दक्षिण सूडान में, शून्य अपशिष्ट के ज़रिए, उम्मीद की किरण
स्कूलों और घरों के लिए शून्य ऊर्जा वाले रौशनी के बल्ब और मज़बूत ईंटें. दुनिया भर में इस साल के अन्त तक प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रतिबन्ध लगाने की मुहिम जारी है. ऐसे में, दक्षिण सूडान के कुछ समुदायों ने, संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) की जलवायु और पर्यावरण वैज्ञानिक शाज़नीन साइरस गज़दर के नेतृत्व में, विशेषज्ञों की एक छोटी टीम के साथ मिलकर, प्लास्टिक कचरे के पुन: उपयोग का एक अनूठा तरीक़ा निकाला है.
यह टीम, इस युवा राष्ट्र की पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने हेतु, स्थानीय अधिकारियों और नागरिक समाज के साथ मिलकर, प्लास्टिक की बोतलों के पुन: उपयोग के लिए नए समाधान खोजने के प्रयास कर रही है.
इसके लिए सामान आपूर्ति की कोई समस्या तो है नहीं.
शाज़नीन साइरस गज़दर कहती हैं, "जूबा में जब भी बारिश होती है, तो अनुमान के अनुसार सप्ताहान्त की बारिश के दौरान, आपको मिट्टी में मिला लगभग 25 हज़ार किलोग्राम प्लास्टिक कचरा दिख जाएगा, जो नालियों में बहकर, अंततः ‘टॉमिंग कैम्प’ में चला जाता है."
दरअसल, गज़दार, राजधानी जूबा के दो संयुक्त राष्ट्र केन्द्रों में से एक के बारे में बात कर रही हैं, जो वहाँ मौजूद लगभग 18 हज़ार शान्तिरक्षकों में से कई का घर है.
“उसके बाद, प्लास्टिक कचरा इन सभी नालों से निकलकर सुन्दर, लम्बी, शुद्ध नील नदी में समा जाता है, जो बारिश के पानी से मटमैली हो जाती है. इसलिए, हम ऐसी प्रणालियाँ स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं जहाँ हम कचरे को नील नदी तक पहुँचने से पहले ही निकाल सकें."
जलवायु झटकों से निपटने की कोशिश
2011 में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह के बाद दक्षिण सूडान की आज़ादी के बाद से, इसे कई राजनैतिक, सामाजिक आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, अपनी समृद्ध जैव विविधता, जीवन से भरपूर नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद, यह दुनिया के पाँच सबसे अधिक जलवायु-असुरक्षित देशों में से एक है.
हाल के वर्षों में, बाढ़ और सूखे के विनाशकारी चक्र से खेती में बाधाएँ आ रही हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा घट रही है और सालाना लगभग दस लाख लोगों पर असर पड़ा है. औसत से अधिक बारिश होने से, इसकी नदियाँ व सहायक नदियाँ बाढ़ग्रस्त हो रही हैं, जिससे घरों, खेतों और स्कूलों सहित भूमि का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है.
राजनैतिक और आर्थिक अनिश्चितता से अपशिष्ट प्रबन्धन और री-सायकलिंग जैसी सार्वजनिक सेवाएँ प्रभावित हुई हैं, जिससे नील नदी की तरफ़ बढ़ता यह कचरा, देश के जलमार्गों एवं आर्द्रभूमि में यह कचरा फैलने लगा है. दक्षिण सूडान की नील नदी, 11 अन्य अफ़्रीकी देशों के लिए भी जल की स्रोत है.
20 करोड़ से अधिक लोग अपनी आजीविका के लिए नील नदी पर निर्भर हैं. ख़राब अपशिष्ट प्रबन्धन से रासायनिक व प्लास्टिक रिसाव हो सकता है जो पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, मानव स्वास्थ्य तथा आर्थिक समृद्धि के लिए ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.
एसडीजी 12: सतत उत्पादन और खपत
• रोकथाम, कटौती, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के ज़रिए अपशिष्ट उत्पादन को काफ़ी हद तक कम करना
• प्राकृतिक संसाधनों का स्थाई प्रबन्धन और कुशल उपयोग
• खुदरा एवं उपभोक्ता स्तर पर प्रति व्यक्ति वैश्विक भोजन बर्बादी को आधा करना और कम्पनियों को स्थाई प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना
• अधिक टिकाऊ उपभोग और उत्पादन चलन की ओर बढ़ने के लिए विकासशील देशों को उनकी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता मज़बूत करने में सहायता करना• टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नीतियाँ लागू करना, जो रोज़गार पैदा करें और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा दें• व्यर्थ उपभोग को बढ़ावा देने वाली अकुशल, जीवाश्म ईंधन अनुदान को चरणबद्ध तरीक़े से समाप्त करना
हर साल 48 लाख से लेकर 1 करोड़ 27 लाख टन प्लास्टिक, हमारे महासागरों में फेंक दिया जाता है.
'नवाचार, पुन: उपयोग एवं समाधान'
शाज़नीन साइरस गज़दर और उनकी टीम, समुदाय के लोगों - स्थानीय अधिकारियों और ‘हरित युवा सशक्तिकरण’ जैसे ग़ैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के अलावा, समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर काम करती हैं. उन्हें दक्षिण सूडान की पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए रचनात्मक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया जाता है.
शाज़नीन साइरस गज़दर कहती हैं, "इन कठिन परिस्थितियों में भी आपकी रचनात्मकता जीवित है, इसलिए नवाचार करें, जो आपके पास है उसका उपयोग करें और समाधान पहचानें.”
उन्होंने दो दक्षिण सूडानी युवजन, ऐलिस सबुनी और एंड्रयू उगाला के साथ मिलकर, एक गैलन प्लास्टिक की बोतलों को ईंटों की तरह उपयोग करके, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण करने में सफलता हासिल की है.
शाज़नीन साइरस गज़दर कहती हैं कि एंड्रयू उगाला, एक शिक्षक के रूप में, अपने छात्रों से शुल्क लेने के बजाय, स्कूल में प्रतिदिन दो प्लास्टिक की बोतलें लाने के लिए कहते हैं ताकि वे भी निर्माण परियोजना में योगदान दे सकें.
उनके छात्र, इस तरह पुनर्चक्रण का महत्व और साधन सम्पन्न होना सीखते हैं.
प्लास्टिक की बोतलों को नया जीवन
शाज़नीन साइरस गज़दर ने बताया, "चूँकि वर्तमान में दक्षिण सूडान में री-सायक्लिंग सुविधाएँ नहीं हैं, इसलिए हम इन प्लास्टिक की बोतलों को मिट्टी से भरकर, इनका निर्माण के लिए पुन: उपयोग कर रहे हैं."उनकेे स्थायित्व और क्षरण प्रतिरोधक क्षमता को देखते हुए, प्लास्टिक से बनी ईंटे बेहद मज़बूत होती हैं.
“इन ग़ैर सरकारी संगठनों ने अद्भुत संरचनाओं का निर्माण किया है. इन अपसायकिल्ड प्लास्टिक बोतलों से स्कूलों के साथ-साथ स्नानघर, घर, पानी की टंकियाँ और सामुदायिक केंद्र भी बनाए गए हैं.''
पुन: उपयोग के लिए प्लास्टिक कचरे की कोई कमी नहीं है. पिछले साल, 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, UNMISS द्वारा आयोजित एक सफ़ाई कार्यक्रम में, शान्तिरक्षकों ने कचरे के 1,500 थैले इकट्ठे किए थे.
किन्यारवांडा में ‘उमुगांडा’ का अर्थ होता है "साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होना." रवांडा में इससे प्रेरित एक मासिक सामुदायिक सफ़ाई अभियान के तहत UNMISS ने, लोगों को अपने पर्यावरण की देखभाल के लिए एक साथ लाने के लिए, ऐसे अधिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है.
उत्सर्जन में कटौती व रोज़गार के अवसर
प्लास्टिक का पुन: उपयोग, जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद करता है. प्लास्टिक अपने पूरे जीवन चक्र में ग्रह पर पर्यावरण और जीवन के लिए हानिकारक होता है. UNEP के अनुसार, इन्हें बनाने में ज़्यादातर जीवाश्म ईंधन का प्रयोग होता है, जिससे एक वर्ष में लगभग दो अरब मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन सम्भव होता है.
शाज़नीन साइरस गज़दर ने बताया, "इन इमारतों में एक तिहाई कम सीमेंट का इस्तेमाल होता है और पारम्परिक ईंटों का उपयोग न होने के कारण अनगिनत ग्रीनहाउस गैसों को कम किया जा सकता हैं. ये इमारतें बड़े उष्णकटिबंधीय तूफ़ानों और छोटे भूकम्पों का भी सामना करने में सक्षम हैं."
प्लास्टिक ईंटों से बनी इमारतें
आज, जुबा में प्लास्टिक की ईंटों से बनी कई इमारतें मौजूद हैं. आश्रय और सुरक्षा प्रदान करने के अलावा, इमारतों का निर्माण स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं के लिए रोज़गार का एक स्रोत भी बन गया है.इसके बाद, शाज़नीन गज़दर की टीम, मिशन के ‘त्वरित प्रभाव परियोजना’ तंत्र के तहत, जुबा में नए शहर अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र व दक्षिण सूडान सीमा सुरक्षा पुलिस के लिए, एक महिला उत्कृष्टता केंद्र में अपशिष्ट संग्रह स्थल बनाने की योजना बना रही है.
यह केंद्र, महिला पुलिस अधिकारियों को काम करने के लिए एक स्थिर और सुरक्षित स्थान प्रदान करेगा. वर्तमान में, उनके लिए वर्दी बदलने के लिए कोई शौचालय या निजी स्थान नहीं है.
उन्होंने बताया, ''हम सभी केंद्र बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं. महिला पुलिस (अधिकारियों) ने हमें अपनी इच्छाओं की सूची दी है - कार्यालय, चेंजिंग रूम, भण्डारण, शौचालय एवं प्रशिक्षण कक्ष. हमारे कार्यान्वयन भागीदार, ग़ैर सरकारी संगठन, मूल रूप से अपसायकल प्लास्टिक की बोतलों तथा शून्य ऊर्जा प्रकाश बल्बों का उपयोग करके केंद्र का निर्माण करेंगे.
दुनियाभर में प्लास्टिक प्रदूषण को किस तरह ख़त्म किया जा सकता है, जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.
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शून्य ऊर्जा प्रकाश बल्ब
प्लास्टिक की बोतलों सेों ऊर्जा कुशल इमारतों के लिए रौशनी के शानदार बल्ब भी बनाए जा सकते हैं. दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNMISS) की शाज़नीन गज़दर ने इसका तरीक़ा बताया. आपको चाहिए तो बस प्लास्टिक की बोतलें, पानी और क्लोरीन.
- चरण 1: हम अपने पास उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग करेंगे. 1.5 लीटर की प्लास्टिक की बोतल [लगभग 50 fl oz] लें, पानी की इस बोतल में पानी और एक या दो बड़े चम्मच ब्लीच डालें.
- चरण 2: बोतल को सील करें और इसे उस जगह डालें जहाँ आपका पारम्परिक बल्ब होता है.
- चरण 3: सुनिश्चित करें कि बोतल का ऊपरी आधा भाग इस जगह से बाहर निकला हो ताकि अपवर्तन के माध्यम से यह सूर्य की रौशनी ग्रहण कर सके. प्रत्येक बोतल आपको अपने चारों ओर, लगभग डेढ़ मीटर तक रौशनी देगी.