वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

सूडान युद्ध से, 7 लाख बच्चे, 'जीवन-जोखिम' कुपोषण की चपेट में

सूडान में देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए एक शिविर में, कुछ महिलाएँ.
© UNOCHA/Ala Kheir
सूडान में देश के भीतर ही विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए एक शिविर में, कुछ महिलाएँ.

सूडान युद्ध से, 7 लाख बच्चे, 'जीवन-जोखिम' कुपोषण की चपेट में

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसियों ने आगाह किया है कि सूडान में 300 दिनों से जारी युद्ध के कारण, लगभग सात लाख बच्चों को, खाद्य अभाव के सबसे ख़राब और सबसे ख़तरनाक रूप का सामना करना पड़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने शुक्रवार को कहा है, "दुनिया में बच्चों का सबसे बड़ा विस्थापन सूडान में देखा गया है."

उन्होंने कहा, “40 लाख बच्चे विस्थापित हो गए हैं. यानि 300 दिनों तक हर दिन 13 हज़ार बच्चों का विस्थापन. सुरक्षा ख़त्म हो गई. उनकी दैनिक काम आने वाली चीज़ें छिन गईं. दोस्त और परिवार के सदस्य अलग हो गए या खो गए. आशा लुप्त हो रही है.”

संयुक्त राष्ट्र सहायता समन्वय कार्यालय - UNOCHA ने इस सप्ताह के शुरू में, सूडान के अन्दर सबसे ज़रूरी चीज़ों की पूर्ति करने के लिए 2 अरब 70 करोड़ डॉलर की सहायता अपील जारी की थी, लेकिन अभी तक इस अपील के जवाब में केवल चार प्रतिशत धनराशि ही प्राप्त हुई है.

यह स्थिति अप्रैल 2023 में सूडान में प्रतिद्वंद्वी सेनाओं के बीच क्रूर युद्ध भड़कने के बाद, देश में खाद्य क़िल्लत और विस्थापन संकट के व्यापक पैमाने और गम्भीरता के बारे में बार-बार दी गई गम्भीर चेतावनियों के बावजूद है. 

तब से दोनों युद्धरत सेनाओं ने, शान्ति के लिए क्षेत्रीय और अन्तरराष्ट्रीय आहवानों पर ध्यान नहीं दिया है.

दारफ़ूर की स्थिति

यूनीसेफ़ के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों से बातचीत में, पिछले सप्ताह सूडान के दारफ़ूर इलाक़े की अपनी यात्रा का सन्दर्भ देते हुए, कहा कि 7 लाख से अधिक बच्चों के, गम्भीर तीव्र कुपोषण यानि, खाद्य अभाव के सबसे खतरनाक रूप, से पीड़ित होने की सम्भावना है. 

प्रवक्ता ने कहा कि यूनासेफ़. अधिक संसाधनों के अभाव में, इनमें से 3 लाख से अधिक बच्चों की मदद करने में समर्थन नहीं होगा. उस स्थिति में, हज़ारों बच्चों बच्चों के मौत के मुँह में चले जाने की सम्भावना होगी.

सूडान के लोगों और सूडानी शरणार्थियों की मदद के लिए अन्तरराष्ट्रीय प्रयासों में UNOCHA और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी - UNHCR, की बुधवार की संयुक्त अपील भी शामिल है. 

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी - WHO के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने चेतावनी दी कि पाँच वर्ष से कम उम्र के, ख़तरनाक रूप से कुपोषित बच्चों के लिए तत्काल सहायता की आवश्यकता है.

प्रवक्ता ने सभी सहायता बाधाओं को दूर करने के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया.

प्रवक्ता तारिक जसारेविक कहा, “ये बच्चे बहुत जल्दी ठीक हो सकते हैं. यदि उन्हें चिकित्सीय आहार उपलब्ध कराने की सम्भावना हो, तो ये बच्चे, कुछ ही दिनों में मौत के कगार से निकलकर, खेलकूद में व्यस्त हो सकते हैं”.

देश का भविष्य अधर में

सूडान में, युद्ध और जानलेवा खाद्य अभाव से विस्थापित हुए लाखों लोगों को, हत्याओं, यौन हिंसा और सशस्त्र समूहों में लड़ाई के लिए भर्ती के सत्यापित मामलों में, एक साल पहले की तुलना में, 500 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने कहा, “यह वृद्धि मारे गए, बलात्कार किए गए या भर्ती किए गए बच्चों की एक भयानक संख्या को दर्शाती है. और ये संख्याएँ, निश्चित रूप से, विशालकाय समस्या की एक झलक भर है.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "... वास्तव में यह एक ऐसा युद्ध है जो स्वास्थ्य और पोषण प्रणालियों को ध्वस्त कर रहा है, और यह लोगों को मार रहा है." 

“यह एक ऐसा युद्ध है जो युद्ध के क़ानूनों के प्रति सम्मान की अवधारणा को नष्ट कर रहा है, और यह लोगों को मार रहा है. यह एक ऐसा युद्ध है जो परिवारों की भरण-पोषण और ख़ुद की रक्षा करने की क्षमता को नष्ट कर रहा है... लेकिन यह एक ऐसा युदध भी है जो अवसरों को नष्ट कर रहा है, और ऐसी स्थिति, एक देश और एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को नष्ट कर देती है.''