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नेपाल: भूकम्प प्रभावित 68 हज़ार बच्चों को मानवीय सहायता की दरकार

नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से ध्वस्त हुई एक सरकारी इमारत.
Courtesy: PK Shahi, Legal Officer, Bheri Municipality, Jajarkot
नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से ध्वस्त हुई एक सरकारी इमारत.

नेपाल: भूकम्प प्रभावित 68 हज़ार बच्चों को मानवीय सहायता की दरकार

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने नवम्बर 2023 में, नेपाल के पश्चिमी हिस्से में आए भूकम्प से प्रभावित हुए इलाक़ों में, 68 हज़ार बच्चों और उनके परिवारजन तक मदद पहुँचाने के लिए, निरन्तर समर्थन की पुकार लगाई है और 1.47 करोड़ डॉलर की अपील जारी की है.

3 नवम्बर 2023 को नेपाल का पश्चिमी हिस्सा, रिक्टर पैमाने पर 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प के झटकों से दहल उठा, जिसका केन्द्र करनाली प्रान्त का जाजरकोट ज़िला था. 

इस आपदा में 154 लोगों की जान गई और 366 घायल हुए थे. मृतकों में आधी संख्या, 81, बच्चों की थी.

भूकम्प के कारण घरों, स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों और जल आपूर्ति तंत्र को भी नुक़सान पहुँचा, और बच्चों के लिए अनेक अहम सेवाओं पर भी असर पड़ा था.

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यूनीसेफ़ ने बताया है कि अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए 68 हज़ार बच्चों समेत, क़रीब दो लाख लोगों को अब भी मानवीय सहायता की दरकार है.

इनमें से बड़ी संख्या में लोग सर्दी के मौसम में अस्थाई आश्रय स्थल में अपना जीवन गुज़ार रहे हैं.

रोज़मर्रा की कठिनाई

नेपाल के लिए यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि ऐलिस अकूंगा ने बताया कि भूकम्प के तीन महीने बाद, हज़ारों प्रभावित बच्चों को कड़ी सर्दी में हर दिन कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है.

“उन्हें अपने प्रियजन को खो देने का सदमा अब भी है. अपना सामान, घर व स्कूल समेत अन्य चीज़ें खो देने के बाद उनके विकास पर जोखिम है.”

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने कहा कि बच्चों को अब भी पोषक आहार, स्वच्छ जल, शिक्षा व आश्रय समेत अन्य सामग्री व सेवाओं की ज़रूरत है. 

“बच्चों के जीवन को बचाने और उन्हें हालात सामान्य होने का ऐहसास दिलाने का एक उत्तम तरीक़ा, उन्हें फिर से पढ़ाई-लिखाई के लिए स्कूल भेजना है, ताकि वे अपने दोस्तों के साथ खेल, सीख और उबर सकें.”

साझेदारों के साथ प्रयास

यूनीसेफ़ ने भूकम्प के तुरन्त बाद, नेपाल सरकार और अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर बच्चों और उनके परिजन तक तिरपाल, कम्बल, मेडिकल टैंट, स्वच्छता सामान समेत अन्य आपूर्ति सुनिश्चित की थी.

भूकम्प के कारण पश्चिमी नेपाल में 898 स्कूली इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और एक लाख 34 हज़ारों बच्चों की स्कूली शिक्षा पर असर हुआ था.

इनमें से लगभग 17 हज़ार बच्चे अब स्कूल लौट गए हैं, जिसके लिए यूनीसेफ़ ने अपने साझीदार संगठनों के साथ मिलकर 223 अस्थाई पढ़ाई-लिखाई केन्द्र स्थापित किए थे.

इसके अलावा, क्षतिग्रस्त स्कूली इमारतों की मरम्मत होने तक संक्रमणकालीन केन्द्र भी स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि चरम मौसम के दौरान भी पढ़ाई-लिखाई को जारी रखा जा सके.

भूकम्प प्रभावित इलाक़े रुकुम में राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है. (फ़ाइल फ़ोटो)
© UNICEF/Prasad Ngakhusi
भूकम्प प्रभावित इलाक़े रुकुम में राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है. (फ़ाइल फ़ोटो)

यूनीसेफ़ ने बताया कि स्थानीय सरकार और साझेदारों के साथ मिलकर 565 क्षतिग्रस्त शौचालयों को ठीक किया जा रहा है और 251 नए, अस्थाई शौचालयों की व्यवस्था की गई है.

इसके समानान्तर, जानलेवा बीमारियों जैसेकि ख़सरा, रुबेला और टायफ़ॉयड से बचाव के लिए बच्चों का प्रतिरक्षण करने के इरादे से नेपाल सरकार की मुहिम को समर्थन प्रदान किया गया है. 

निरन्तर समर्थन पर बल

यूनीसेफ़ प्रतिनिधि ने ज़ोर देकर कहा कि अब भी बच्चों और उनके परिवारों तक समर्थन प्रदान करने के लिए और क़दम उठाए जाने होंगे.

इससे पूर्व, यूनीसेफ़ ने राहत कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए 1.57 करोड़ डॉलर की अपील जारी की थी, जिसमें से केवल 7 प्रतिशत धनराशि का ही प्रबन्ध हो पाया है.

इसके मद्देनज़र, यूनीसेफ़ ने 1.47 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त रक़म की अपील जारी की है, ताकि बच्चों तक जीवनरक्षक समर्थन पहुँचाया जा सके.