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ग़ाज़ा: मानवीय सहायता आपूर्ति में, जनवरी से अब तक 50% की कमी

ग़ाज़ा के दक्षिणी इलाक़े - रफ़ाह में लाखों परिवार, अस्थाई टैंटों में रहने को विवश हैं.
© UNICEF/Eyad El Baba
ग़ाज़ा के दक्षिणी इलाक़े - रफ़ाह में लाखों परिवार, अस्थाई टैंटों में रहने को विवश हैं.

ग़ाज़ा: मानवीय सहायता आपूर्ति में, जनवरी से अब तक 50% की कमी

मानवीय सहायता

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (UNRWA) के अनुसार, हिंसक टकराव से प्रभावित ग़ाज़ा में फ़रवरी महीने बेहद कम मात्रा मे मानवीय सहायता पहुँचाई जा सकी है, और जनवरी महीने की तुलना में 50 फ़ीसदी की कमी दर्ज की गई है.

यूएन एजेंसी के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपने सन्देश में कहा है कि ग़ाज़ा में 20 लाख लोगों की विशाल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानवीय सहायता के स्तर को बढ़ाए जाने की ज़रूरत है, नाकि उसमें कमी लाने की.

महाआयुक्त लज़ारिनी ने क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि ग़ाज़ा पट्टी में लोग बेहद हताश परिस्थितियों में जीवन गुज़ार रहे हैं.

उन्होंने बताया कि राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी, ग़ाज़ा पट्टी की दो सीमा चौकियों के नियमित रूप से बन्द रहने, सैन्य कार्रवाई के कारण पसरी असुरक्षा और नागरिक व्यवस्था के ध्वस्त हो जाने की वजह से, सहायता अभियान में मुश्किलें पेश आ रही हैं.

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फ़िलिपे लज़ारिनी ने कहा कि ज़रूरतमन्दों तक जीवनरक्षक मदद पहुँचाना, वाणिज्यिक आपूर्ति को बहाल करना और युद्धविराम लागू करना बेहद ज़रूरी हैं.

यूएन एजेंसी ने सोमवार को प्रकाशित अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बताया कि इस महीने, औसतन, 98 राहत ट्रकों ने ग़ाज़ा में प्रवेश किया है.

सुरक्षा हालात और केरेम शलोम और रफ़ाह चौकियों के अस्थाई रूप से बन्द होने के कारण सहायता आपूर्ति लाने में चुनौतियाँ पेश आ रही हैं.

UNRWA ने बताया कि सुरक्षा चिन्ताओं के कारण, अस्थाई तौर पर सामग्री को वितरित करने पर रोक लगाई गई है. सीमा चौकियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर हुआ है, जिनके नज़दीक इसराइली गोलाबारी में कई फ़लस्तीनी पुलिसकर्मी मारे गए हैं. 

रफ़ाह में हवाई कार्रवाई

ग़ाज़ा पट्टी में ज़मीनी सैन्य अभियान और भीषण बमबारी जारी है, विशेष रूप से उत्तरी ग़ाज़ा, डेयर अल बालाह और ख़ान यूनिस इलाक़ों में.

भीषण लड़ाई से बचने के लिए स्थानीय आबादी, ख़ान यूनिस से निकल करके दक्षिण में रफ़ाह का रुख़ कर रही है. 

रफ़ाह में लगभग 15 लाख फ़लस्तीनियों ने शरण ली हुई है, और यह मौजूदा हालात में अन्तरराष्ट्रीय चिन्ता का विषय है चूँकि यहाँ बड़े पैमाने पर इसराइली आक्रमण का जोखिम है.

यूएन एजेंसी ने कहा है कि रफ़ाह में बढ़ते हवाई हमलों के कारण आशंका गहरा रही है कि मानवीय सहायता अभियान पर बोझ और बढ़ेगा. इनमें से अनेक हमले बिना किसी पूर्व सूचना के आवासीय इलाक़ों में किए गए हैं.

इन हालात में लोगों ने रफ़ाह से डेयर अल बालाह और नुसेरात शरणार्थी शिविरों में जाना शुरू किया है, जोकि मध्य ग़ाज़ा में स्थित हैं. हालाँकि इन इलाक़ों में भी लड़ाई और हवाई हमलों की ख़बरें मिली हैं.

मानवीय सहायता जानकारी

ग़ाज़ा में 75 फ़ीसदी से अधिक आबादी, यानि क़रीब 17 लाख लोग हिंसक टकराव के कारण विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं.

7 अक्टूबर को इसराइल पर हमास के आतंकी हमलों के बाद इसराइल ने बड़े पैमाने पर ग़ाज़ा में कार्रवाई शुरू की है, जिसमें जान-माल की बड़ी हानि हुई है.

यूएन एजेंसियों ने फिर आगाह किया है कि ग़ाज़ा में भूख संकट गहरा रहा है. 20 लाख से अधिक लोग संकट या उससे बदतरीन स्तर पर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं.

इसराइल से ग़ाज़ा में आने वाली तीन जल पाइपलाइन में से केवल एक संचालित हो पा रही है, और वो भी आधी से कम क्षमता पर.

83 फ़ीसदी भूगर्भीय कुँए, अपशिष्ट जल के शोधन की व्यवस्था ठप है और उत्तरी गवर्नरेट में स्वच्छ जल सुलभ नहीं है. 

नवजात शिशुओं की मौत

मानवीय सहायता मामलों में समन्वय के लिए यूएन एजेंसी (OCHA) और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फ़लस्तीनी रैड क्रेसेंट को अपना समर्थन दिया है, जिसके तहत ख़ान यूनिस में स्थित नासेर अस्पताल से 72 गम्भीर मरीज़ों को बाहर लाने में सफलता मिली है.

इस अस्पताल में कामकाज अब भी बेहद कठिन है, बिजली व्यवस्था का अभाव है और जल, भोजन की क़िल्लत है, जबकि कूड़ा-कचरा जमा हुआ है.

इस बीच, यूएन जनसंख्या कोष (UNFPA) ने सोमवार को बताया कि ग़ाज़ा में गर्भवती व बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं की पर्याप्त जाँच ना होने के कारण नवजात शिशुओं की मौत हो रही है.

वहीं, भीषण बमबारी और बेचैनी के कारण समय से पहले ही जन्म होने के मामले भी सामने आए हैं. 

यूएन एजेंसी ने बताया कि रफ़ाह के एक मातृत्व अस्पताल में प्रसव के लिए केवल पाँच बिस्तर हैं, मगर ज़रूरी आपूर्ति के अभाव के बावजूद यहाँ एक रात में 78 बच्चों ने जन्म लिया है.