ग़ाज़ा: रफ़ाह में ज़मीनी इसराइली हमले से अत्याचारपूर्ण अपराध बढ़ने का जोखिम
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) वोल्कर टर्क ने शुक्रवार को आगाह किया है कि ग़ाज़ा पट्टी में घनी आबादी वाले शहर, रफ़ाह में इसराइली सेना के किसी भी प्रकार के हमले से अत्याचार व अपराधों का जोखिम बढ़ने की आशंका है. ग़ाज़ा में लड़ाई की वजह से सामूहिक विस्थापन का शिकार 15 लाख फ़लस्तीनियों ने फ़िलहाल रफ़ाह में शरण ली हुई है.
यूएन मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता जैरेमी लॉरेंस ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि मौजूदा स्थिति पहले से ही विनाशकारी है और यदि आगामी दिनों में इसराइली सैन्य बलों ने दक्षिणी ग़ाज़ा के सीमावर्ती शहर में अभियान शुरू किया तो ये रसातल में समा सकती है.
इसराइली सेना ने धमकी दी है कि अगर रमदान शुरू होने से पहले, हमास चरमपंथियों ने शेष बन्धकों को रिहा नहीं किया तो, रफ़ाह पर धावा बोल दिया जाएगा.
विश्व भर में मुसलमानों के लिए रमदान का पवित्र महीना इस सप्ताहान्त आरम्भ हो रहा है, जोकि “शान्ति व सहिष्णुता का सम्मान करने का समय है.”
यूएन एजेंसी प्रवक्ता जैरेमी लॉरेंस ने बताया कि ग़ाज़ा पट्टी में लाखों लोगों के पास जान बचाकर भागने के लिए कोई और स्थान नहीं है, और उन्हें बेहद कठिन परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
“रफ़ाह में किसी भी ज़मीनी हमले से विशाल स्तर पर जीवन हानि होगी, और अत्याचार भरे अपराधों का जोखिम बढ़ जाएगा. इसे होने से रोकना होगा.”
उनके अनुसार, रमदान के महीने में पूर्वी येरूशेलम और अल अक़्सा मस्जिद में फ़लस्तीनियों की आवाजाही पर पाबन्दी लगाए जाने की आशंका है, जिससे तनाव और भड़क सकता है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने, इसके मद्देनज़र, हिंसक टकराव पर तत्काल विराम लगाने और मौतों व विध्वंस के सिलसिले को रोकने की अपील दोहराई है.
बन्धक बिना शर्त रिहा हों
7 अक्टूबर को हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों द्वारा इसराइल में किए गए हमलों के दौरान 1,200 लोगों की मौत हुई और लगभग 250 लोगों को बन्धक बना कर ग़ाज़ा में ले जाया गया था, जो पिछले 150 दिनों से पीड़ा भुगत रहे हैं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने उन सभी को बिना किसी शर्त के रिहा किए जाने और उनकी वापसी की अपील की है.
इसके बाद, इसराइली की जवाबी सैन्य कार्रवाई में अब तक ग़ाज़ा में 30,878 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं और 72 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं. हताहतों की वास्तविक इससे कहीं अधिक होने की आशंका है.
मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (UNOCHA) ने ग़ाज़ा में स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि गुरूवार दोपहर से शुक्रवार सुबह तक 78 फ़लस्तीनी मारे गए हैं और 104 घायल हुए हैं.
यूएन प्रवक्ता जैरेमी लॉरेंस ने ध्यान दिलाया कि इसराइल को, एक क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून के तहत अपने दायित्वों का पूर्ण रूप से निर्वहन करना होगा.
इसके तहत, ग़ाज़ा में हताश नागरिक आबादी को ज़रूरी भोजन, चिकित्सा आपूर्ति मुहैया कराना ज़रूरी है और आवश्यकताओं के अनुरूप मानवीय सहायता पहुँचाए जाने की अनुमति दी जानी होगी.
उन्होंने सीमा चौकियों व गलियारों को पूरी तरह से खोले जाने और ऐसे क़दम उठाने का आग्रह किया, जिससे राहत क़ाफ़िले पूरी सुरक्षा के साथ, स्वतंत्र रूप से ज़रूरतमन्द आबादी तक पहुँच सकें.
बस्तियों का विस्तार, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का हनन
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइल द्वारा 3,476 घरों के निर्माण को हरी झंडी दिए जाने की भर्त्सना की है.
उन्होंने कहा कि बस्तियाँ बसाए जाने के काम में नाटकीय तेज़ी आई है, जिससे लम्बे समय से दमन, हिंसा और फ़लस्तीनियों के साथ भेदभाव के रुझानों को बल मिलेगा.
वोल्कर टर्क ने मानवाधिकार परिषद के लिए अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यहूदी बस्तियाँ बसाए जाने और उनका विस्तार करने के मामलों को, इसराइल द्वारा अपनी नागरिक आबादी को क़ाबिज़ इलाक़े में बसाने की श्रेणी में रखा जा सकता है, जोकि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के तहत एक युद्ध अपराध है.
इस रिपोर्ट में 1 नवम्बर 2022 से 31 अक्टूबर 2023 की अवधि की घटनाओं का लेखाजोखा है, जिसके अनुसार पश्चिमी तट में पहले से मौजूदा इसराइली बस्तियों में 24,300 आवास इकाइयों पर काम होने की जानकारी दी गई है.
वर्ष 2017 के बाद से यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है, जिनमें 9,670 आवास इकाइयाँ पूर्वी येरूशेलम में हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि बेन्यामिन नेतनयाहू सरकार की मौजूदा नीतियाँ अभूतपूर्व हद तक, इसराइली बस्तियों में विस्तार की मुहिम के उद्देश्यों के अनुरूप है, ताकि पश्चिमी तट में दीर्घकालिक विस्तार किया जाए और क़ाबिज़ इलाक़े को फिर इसराइली राष्ट्र में मिला लिया जाए.
600 से अधिक हमले
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने क्षोभ प्रकट किया कि पश्चिमी तट पहले से ही संकट में है. इसके बावजूद, बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा हिंसा नए स्तर पर पहुंच रह है, जिससे व्यावहारिक तौर पर एक फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की सम्भावना धूमिल होने का जोखिम है.
यूएन के आँकड़े दर्शाते हैं कि 7 अक्टूबर के बाद से अब तक फ़लस्तीनियों के विरुद्ध इसराइली बस्तियों के निवासियों ने, 603 हमले किए हैं.
19 चरवाहा समुदायों से, कुल 1,222 फ़लस्तीनी लोग, हिंसक घटनाओं के कारण विस्थापन का शिकार हुए हैं.
इसी अवधि में, बस्तियों के बाशिन्दों द्वारा बन्दूकों का इस्तेमाल किए जाने की घटनाओं में, 9 फ़लस्तीनियों के मारे जाने की जानकारी है. वहीं, 396 लोग इसराइली सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए हैं.
7 अक्टूबर के बाद से अब तक 592 लोग पश्चिमी तट में विस्थापित हुए हैं, जिनमें 282 बच्चे भी हैं. इसराइल द्वारा निर्माण परमिट नहीं दिए जाने की वजह से, उनके घरों को ध्वस्त कर दिया गया.