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'स्वच्छ ऊर्जा' खनिजों व उनके खनन की असतत प्रक्रिया पर 5 तथ्य

एक विशाल खुली खदान में भारी मशीनरी, जिसमें एक बड़ा डंप ट्रक और एक उत्खनन यंत्र शामिल हैं, काम कर रही हैं।
© Unsplash/Omid Roshan ईरान में एक ताम्बा खदान.

'स्वच्छ ऊर्जा' खनिजों व उनके खनन की असतत प्रक्रिया पर 5 तथ्य

मानवाधिकार

यदि दुनिया को जीवाश्म ईंधन से दूर जाना हैतो हमें पवन टरबाइन और सौर संयंत्रों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को चलाने के लिए, अत्यधिक दुर्लभ खनिजों का खनन करना होगा. लेकिनऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इन खनिजों का खनन एक असतत प्रक्रिया हैजो पर्यावरण को हानि पहुँचाती है और मानवाधिकारों के हनन का कारण बन सकती है.

हम सभी जानते हैं कि हम जलवायु संकट से जूझ रहे हैं: तापमान बढ़ रहा है, मौसम अधिक चरम होता जा रहा है, और इसका अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं सम्पूर्ण समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है.

हालाँकि कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि हम जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तेज़ी से कार्रवाई नहीं रहे हैं, ऊर्जा क्षेत्र, विशाल, असतत बिजली स्टेशनों पर निर्भर ऊर्जा स्रोतों से मुँह मोड़ रहा है, जो वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों का ढेर जमा कर देते हैं, और सौर व पवन जैसे स्वच्छ स्रोतों का रुख़ कर रहा है. 

हालाँकि, कम उत्सर्जन वाली दुनिया की बिजली आपूर्ति के लिए, हमें बहुत अधिक खनिजों का खनन करने की आवश्यकता होगी, और यह अक्सर एक असतत प्रक्रिया होती है. यहाँ "ऊर्जा संक्रमण खनिजों" के बारे में जानकारी दी गई है कि उन्हें ज़मीन से बाहर निकालने से होने वाले नुक़सान को कैसे सीमित किया जा सकता है...

ऑस्ट्रेलिया में कच्चे, खनित चट्टानों और खनिजों का एक नजदीकी दृश्य।
© Unsplash/Paul-Alain Hunt

1. ऊर्जा संक्रमण खनिज: ये क्या होते हैं, और कहाँ पाए जाते हैं.

संक्रमण खनिज, प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ हैं जो नवीकरणीय प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल किए जाते हैं. लिथियम, निकल और कोबाल्ट बैटरी के मुख्य घटक हैं, जैसे बिजली चालित वाहनों को ऊर्जा प्रदान करने वाली बैटरी में होते हैं. यह दुर्लभ पृथ्वी तत्व, उन चुम्बकों का भी हिस्सा होते हैं, जो पवन टरबाइन और इलैक्ट्रिक मोटरों को चलाने में काम आते हैं. बिजली आपूर्ति करने वाली लाइनों में भी ताम्बे व अल्यूमीनियम का भारी मात्रा में उपयोग किया जाता है.

यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों में, चट्टानों में पाए जाते हैं, लेकिन इनका निष्कर्षण मुट्ठी भर देशों और कम्पनियों के नियंत्रण में है. जैसेकि चीन में सबसे दुर्लभ पृथ्वी सामग्री का खनन होता है, इंडोनेशिया सबसे अधिक निकल का खनन करता है, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से अधिकतर कोबाल्ट आता है. कई ऊर्जा संक्रमण खनिज, भूमि से घिरे विकासशील देशों में पाए जाते हैं, जिनमें से कुछ तो, दुनिया के अल्पतम विकसित देशों में से हैं.

दक्षिण कैरोलिना के लोकतांत्रिक गणराज्य में एक खुली खदान स्थल पर नीली कमीज और टोपी पहने एक खनिक अपने कंधे पर एक हरा बेसिन ले जा रहा है।
© UNDP

2. ऊर्जा संक्रमण खनिजों के बाज़ार में विशाल स्तर पर वृद्धि

स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली में बदलाव से इन खनिजों की माँग बढ़ेगी. अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2017 और 2022 के बीच, लिथियम की माँग तीन गुना, निकल की माँग 40 प्रतिशत और कोबाल्ट की माँग 70 प्रतिशत बढ़ी. 

यदि दुनिया को पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाना है और नैट ज़ीरो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना है, तो 2040 तक ऊर्जा संक्रमण खनिजों का उपयोग छह गुना बढ़ाना होगा. इससे संक्रमण खनिजों का बाज़ार मूल्य, 400 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ सकता है.

3. खनिज-समृद्ध देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ

प्रभावी नीतियों और सुरक्षा उपायों के साथ, इन पदार्थों के खनन से सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत हो सकती है. रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे और देशों को ग़रीबी कम करने में मदद मिलेगी. 

संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) के न्यूयॉर्क कार्यालय के प्रमुख, लिगिया नोरोन्हा कहते हैं, "कुछ देशों के लिए, सही परिस्थितियों में ऊर्जा संक्रमण खनिज, बड़ा बदलाव ला सकते हैं."

घने कोहरे से भरी एक पहाड़ी घाटी में स्थित, सीढ़ीदार ढलानों और भारी मशीनरी से सुसज्जित एक विशाल खुली खदान का हवाई दृश्य।
© Unsplash/Omid Roshan

4. ...लेकिन इसे लेकर कोई चिन्ताएँ भी हैं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने हाल ही में चेतावनी दी, "हम बुनियादी कच्चे माल के उत्पादन के लिए विकासशील देशों के व्यवस्थित शोषण की अतीत की ग़लतियों को दोहरा नहीं सकते.” मानवाधिकार समूहों ने विकासशील देशों की खदानों सहित पूरे उद्योग में मानवाधिकारों के हनन की चेतावनी दी है. कुछ स्थलों पर जबरन मज़दूरी कराए जाने की भी ख़बरें आई हैं.

यदि सतत तरीक़े से खनन नहीं किया जाता है तो इससे पर्यावरण तबाह हो सकता है, जिससे वनों की कटाई, जल प्रदूषण और निर्जलीकरण का सामना करना पड़ेगा. उदाहरण के लिए, एक टन लिथियम निकालने में 20 लाख लीटर पानी लगता है. लेकिन ताम्बे और लिथियम के वैश्विक उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत भाग, पानी की कमी वाले क्षेत्रों में होता है.

5. संयुक्त राष्ट्र, खनिजों का सतत खनन सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है

ऊर्जा संक्रमण खनिजों का उचित एवं सतत प्रबन्धन सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र-व्यापी प्रयास चल रहे हैं. इन खनिजों की आपूर्ति श्रृँखलाओं में, भरोसा, विश्वसनीयता और स्थिरता बनाने के उद्देश्य से 2023 में यह पहल शुरू की गई थी.

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, कोबाल्ट जैसे खनिजों के निष्कर्षण के लिए एक राष्ट्रीय योजना विकसित करने हेतु सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस योजना के तहत, खनन का पर्यावरणीय प्रभाव घटाने पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, यह पता लगाया जाएगा कि क्या स्थानीय एवं अन्तरराष्ट्रीय संस्थान, खनिज खनन से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA-6) का छठा सत्र 26 फ़रवरी से 1 मार्च 2024 तक, केनया के नैरोबी शहर में स्थित UNEP मुख्यालय में आयोजित किया जा रहा है. प्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे खनिजों और धातुओं के स्थाई खनन व अन्य प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्रवाई आगे बढ़ाएंगे.