यूक्रेन: युद्ध के विनाशकारी प्रभाव, पीढ़ियों तक होंगे महसूस
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण ने, एक "भयानक मानवीय क़ीमत" चुकाई है, जिससे लाखों नागरिकों को भारी पीड़ा का सामना करना पड़ा है, जिसे "पीढ़ियों तक" महसूस किया जाएगा. 24 फ़रवरी 2022 को शुरू हुआ यूक्रेन युद्ध, अब तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, एक नई रिपोर्ट जारी करते समय एक वक्तव्य में कहा है, "यूक्रेन पर रूस का पूर्ण पैमाने पर सशस्त्र हमले का कोई अन्त नहीं नज़र आ रहा है. यह गम्भीर और व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन का कारण बन रहा है, जिससे जीवन और आजीविकाएँ नष्ट हो रही हैं."
फ़रवरी में, यूक्रेन पर रूस के पूर्ण हमले के ना दो साल पूरे हो रहे हैं, बल्कि रूस द्वारा यूक्रेन के स्वायत्त गणराज्य क्रीमिया और सेवस्तोपोल शहर पर अवैध रूप से क़ब्जा करने के भी 10 साल पूरे हो गए हैं.
लाखों लोग विस्थापित, हज़ारों की मौत
यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन ने, अपनी नवीनतम रिपोर्ट में, 24 फरवरी 2022 से अभी तक, 30 हज़ार 457 लोगों के हताहत होने की पुष्टि की है, जिनमें 10 हज़ार 582 लोग मारे गए हैं और 19 हज़ार 875 घायल हैं. वास्तविक संख्या इससे काफ़ी अधिक होने की सम्भावना है.
युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हो गए हैं, हज़ारों लोगों ने अपने घर खो दिए हैं, और सैकड़ों चिकित्सा व शैक्षणिक संस्थान क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकारों पर भारी प्रभाव पड़ा है.
वोल्कर टर्क ने कहा, "यूक्रेन में इस युद्ध का दीर्घकालिक प्रभाव पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा."
मानवाधिकारों का गम्भीर उल्लंघन
पिछले दो वर्षों में, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय - OHCHR ने रूसी सशस्त्र बलों द्वारा नागरिकों की व्यापक यातना, दुर्व्यवहार और मनमानी हिरासत के बारे में दस्तावेज़ जुटाए हैं.
दस्तावेज़ों के अनुसार, रूस के क़ब्जे वाले क्षेत्र में लोगों को जल्दबाज़ी में मौत का शिकार बनाना, लोगों को जबरन ग़ायब करना और अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता के अधिकार का दमन भी दर्ज किया गया है.
इसके अलावा, निगरानी मिशन ने, 550 से अधिक पूर्व यूक्रेनी युद्धबन्दियों और नागरिक बन्दियों के साथ साक्षात्कार में, रूसी सशस्त्र बलों द्वारा अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के गम्भीर उल्लंघन का संकेत दिया गया है, जिसमें लोगों को जल्दबाज़ी में मृत्युदंड देना और और व्यापक यातनाएँ शामिल हैं.
24 फ़रवरी 2022 के बाद से, क़ब्जे वाले क्रीमिया में पहले से ही गम्भीर मानवाधिकार की स्थिति और भी बदतर हो गई है. रूसी क़ब्जे की आलोचना करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय अगले सप्ताह, एक दशक पुराने रूसी क़ब्जे पर एक रिपोर्ट जारी करेगा.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कहा है, "वर्तमान रूसी हमला, यूक्रेनी बलों को भी अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का सम्मान करने के अपने दायित्वों से छूट नहीं देता है."
शान्ति की तत्काल आवश्यकता
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने, पिछले दो वर्षों के दौरान यूक्रेनी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए अनेक मानवाधिकार उल्लंघनों का आलेखन किया है जोकि, भले ही रूसी बलों द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों के दायरे की तुलना में कम हो फिर भी, इसके मद्देनज़र, यूएन मानवाधिकार कार्यालय, यूक्रेनी अधिकारियों के साथ, इन मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहा है.
मानवाधिकार उच्चायुक्त ने, यूक्रेन पर निरन्तर सशस्त्र हमले को तुरन्त बन्द करने के लिए रूस से अपने आहवान को दोहराते हुए, न्यायसंगत शान्ति बहाली की तात्कालिकता पर ज़ोर दिया और रूस से मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) को पूर्ण पहुँच की अनुमति देने की फिर से अपील की.
आईओएम का चार्ट
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने गुरूवार को कहा है कि 1.46 करोड़ से अधिक लोग यानि यूक्रेन की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को, वर्ष 2024 में किसी न किसी प्रकार की मानवीय सहायता की आवश्यकता है और 22 लाख शरणार्थियों को पड़ोसी देशों में सहायता की आवश्यकता है.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की महानिदेशक एमी पोप ने कहा, "विनाश बहुत व्यापक है, जीवन की हानि और पीड़ा जारी हैं."
उन्होंने कहा कि 1.4 करोड़ से अधिक लोग यानि यूक्रेन की लगभग एक तिहाई आबादी, पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से अपने घर छोड़कर पलायन कर गए हैं. परिवारों के लोग बिछड़ गए हैं, बच्चे बेघर हो गए हैं और समुदाय नष्ट हो गए हैं.
यूक्रेन के भीतर ही, लगभग 37 लाख लोग विस्थापित हैं, जबकि लगभग 65 लाख लोग अन्य देशों में शरणार्थी हैं. अब तक 45 लाख से अधिक लोग या तो विदेश से या देश के भीतर विस्थापन से घर लौट आए हैं.
यूक्रेन में युद्ध बढ़ने के बाद से, आईओएम ने देश और 11 पड़ोसी देशों में 65 लाख लोगों की सहायता की है, और सबसे जरूरतमन्द लोगों को महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक सहायता प्रदान की है.
एमी पोप ने कहा, "जरूरतें बहुत अधिक हैं, इसलिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत है."