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भारत: उत्थान की बदौलत, अग्निपरीक्षा जैसे हालात से उबरने की आपबीती

सलमा बेगम अब अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशान्वित हैं.
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सलमा बेगम अब अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशान्वित हैं.

भारत: उत्थान की बदौलत, अग्निपरीक्षा जैसे हालात से उबरने की आपबीती

महिलाएँ

दिल्ली में रहने वाली एक सफ़ाई साथी सलमा बेगम की ज़िन्दगी में किसी अग्निपरीक्षा जैसे हालात रहे. मगर यूएनडीपी की उत्थान सहनसक्षमता से लाभान्वित होकर, वो पहचान पत्रों व सामाजिक प्रमाण पत्रों के कारण आर्थिक सशक्तिकरण की राह पर अग्रसर हुईं.

सलमा बेगम और उनके परिवार को, एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने, दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाक़े का उनका पिछला घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था. 

“हम एक अलग इलाक़े में रहते थे और एकत्रित कचरे को अपने आंगन में इकट्ठा कर लेते थे. एक दुर्घटना के कारण, वहाँ भीषण आग लगी, जिसमें 50 से अधिक घर जलकर ख़ाक हो गए. हमने भी अपना घर खो दिया, और कई अहम दस्तावेज़ भी आग की भेंट चढ़ गए. जीवन बहुत कठिन हो गया था - सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और हमारा राशन कार्ड भी आग में नष्ट हो गया था.”

इसके बाद 30 वर्षीय सलमा बेगम और उनके पति सलमान, नई दिल्ली में ही पड़ोस के रंगपुरी इलाक़े चले गए. वो दोनों ही सफ़ाई साथी हैं. सलमा री-सायकिल योग्य वस्तुएँ एकत्र करती है और उन्हें उपयुक्त श्रेणियों में क्रमबद्ध करती हैं. फिर इन्हें बाज़ार में निजी पुनर्चक्रणकर्ताओं को बेच देते हैं.

सलमा कहती है, “चूँकि हम पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए हम यही कामकाज करके जीविकोपार्जन कर सकते हैं. वित्तीय बाधाओं के कारण मुझे स्कूल छोड़ना पड़ा. यही कारण है कि मैं अपने बच्चों के लिए, शिक्षित होकर, उनके सफल जीवन जीने की उम्मीद करती हूँ."

अपने नए पड़ोस में वो बाल विकास धारा संस्था से जुड़े, जोकि उत्थान परियोजना के लिए दिल्ली में यूएनडीपी के भागीदार है.

उत्थान टीम ने उन्हें आवासीय प्रमाण पत्र पाने में मदद की.

इससे उन्हें पूरे परिवार के लिए पहचान पत्र के लिए आवेदन करने में मदद मिली. “जब हमारे सभी आधिकारिक दस्तावेज़ आग में नष्ट हो गए थे, तो मुझे लगा था कि बस अब हम कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि हमारे पास उनका कोई सबूत या प्रतियाँ नहीं बचीं थीं. लेकिन उत्थान कार्यकर्ता ने हमारी पूरी मदद की और हमारा सही मार्गदर्शन किया."

सलमा ने बताया कि उत्थान टीम के कार्यकर्ताओं ने उनका पहचान पत्र, उनके मोबाईल फोन से जोड़ दिया, जिससे उन्हें अपने बैंक खाते के अपडेट और कोविड-19 टीकों की जानकारी मिलने में सहूलियत हुई.
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सलमा बताती हैं कि किस तरह नए पहचान पत्रों से उन्हें एक नया जीवन मिला. “पहचान पत्र से मेरे बच्चों को टीकाकरण और बीमारी में दवाएँ प्राप्त करने में मदद मिली. साथ ही उसे मोबाइल फोन से जोड़कर बैंक खाते की ताज़ा जानकारी और कोविड -19 टीकाकरण की जानकारी मिली."

सलमा ने बताया कि उत्थान टीम ने किस तरह उनके बच्चों का स्थानीय नगरपालिका स्कूल में दाख़िला करवाने में मदद की. “यह केवल इसीलिए सम्भव हो सका क्योंकि उत्थान पहल के तहत हमारे व बच्चों के पहचान पत्र बन गए थे.”

आग लगने के बाद से वो बहुत सावधान रहते हैं और उन्होंने बेहतर भंडारण प्रथाएँ अपनाई हैं. इसके लिए उन्हें उत्थान कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण प्रदान किया. उन्होंने बताया कि प्राप्त वित्तीय प्रशिक्षण ने उन्हें अपनी कमाई का प्रबन्धन करने की क्षमता दी, जिससे अब वो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिन्त हैं.”

उत्थान परियोजना के अन्तर्गत सलमा एवं सलमान को आधार कार्ड, ई-श्रम एवं स्वास्थ्य कार्ड मिल चुका है, और उन्होंने एक नया बैंक खाता भी खोला है. साथ ही उन्होंने मतदान के लिए पहचान पत्र के लिए भी आवेदन किया है.

अब हम अपने आप को समुदाय का हिस्सा महसूस करते हैं, और अगले चुनाव में अपना वोट डालने के लिए उत्सुक हैं. यह एक ख़ास अहसास होगा क्योंकि हमने कई वर्षों में मतदान नहीं किया है.