकड़ वाले समुद्र तट पर औंधे मुंह लेटा हुआ है, उसके पास ही अन्य प्रवासी और एक बचाव नौका मौजूद है।
© UNICEF/Ashley Gilbertson ग्रीस के उत्तरी ईजियन क्षेत्र में लैसबोस द्वीप में पहुँचने वाले शरणार्थियों की मदद करते हुए स्वेच्छाकर्मी. (फ़ाइल)

हिंसक संघर्ष से जान बचाने की कोशिश में, हर तीन में से एक प्रवासी ने गँवाई जान

प्रवासी और शरणार्थी

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने आगाह किया है कि हर तीन प्रवासी मौतों में से एक की वजह हिंसक टकराव है, जब जान बचाने के लिए भाग रहे प्रवासी रास्ते में ही अपनी जान गँवा देते हैं.

यूएन एजेंसी ने मंगलवार को अपनी एक नई रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें पिछले एक दशक के दौरान प्रवासी मौतों और उनके लापता होने पर चिन्ताजनक रुझान उजागर हुए हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, अपनी जान खो देने वाले एक-तिहाई से अधिक प्रवासी उन देशों से हैं, जोकि या तो हिंसक टकराव से ग्रस्त हैं या फिर जहाँ विशाल शरणार्थी आबादी है.  

विश्लेषण में उन ख़तरों के प्रति आगाह किया है, जिनका सामना हिंसाग्रस्त इलाक़ों से अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित मार्ग के बिना भाग रहे लोगों को करना पड़ता है.

Tweet URL

वर्ष 2023 अब तक का सर्वाधिक जानलेवा साल साबित हुआ है, और 8,541 प्रवासियों ने अपनी जान गँवाई. क़रीब 60 फ़ीसदी मौतें, लोगों के डूबने से हुईं.

जिन प्रवासियों की मौत की पुष्टि हुई, उनमें से दो-तिहाई से अधिक की शिनाख़्त नहीं हो पाई है. इससे उनके परिवारों और समुदायों को अपने प्रियजन के बारे में पुष्ट सूचना नही मिल पाने से जूझना पड़ता है.

वर्ष 2024 के लिए भी ऐसे ही चिन्ताजनक रूझान नज़र आए हैं. भूमध्यसागर मार्ग के ज़रिये पहुँचने वाले प्रवासियों की संख्या 2024 में अब तक 16,818 रही है, जोकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 26,984 थी.

इसके बावजूद, अब तक 956 प्रवासियों की मौतों की पुष्टि हो चुकी हैं जोकि क़रीब पहले जितनी ही हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन का कहना है कि मृतकों की शिनाख़्त ना होने के मामले अब भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं.

प्रवासी मौतों का दशक

इस रिपोर्ट, A Decade of Documenting Migrant Deaths, में पिछले 10 वर्षों में 63 हज़ार प्रवासियों की मौत होने या उनके लापता होने के मामलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है.

यूएन एजेंसी की लापता प्रवासी परियोजना से आँकड़ों के अनुसार, प्रवासन के दौरान अपनी जान गँवाने वाले 26,666 लोगों के अवशेष अब तक बरामद नहीं हो पाए हैं.  

IOM में संचालन अभियान की उपमहानिदेशक उगोची डेनियल्स ने बताया कि ऐसे लोगों की बड़ी संख्या में मौत हुई है, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है. 

वहीं, पिछले 10 वर्ष में अब तक लगभग साढ़े पाँच हज़ार महिलाओं की प्रवासन मार्गों पर मौत हुई है और बिना शिनाख़्त वाले बच्चों की संख्या क़रीब साढ़े तीन हज़ार है.

रिपोर्ट में महिलाओं व बच्चों की कहीं अधिक संख्या में मौतें होने की आशंका व्यक्त की गई है. 37 हज़ार से अधिक ऐसे मृतक है, जिनकी आयु या लिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

सुरक्षित प्रवासन मार्ग पर बल

यूएन एजेंसी के विश्लेषण में स्पष्ट किया गया है कि हिंसक टकरावों से प्रभावित इलाक़ों में अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए मार्ग मुहैया कराए जाने होंगे. 

केन्द्रीय भूमध्यसागर सबसे जानलेवा मार्ग है, जहाँ वर्ष 2014 के बाद से अब तक 23 हज़ार से अधिक लोगों की जान गई है. 

उपमहानिदेशक उगोची डेनियल्स ने बताया कि सम्वेदनशील हालात का सामना कर रही आबादियों और परिवारों के लिए यह बेहद पीड़ादायी है. 

और इसलिए, इस विश्लेषण के निष्कर्षों को ठोस कार्रवाई में तब्दील किया जाना होगा.

इस क्रम में, उन्होंने विस्तृत जानकारी जुटाने पर बल दिया, जिससे अपने देशों में कठिनाइयों से जूझ रहे या हिंसक टकराव से जान बचाकर भाग रहे लोगों के लिए सुरक्षित प्रवासन मार्ग तैयार किए जा सकें.

IOM ने 2024-2028 के लिए अपनी एक नई रणनैतिक योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य सफ़र कर रहे लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा करना है.

इस क्रम में, सभी देशों व साझेदार संगठनों से संयुक्त रूप से प्रयास करने की अपील की गई है ताकि प्रवासी मौतों की घटनाओं पर विराम लगाया जा सके.