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कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) पर यूएन महासभा में अहम प्रस्ताव पारित

यूएन महासभा की बैठक (फ़ाइल फ़ोटो)
UN Photo/Loey Felipe
यूएन महासभा की बैठक (फ़ाइल फ़ोटो)

कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) पर यूएन महासभा में अहम प्रस्ताव पारित

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षित व भरोसेमन्द कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफ़िशियल इंटैलीजेंस/एआई) प्रणालियों को बढ़ावा देने के इरादे से गुरूवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है, ताकि इनके ज़रिये सर्वजन तक टिकाऊ विकास का लाभ पहुँचाया जा सके.

अमेरिका के नेतृत्व में इस प्रस्ताव को तैयार किया गया था, जोकि बिना मतदान के पारित हुआ है. 

प्रस्ताव में ज़ोर देकर कहा गया है कि एआई प्रणालियों के विकास, उनके डिज़ाइन व इस्तेमाल में मानवाधिकारों के प्रति सम्मान व संरक्षण को सुनिश्चित किया जाना होगा.

120 से अधिक सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित या अपना समर्थन दिया.

यूएन महासभा ने टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्यों को हासिल करने में तेज़ी लाने के लिए एआई प्रणालियों की क्षमताओं को रेखांकित किया है. 

यह पहली बार है जब महासभा ने इस उभरते हुए क्षेत्र में नियामन के लिए एक प्रस्ताव को पारित किया है.  

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस महीने कहा कि इस प्रस्ताव का पारित होना, एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की दिशा में एक ऐतिहासिक क़दम होगा.

ऑनलाइन या ऑफ़लाइन, समान अधिकार

यूएन महासभा ने सभी सदस्य देशों और हितधारकों से आग्रह किया है कि ऐसी एआई प्रणालियों से बचा जाना होगा, जिनका अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के अनुरूप इस्तेमाल सम्भव नहीं है, या फिर जिनसे मानवाधिकारों के लिए ख़तरा पनप सकता है. 

प्रस्ताव में ज़ोर देकर कहा गया है कि आम जीवन में लोगों को जो अधिकार हासिल हैं, वहीं अधिकार ऑनलाइन माध्यमों पर सुनिश्चित किए जाने होंगे. 

शान्ति व सुरक्षा पर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव पर सुरक्षा परिषद विचार कर रही है.
© Unsplash/Steve Johnson

यूएन महासभा ने सभी सदस्य देशों, निजी सैक्टर, नागरिक समाज, शोध संगठनों और मीडिया से एआई टैक्नॉलॉजी के सुरक्षित व भरोसेमन्द इस्तेमाल के लिए, नियामन व प्रशासन व्यवस्था को विकसित और उसका समर्थन करने का आहवान किया है.

डिजिटल खाई को पाटना

यूएन महासभा के अनुसार, देशों के भीतर और उनके बीच, प्रौद्योगिकी विकास में अन्तर व्याप्त है. विकासशील देशों को विशेष रूप से तेज़ी से बदलती टैक्नॉलॉजी से उपजने वाले चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.  

इसके मद्देनज़र, सदस्य देशों समेत सभी हितधारकों से अपील की गई है कि विकासशील देशों के साथ सहयोग व उन्हें समर्थन प्रदान करना आवश्यक है, ताकि उन्हें भी इसका लाभ पहुँचाया जा सके और डिजिटल दरार को पाटना व डिजिटल साक्षरता को बढ़ाना सम्भव हो. 

अन्य क्षेत्रों के लिए आशा

यूएन में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत लिन्डा थॉमस-ग्रीनफ़ील्ड ने प्रस्ताव पेश करते हुए भरोसा जताया कि इसके मसौदे को तैयार करने के लिए समावेशी व सृजनात्मक सम्वाद हुआ. और इस अनुभव का इस्तेमाल अन्य क्षेत्रों में एआई की चुनौतियों से निपटने में किया जा सकता है.

उदाहरणस्वरूप, शान्ति व सुरक्षा में और एआई प्रणालियों के सैन्य इस्तेमाल में.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU), संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) और मानवाधिकार परिषद पहले से ही इस विषय में सक्रिय हैं और यह प्रस्ताव उनके काम को और मज़बूती देगा. 

अमेरिकी राजदूत ने भरोसा जताया कि एआई का इस्तेमाल, मानवता के लेंस के ज़रिये किया जाएगा और इस प्रक्रिया में मानव गरिमा, सुरक्षा, बुनियादी स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों का ख़याल रखा जाएगा.