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ग़ाज़ा: स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों व सेवाओं पर हमले जारी, WHO ने जताया क्षोभ

ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस के एक अस्पताल में एक घायल बच्चे की देखभाल की जा रही है.
© UNICEF/Abed Zaqout
ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस के एक अस्पताल में एक घायल बच्चे की देखभाल की जा रही है.

ग़ाज़ा: स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों व सेवाओं पर हमले जारी, WHO ने जताया क्षोभ

मानवीय सहायता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा पट्टी में जारी भीषण लड़ाई से अस्पतालों, स्वास्थ्यकर्मियों और वहाँ शरण लेने वाले लोगों पर गम्भीर असर हुआ है. यूएन एजेंसी द्वारा जारी किए गए आँकड़े दर्शाते हैं कि हिंसक टकराव की शुरुआत से अब तक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों व सेवाओं पर 350 से अधिक हमले हो चुके हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता तारिक यासरेविच ने शुक्रवार को जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि 7 अक्टूबर के बाद से स्वास्थ्य केन्द्रों के हिंसा की चपेट में आने से 645 लोग मारे गए हैं और 818 घायल हुए हैं. 

इस बीच, ख़ान यूनिस के एक अस्पताल में एक नर्स को ऑपरेशन कक्ष के भीतर गोली मारे जाने के आरोप लगे हैं, जिससे वो गम्भीर रूप से घायल हुई है.

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“इन हमलों में 98 स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र प्रभावित हुई हैं, 36 में से 27 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए हैं, 90 ऐम्बुलेंस चपेट में आई हैं, जिनमें से 50 को नुक़सान पहुँचा है.”

मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) ने अपने नवीनतम अपडेट में बताया कि दक्षिणी ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस में गुरूवार को भीषण लड़ाई हुई है. 

उन्होंने फ़लस्तीनी रैड क्रेसेन्ट सोसाइटी के हवाले से बताया कि नासेर अस्पताल और अल अमल अस्पताल की, कथित रूप से 17 दिनों से घेराबन्दी की गई है. 

ये दोनों अस्पताल गोलाबारी में बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसकी वजह से हज़ारों लोगों को दक्षिणी छोर पर स्थित रफ़ाह की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

यूएन एजेंसी के अपडेट मे कहा गया है कि नासेर अस्पताल के इर्दगिर्द, निशानेबाज़ द्वारा लोगों पर गोली चलाए जाने और ऐम्बुलेंस को अस्पताल में आने से रोके जाने के आरोप लगे हैं.

पश्चिमी तट में तनाव

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, ग़ाज़ा-इसराइल में लड़ाई भड़कने के बाद से अब तक क़ाबिज़ पश्चिमी तट में भी स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों पर हमले बढ़े हैं.

7 अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल पर हमास व अन्य गुटों ने आतंकी हमले किए थे, जिसमें 1,200 इसराइली व विदेशी नागरिक मारे गए और 250 से अधिक को बंधक बना लिया गया था.

इसके बाद, इसराइली कार्रवाई में अब तक 27 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है और 67 हज़ार से अधिक घायल हुए है. ग़ाज़ा युद्ध में अब तक 225 इसराइली सैनिक मारे गए हैं और 1,314 घायल हुए हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट स्वास्थ्य केन्द्रों व सेवाओं पर 364 हमले हुए हैं, जिनमें कम से कम 10 लोग मारे गए हैं और 62 घायल हुए हैं.

इन हमलों में 44 स्वास्थ्य केन्द्र प्रभावित हुए हैं, जिनमें 15 सचल क्लीनिक और 24 ऐम्बुलेंस हैं. 

अकाल का जोखिम

इस बीच, यूएन मानवतावादियों ने सचेत किया है कि ग़ाज़ा में अकाल का जोखिम हर दिन बीतने के साथ गहरा रहा है, विशेष रूप से उत्तरी ग़ाज़ा में.

यूएन मानवतावादी कार्यालय के अनुसार, उत्तरी इलाक़ों में हज़ारों लोग मानवीय सहायता से कटे हुए हैं, जबकि वहाँ पर मानवीय आवश्यकताओं सबसे ऊँचे स्तर पर हैं. 

ऐसी भी जानकारी मिली है कि लोग अपना पेट भरने के लिए पशुओं का चारा पीस कर खाने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

मौजूदा संकट के शुरू होने के बाद से अब तक, यूएन विश्व खाद्य कार्यक्रम ने 1,940 ट्रकों को रवाना किया है, जोकि कुल राहत ट्रकों का 19 प्रतिशत है. इनके ज़रिये 32 हज़ार टन से अधिक जीवनरक्षक खाद्य सामग्री की आपूर्ति की गई है. 

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) ने, उत्तरी ग़ाज़ा में अन्तिम बार 23 जनवरी को खाद्य वितरण किया था.