बढ़ रहा है मोटापा, क़रीब एक अरब लोग चपेट में
दुनिया भर में मोटापा अपना दायरा बढ़ा रहा है. पृथ्वी पर मौजूद हर 8 में से औसतन एक इनसान, मोटापे के साथ जीवन जी रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक नई वैश्विक चिकित्सा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2022 में लगभग एक अरब लोग मोटापे की चपेट में थे.
ब्रिटेन की एक प्रसिद्ध पत्रिका द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन के आँकड़ों के अनुसार, 1990 के बाद से मोटापे की चपेट में आने वाले वयस्कों की संख्या लगभग दो गुनी हो गई है.
जबकि 1990 के बाद से, मोटापे की चपेट में आने वाले, पाँच से 19 वर्ष के बच्चों व किशोरों की संख्या, चार गुनी हुई है. यानि इस आयु की आबादी में मोटापा अपना दायरा बहुत तेज़ी से बढ़ा रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी – WHO ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में सहयोग दिया है.
एजेंसी के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि "यह नया अध्ययन आहार, शारीरिक गतिविधि और आवश्यकतानुसार पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से, शुरुआती जीवन से वयस्कता तक, मोटापे को रोकने की अहमियत पर रौशनी डालता है."
मोटापे पर क़ाबू
मोटापे को एक जटिल दीर्घकालिक बीमारी समझा जाता है जो एक संकट बन गया है. यह एक ऐसी महामारी के रूप में उभर रहा है जिसमें पिछले कुछ दशकों में भारी वृद्धि हुई है.
संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, वैसे तो मोटापे के लिए ज़िम्मेदार कारणों के साथ-साथ, इस संकट को रोकने के लिए आवश्यक साक्ष्य-आधारित कार्यक्रमों की ज़रूरत को भी समझा जाता है, मगर समस्या यह है कि उन्हें लागू नहीं किया जाता है.
संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य प्रमुख ने कहा कि देशों की सरकारों और समुदायों को मोटापे पर क़ाबू पाने के वैश्विक लक्ष्यों की पूर्ति की ख़ातिर, कार्रवाई और प्रगति के मार्ग पर वापिस लौटना होगा.
इन प्रयासों को डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों की साक्ष्य-आधारित नीतियों का समर्थन प्राप्त होगा.
उन्होंने कहा कि इसमें निजी क्षेत्र के सहयोग की भी आवश्यकता है, जिसे अपने उत्पादों के स्वास्थ्य प्रभावों के लिए जवाबदेह होना होगा.
अध्ययन के आँकड़ों से यह भी मालूम होता है कि वर्ष 2022 में, अधिक वज़न वाले वयस्कों की संख्या, 43 प्रतिशत थी.
घातक परिणाम
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, योरोप में, अधिक वज़न या मोटापा, लोगों की मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है. अनुमान है कि मोटापे के कारण, हर वर्ष 12 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है.
मोटापा कई ग़ैर-संचारी रोगों के ख़तरे को बढ़ाता है, जिनमें हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह (डायबिटीज़) और साँस सम्बन्धी पुरानी बीमारियाँ शामिल हैं.
संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि अधिक वज़न वाले और मोटापे से ग्रस्त लोग, कोविड -19 महामारी के परिणामों से अलग-अलग रूप से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अक्सर अधिक गम्भीर बीमारी और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है.
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अधिक वज़न या मोटापे को, कम से कम 13 विभिन्न प्रकार के कैंसर का कारण माना जाता है, जो पूरे योरोप में, सालाना कैंसर के कम से कम दो लाख नए मामलों के लिए, सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हो सकता है.
कैसे रुकेगा मोटापा
वर्ष 2022 में विश्व स्वास्थ्य सभा में, सदस्य देशों ने मोटापे को रोकने के लिए, WHO की प्रोत्साहन योजना को स्वीकृत किया था, जो 2030 तक देशों के स्तर पर कार्रवाई का समर्थन करती है.
अभी तक 31 देशों की सरकारें, इस योजना को लागू करके, मोटापे की महामारी पर अंकुश लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.
इन देशों की सरकारें जो कुछ तरीक़े अपना रही हैं उनमें बच्चों को जन्म के तुरन्त बाद स्तनपान को बढ़ावा देना और बच्चों के लिए भोजन व पेय पदार्थों के हानिकारक विज्ञापनों पर नियंत्रण के लिए नियम व क़ानून बनाना जैसे मुख्य उपाय शामिल हैं.