अफ़ग़ानिस्तान: भूकम्प के विनाश के बाद, उम्मीदों के आशियाने
अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रान्त में कुछ महीने पहले आए भूकम्प के सिलसिलेवार झटकों ने, अनगिनत लोगों की ज़िन्दगियाँ तबाह कर दीं. भूकम्प से प्रभावित परिवारों को, अफ़ग़निस्तान स्थित संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक पहल से, अपने नवनिर्मित संक्रमणकालीन आश्रय में शरण मिली है. चाहक गाँव के उन्नीस वर्षीय निवासी रहमत और उनके 12 लोगों का परिवार भी, ऐसे लाभान्वितों में शामिल है, जिसे अब अफ़ग़ानिस्तान की कड़ाके की सर्दियों में सुरक्षित लग रहा है और वो अपने भविष्य के प्रति आशान्वित हैं.
खिड़की से छनकर आने वाली रौशनी, सीधे रहमत पर पड़ रही है, जिससे धूप से झुलसे उनके चेहरे की ज़िद्दी रेखाएँ और भी साफ़ नज़र आने लगी हैं. अपनी उम्र से कहीं अधिक थका हुआ उनका चेहरा, कठिन परिस्थितियों के बीच सहनसक्षमता व उम्मीद की कहानी कहता प्रतीत होता है. रहमत ख़ुद एक किशोर हैं, लेकिन 12 लोगों के अपने परिवार की ज़िम्मेदारी सम्भाल रहे हैं. हेरात भूकम्प से बचे 19 वर्षीय रहमत कहते हैं, “अब, हम ख़ुश हैं. भूकम्प में हमने जो खोया है, यह आश्रय उससे छोटा भले ही हो, लेकिन सुरक्षित और गर्म है."
कड़ाके की ठंड
रहमत और उनके परिवार ने अक्टूबर 2023 में पश्चिमी प्रान्त हेरात में आए घातक भूकम्प में अपना घर खो दिया, जिसमें 2,400 से अधिक लोग मारे गए और 10 हज़ार से अधिक घर नष्ट हो गए. इसके तुरन्त बाद हज़ारों परिवारों ने, अफ़ग़ानिस्तान की तेज़ हवाओं व कड़ाके की ठंड से बचने के लिए, अस्थाई तम्बुओं में शरण ली. इनमें रहमत और उसका परिवार भी शामिल था.
जैसे-जैसे सप्ताह बीतते गए, उनके परिवार पर उसका असर स्पष्ट होता गया. गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे उनके बुज़ुर्ग पिता की हालत काफ़ी गम्भीर हो गई, और उनके छोटे भाई-बहनों भी सुन्न करने वाली ठंड में गर्माहट पाने के लिए परेशान हो गए. "अगर हम अब उन तम्बुओं में रहते, तो मेरे परिवार की हाल बहुत ख़राब हो जाती."
इस आपदा के बीच, यूएनडीपी ने नुक़सान का आकलन करने और जीवित बचे लोगों की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तेज़ी से टीमें जुटाईं – और समुदायों को भीषण सर्दी से बचाने के लिए सुरक्षित एवं गर्म आश्रय तथा जीने के लिए पौष्टिक भोजन प्रदान किया.
यूएनडीपी ने, आश्रय की तत्काल आवश्यकता समझते हुए, चाहक गाँव में 235 संक्रमणकालीन आश्रयों के निर्माण के लिए Norwegian Church Aid संस्था के साथ साझेदारी की, और तीन महीने के अन्दर, 200 परिवारों के लिए ये आश्रयस्थल बनाए गए, जो रहमत सहित अनेक परिवारों को सुरक्षा एवं गर्माहट प्रदान कर रहे हैं.
अपने नए घर में बैठे रहमत, अपने पुराने घर को याद करते हैं, “हमारा पुराना घर मिट्टी से बना था, इसलिए उसके भूकम्प के झटकों से बचने की कोई सम्भावना नहीं थी. लेकिन यह घर मज़बूत व सुदृढ़ है.”
वह गर्व से अपने घर की छत की ओर इशारा करते हुए बताते हैं, “हमने पिछले दिन हल्के झटके महसूस किए, लेकिन यह आश्रय मज़बूती से खड़ा रहा. इससे हमें राहत एवं सुरक्षा महसूस हुई!”
बात करते-करते रहमत का ध्यान अपने भाई-बहनों की नटखट गतिविधियों पर चला जाता है. बच्चे कभी घर के अन्दर-बाहर भागते खेलते हैं, तो कभी मवेशियों को सहलाते हैं, एक-दूसरे को प्यार से धक्का देते हैं, और फिर चूल्हे के सामने इकट्ठे होकर उसकी गर्मी में आराम पाते हैं. रहमत मुस्कुराते हुए बताते हैं, “हम अच्छी नींद ले पा रहे हैं क्योंकि अन्दर गर्मी है और दरवाज़े व खिड़कियाँ अच्छी तरह से गर्मी को भीतर ही रोकने में सक्षम हैं.”
मुट्ठी भर और मदद
यूएनडीपी ने, इन आश्रयों के अलावा ‘आश्रय के लिए नक़दी’ नामक पहल के तहत, प्रभावित समुदाय को आजीविका देने के सक्रिय प्रयास किए हैं. समुदाय के सदस्य, मालिकाना हक़ पाने व आय अर्जित करने के लाभ को देखते हुए, इन संक्रमणकालीन आश्रय के निर्माण में योगदान देते हैं.
साथ ही, भूकम्प के बाद से, हेरात शहर में 15 सामुदायिक रसोई और चाहक गाँव में छह नव स्थापित सामुदायिक रसोई में, 36 हज़ार से अधिक लोगों को मुफ़्त गर्म भोजन परोसा जा रहा है, जिससे समुदाय के भीतर सहनसक्षमता की भावना उत्पन्न हुई है.
यूएनडीपी ने अफ़ग़ानिस्तान में जलवायु संवेदनशीलता, भूख, आर्थिक अस्थिरता और प्रवासन जैसे दीर्घकालिक संकटों से निपटने के लिए, वैश्विक सहायता की अपील की है.
रहमत, मुस्कान के साथ, भविष्य के लिए अपनी उम्मीद साझा करते हैं, "भूकम्प से पहले मेरी सगाई हो गई थी. भूकम्प के झटकों ने सारी योजनाएँ ढेर कर दी थीं, लेकिन अब लग रहा है कि जब हालात बेहतर होंगे, तो हम शादी कर लेंगे."