वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां
ल्युसेट वोगनेन्टसेवा अपने फ़ार्म के अंडों को चार गुना अधिक क़ीमत पर बेचती हैं.

आपबीती: ‘मेरी मुर्ग़ियों के अंडे खाने के लिए बहुत महंगे हैं’, (और यह अच्छी बात है)

UN News/Daniel Dickinson
ल्युसेट वोगनेन्टसेवा अपने फ़ार्म के अंडों को चार गुना अधिक क़ीमत पर बेचती हैं.

आपबीती: ‘मेरी मुर्ग़ियों के अंडे खाने के लिए बहुत महंगे हैं’, (और यह अच्छी बात है)

आर्थिक विकास

मेडागास्कर के दक्षिणी हिस्से में लघु किसान अपनी कमाई में बढ़ोत्तरी करने और मुर्ग़ी पालन के लिए बेहतर नस्ल तैयार करने की कोशिशों में जुटे हैं. इसके लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) से समर्थन मिल रहा है.

मेडागास्कर के एनोसी क्षेत्र में 80 से अधिक स्थानीय मुर्ग़ी पालकों को अब तक शायद जीवन बदल कर रख देने वाले पक्षी मिल चुके हैं. ये चिकन मूलत: भारत से हैं मगर अब तंज़ानिया में फल-फूल रहे हैं.

यूएन कृषि एजेंसी, मुर्ग़ियों के इन अंडों को, पूर्वी अफ़्रीकी देश से मेडागास्कर में लाई है. 

यहाँ के इफ़ोटाका शहर में ल्युसेट वोगनेंटसेवा ऐसे ही एक मुर्ग़ी पालन केन्द्र की नई मालिक हैं, जिन्होंने यूएन न्यूज़ के साथ एक बातचीत में अपना अनुभव साझा किया.

“मुझे पिछले नवम्बर 2023 में FAO से पाँच चिकन मिले थे, तीन नर व दो मादा. अब तक दो मुर्ग़ियों ने 46 अंडे दिए हैं, जबकि बाक़ी को अभी अंडे देने हैं.

ये कुरोइलेर चिकन हैं, जो अंडे देने और माँस के नज़रिये से अच्छे माने जाते हैं. 

ये स्थानीय तौर पर उपलब्ध चिकन से बेहतर हैं. ये जल्दी बढ़ते हैं, आकार में बड़े हैं, अंधिक संख्या में अंडे देते हैं और सख़्त परिस्थितियों का बेहतर ढंग से मुक़ाबला करते हैं.

मैं एक अंडे को दो हज़ार ऐरियरी ($0.45) में बेच सकती हूँ, जोकि स्थानीय चिकन के अंडे के मूल्य की तुलना में चार गुना अधिक है.

मेरी मुर्ग़ियों के अंडे बहुत महंगे हैं, इसलिए लोग मेरे पास इस उम्मीद के साथ ये अंडा ख़रीदने के लिए आते हैं कि इससे उन्हें मुर्ग़ा मिलेगा, और फिर देशी मुर्ग़ी के साथ मिलकर उसके ज़रिये एक नई नस्ल तैयार हो जाएगी. 

इससे उनके चिकन का भंडारण बेहतर होगा और उन्हें लाभ भी पहुँचेगा.

ल्युसेट वोगनेन्टसेवा तंज़ानियाई अंडे से हुए चिकन के साथ.
UN News/Daniel Dickinson

कुछ लोग अपनी मुर्ग़ियों को मेरे पास लाते हैं, ताकि मुर्ग़े से उन्हें गर्भ धारण कराया जा सके. लेकिन मैं इससे मना कर देती हूँ, चूँकि मुझे नहीं मालूम कि उनके चिकन में किसी तरह की कोई बीमारी है या नहीं. 

मेरे चिकन पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनका टीकाकरण भी हो चुका है.

वे एक दड़बे में रहते हैं, जिसे मैंने ही बनाया था. वे हमारे पड़ोसी के पक्षियों की तरह खुले स्थान में नहीं घूमते हैं.

इसलिए, मुझे उनके लिए बाज़ार से विशेष आहार ख़रीदना पड़ता है, चूँकि वे अपने-आप खाने का इन्तज़ाम नहीं कर सकते हैं.

ये अब पालतू पक्षी हैं, और मुझे पहचानते भी हैं. मैं बता सकती हूँ कि उन्हें कब भोजन या पानी की ज़रूरत है.

अन्य किसानों को मेरी सलाह है कि अगर वे ऐसे विदेशी पक्षियों को अपनाने की सोच रहे हैं, तो उन्हें साहसी होना पड़ेगा. 

तंज़ानिया की इस शुद्ध नस्ल से अधिक कमाई होती है. मेरी योजना उनकी संख्या को बढ़ाने की है.

गाँव में लोगों इसे नज़दीक से परखा है और अब वो मेरे पास सलाह लेने के लिए आते हैं कि इन पक्षियों को किस तरह से रखा जाए. मुझे यहाँ अब एक विदेशी चिकन महिला के रूप में देखा जाता है.”

यूएन कृषि संगठन (FAO) जल्द ही इफ़ोटाका में पोषण स्थिति को बेहतर बनाने के इरादे से विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के साथ मिलकर प्रयास करेगा, जिसके तहत, WFP द्वारा संचालित स्कूली आहार कार्यक्रमों में अंडे और माँस मुहैया कराएं जाएंगे.