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#CSW68: 'भारत सहित हर जगह, महिलाओं व लड़कियों के लिए एक बेहतर दुनिया सम्भव'

UN Women की कार्यकारी निदेशक सीमा सामी बहौस ने न्यूयॉर्क में CSW68 के एक साइड इवेंट के दौरान पोडियम पर खड़े होकर भाषण दिया।
Screenshot यूएन महिला संस्था की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास विषय पर यूएन में भारत के स्थाई मिशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित किया.

#CSW68: 'भारत सहित हर जगह, महिलाओं व लड़कियों के लिए एक बेहतर दुनिया सम्भव'

महिलाएँ

महिलाओं और लड़कियों के लिए एक बेहतर दुनिया सम्भव है, ना केवल भारत में बल्कि हर जगह. महिला-मज़बूती के लिए कार्यरत यूएन संस्था – UN Women की कार्यकारी निदेशक सीमा समी बहौस ने, महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) की 68वीं वार्षिक बैठक के अवसर पर, भारतीय मिशन द्वारा मंगलवार को आयोजित एक संगोष्ठि में यह आशा व्यक्त की है.

दुनिया भर में, लैंगिक समानता हासिल करने के रास्ते में, महिलाओं का नेतृत्व, महिलाओं की अगुवाई में विकास, निर्धनता उन्मूलन, संस्थान-निर्माण, और लैंगिक-अनुकूल धन की उपलब्धता, जैसे मुद्दे आपस में जुड़ हुए हैं जो एक सकारात्मक माहौल बनाते हैं. 

इन्हीं मुद्दों की प्रासंगिकता और अहमियत पर विचार करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने, UN Women के साथ मिलकर, मंगलवार को यह कार्यक्रम आयोजित किया. 

सीमा बहौस ने इस विचार गोष्ठि में, भारत में महिला मज़बूती की दिशा में हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि जब महिलाएँ नेतृत्व पदों पर समान रूप से होती हैं तो सभी लोगों का प्रदर्शन बेहतर होता है.

उन्होंने कहा कि आँकड़े दिखाते हैं कि जब महिलाएँ सरकार के भीतर नेतृत्व के पदों पर काम करती हैं तो, ऐसी अधिक सम्भावना है कि वो स्वास्थ्य, शिक्षा, लोगों के बेहतर रहन-सहनको प्राथमिकताओं पर रखती हैं, और जब वो शान्ति निर्माण प्रक्रियाओं में शिरकत करती हैं तो प्राकृतिक संसाधनों को प्राथमिकता देती हैं.

“कम्पनियों के भीतर भी जब महिलाएँ नेतृत्व पदों पर काम करती हैं तो परिणाम अधिक समावेशी और टिकाऊ होता हैं.”

इस कार्यक्रम की विडियो रिकॉर्डिंग यहाँ देखी जा सकती है:

सीमा बहौस ने कहा कि “सवाल ये नहीं है कि तब क्या होता है जब महिलाएँ नेतृत्व भूमिका में होती हैं, सवाल ये है कि हम इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर कार्रवाई क्यों नहीं करते.”
उन्होंने बताया कि दुनिया भर में केवल 11 प्रतिशत देशों में, महिलाएँ राष्ट्राध्यक्ष हैं.

“दुनिया भर में लगभग स्थानीय निकायों के लगभग 60 लाख निर्वाचित सदस्य है, जिनमें महिलाओं की संख्या, केवल एक तिहाई यानि क़रीब 20 लाख है.”

सीमा बहौस ने कहा कि इन 20 लाख निर्वाचित महिला सदस्यों में से, क़रीब 14 लाख महिलाएँ, केवल भारत में हैं, जोकि दुनिया भर में स्थानीय निकायों की सरकारों में महिलाओं की कुल संख्या का लगभग 70 प्रतिशत है.

क़ानूनों से महिला - मज़बूती

उन्होंने इस सम्बन्ध में भारत में, विधायिकाओं में महिला प्रतिनिधित्व का बारे में हुई प्रगति का ज़िक्र करते हुए कहा कि दो दशक पहले, भारत में, स्थानीय निकायों के सभी हिस्सों में महिलाओं का प्रतिधित्व सुनिश्चित करने के लिए, क़ानून बनाया था.

“पिछले वर्ष ही, भारत में, लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए, महिला आरक्षण विधेयक 2023 पारित किया.” यूएन महिला संस्था की मुखिया ने प्रबल आशा व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की मज़बूती व लैंगिक समानता कि दिशा में विशाल बदलाव पहुँच के भीतर है.

उन्होंने कहा कि भविष्य में एक दिन, इस तरह के संवाद इस वाक्य के साथ आरम्भ होंगे – महिलाएँ नेतृत्व भूमिकाएँ निभा रही हैं क्योंकि यह उनका बुनियादी अधिकार है.

सीमा बाहौस ने, इस अवसर पर, भारत में यूएन महिला संस्था द्वारा एक पुस्तक प्रकाशित किए जाने की सराहना भी की जिसमें, भारत में अपने निजी जीवन, समुदायों और अन्य महिलाओं की मज़बूती के लिए, असाधारण काम या यात्रा करने वाली साहसिक महिलाओं की आपबीतियाँ शामिल की गई हैं.

United Nations में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने न्यूयॉर्क में CSW68 के एक साइड इवेंट में भाषण दिया।
UN News

भारत में महिला-मज़बूती में प्रगति

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा काम्बोज ने इस विचार गोष्ठि का आरम्भ करते हुए कहा कि भारत सरकार, महिलाओं की सार्थक भागेदारी की विशाल शक्ति को पूरी तरह पहचानती है, जिसके तहत महिला विकास से आगे बढ़कर, महिलाओं के नेतृत्व में विकास की तरफ़ काम किया जा रहा है.

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि तमाम महिलाओं को अगुवाई करने का अवसर मिलेगा और वो एक विकसित देश में योगदान कर्ता के रूप में रास्ता बनाएंगी.

राजदूत रुचिरा काम्बोज ने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, रोज़गार पर ध्यान देकर और उद्यमिता में पूर्ण भागेदारी की ख़ातिर, उनकी मज़बूती के लिए एक बहु-कोणीय रणनीति तैयार की जा रही है.

उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का लक्ष्य, देश के सामाजिक-आर्थिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को आगार देने में, लैंगिक समानता और लैंगिक न्याय के साथ-साथ महिलाओं की पूर्ण भागेदारी सुनिश्चित करना है.