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अंतरिक्ष यात्री, नील आर्मस्ट्रांग द्वारा ली गई इस तस्वीर में, कर्नल एडविन एल्ड्रिन जूनियर, 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा की सतह पर चलते हुए. (फ़ाइल)

यूएन मुख्यालय में, चन्द्रमा का एक टुकड़ा कैसे आ पहुँचा?

UN Photo/NASA
अंतरिक्ष यात्री, नील आर्मस्ट्रांग द्वारा ली गई इस तस्वीर में, कर्नल एडविन एल्ड्रिन जूनियर, 20 जुलाई 1969 को चंद्रमा की सतह पर चलते हुए. (फ़ाइल)

यूएन मुख्यालय में, चन्द्रमा का एक टुकड़ा कैसे आ पहुँचा?

यूएन मामले

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, आजकल अन्तरिक्ष के एक अलौकिक वासी का घर है: चन्द्रमा के एक अनमोल टुकड़े का. चन्द्रमा से लाया गया चट्टान का यह टुकड़ा, मुख्यालय में प्रदर्शित अनेक आकर्षक वस्तुओं में से एक हैजिनमें गिटार के आकार में बनी मशीन गन, या फिर जापान में परमाणु बम से बची, मरोड़ी हुई कांस्य प्रतिमा जैसी वस्तुएँ शामिल हैं.

प्रदर्शनी के लिए रखा गया, कोयले के रंग का यह ‘मून रॉक’, इससे पहले तीन दशक तक भंडारग्रह में बन्द था. बाद में, कठोर सुरक्षा प्रक्रिया के बाद इसे यहाँ प्रदर्शन के लिए रखने की अनुमति मिली.

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सुविधा प्रबन्धन में काम करने वाली ऐनी सोइबर्ग-फ़्रीडकिन का मानना है कि चन्द्रमा का यह टुकड़ा, मानवता के विशाल पराक्रम का प्रतीक है.

उन्होंने यूएन न्यूज़ को बताया, "यह बहुत महत्वपूर्ण है, और इसे प्रदर्शित किया जाना ज़रूरी है. प्रदर्शित वस्तुओं में यह फ़िलहाल सबसे नया है, हालाँकि यह हमें कई वर्षों पहले उपहार में दिया गया था."

अपोलो 11 अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा चंद्रमा से वापस लाया गया चार औंस का पत्थर, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रदर्शन के लिए रखी गई है.
UN DOS/Anne Soiberg-Friedkin

मानव जाति की क्षमता का प्रतीक

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा के नेतृत्व में पहला सफल चन्द्रमा मिशन, लगभग एक टन चन्द्र चट्टानों के साथ लौटा था, जिन्हें दुनिया भर के देशों और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ साझा किया गया था. विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रह विज्ञान के लिए एक अमूल्य अन्तर्दृष्टि ये टुकड़े, लगभग चार अरब वर्ष पुराने हैं.

बाह्य अन्तरिक्ष मामलों में संयुक्त राष्ट्र का प्रवेश 1950 के दशक में हुआ. 1992 तक, संयुक्त राष्ट्र में बाह्य अन्तरिक्ष मामलों के कार्यालय (UNOOSA) की स्थापना की गई, जिसका उपयोग शान्तिपूर्ण तरीक़े से सर्वजन के लाभ के लिए सुनिश्चित करना अनिवार्य था.

उस समय जारी शीत युद्ध के बीच, संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 1969 में एक समारोह में, चन्द्रमा से लौटे, संयुक्त राज्य अमेरिका के अन्तरिक्ष यात्रियों का स्वागत किया.

इस अवसर पर तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव, यू थांट ने कहा था, "मुझे यक़ीन है कि अपोलो 11 की उड़ान ने हमें इस बात का नए सिरे से अहसास कराया कि अगर हम मानव जाति के लाभ के लिए, अपने प्रयासों को संयोजित करने व मिलकर काम करने के लिए तैयार हों, तो मानव जाति के सदस्य के रूप में, अपने संसाधनों और प्रौद्योगिकी के साथ इस ग्रह पर क्या-कुछ हासिल कर सकते हैं.”

अन्तरिक्ष यात्री, नील आर्मस्ट्रांग द्वारा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सम्बोधन में भी इसी सन्देश की प्रतिध्वनि झलकती थी.

नील आर्मस्ट्रांग ने कहा था, "मुझे विश्वास है कि हमारी तरह, आप को भी यही उम्मीद है कि हम पृथ्वी के नागरिक, जो पृथ्वी छोड़ने सम्बन्धी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, वो इस पर रहने की समस्याओं को भी हल कर सकते हैं."

बिक्री पर प्रतिबन्ध

ऐनी सोइबर्ग-फ़्रीडकिन ने समझाया कि ‘मून रॉक’ का यह "उपहार" केवल कुछ समय के लिए दिया गया है, क्योंकि खगोलीय पिंड का टुकड़ा रखना गैरक़ानूनी होता है. 

ये नियम, महासभा द्वारा अपनाई गई बाह्य अन्तरिक्ष सन्धि में निर्धारित किए गए थे, जो 1967 में लागू हुई थी. इसमें घोषणा की कि कोई भी व्यक्ति, चन्द्रमा या अन्य खगोलीय पिंडों समेत, बाहरी अन्तरिक्ष की किसी वस्तु पर मालिकाना हक़ हासिल नहीं कर सकता. इसीलिए इसके हिस्से की सुरक्षा करना बेहद महत्वपूर्ण है.

ऐनी सोइबर्ग-फ़्रीडकिन ने बताया कि जब चन्द्रमा से लाए गए चट्टान के इस टुकड़े को वापस प्रदर्शन के लिए रखने की बात उठी, तो नासा के दिशानिर्देशों का पूरा पालन किया गया. उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर 2023 को संयुक्त राष्ट्र दिवस पर इसके पुन: प्रदर्शन से पहले, इसकी योजना के कार्यान्वयन में पूरे चार साल लग गए.

अमूल्य चट्टानों की चोरी या क्षति को रोकने के लिए, कड़े नियमों के अनुसार तीन विकल्प पेश किए गए: 24 घंटे सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दौरे करना; एक तालाबन्द व सुरक्षित ‘प्रदर्शन इकाई’ के साथ एक सुरक्षा अधिकारी का रहना; या कैमरे स्थापित करना, जोकि चयनित विकल्प था.

PVBLIC संस्थान ने चौबीसों घंटे निगरानी के लिए एक कैमरा प्रायोजित किया. वहीं, संयुक्त राष्ट्र की Carpentry Shop ने ऐनी सोइबर्ग-फ़्रीडकिन द्वारा डिज़ाइन किए गया बक्सा तैयार किया, और फिर उसके लिए आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र दौरों के शुरुआती बिन्दु पर स्थित एक उपयुक्त स्थान निर्धारित किया गया.

चंद्रमा से लाए गए चट्टान के टुकड़े को पहली बार, 1970 में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में प्रदर्शित किया गया था.
UN Photo/Yutaka Nagata

शाश्वत उपहार

‘मून रॉक’ के अलावा, 193 सदस्य देशों, व्यक्तियों और संस्थानों ने 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से आधिकारिक एवं अनौपचारिक उपहार देने की परम्परा को बरक़रार रखा है. यूएन संग्रह में, 1957 में पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाने वाले पहले रूसी स्पुतनिक विमान की प्रतिकृतियाँ जैसे कई वैज्ञानिक स्थलीय नवाचार शामिल हैं. या फिर एक प्राचीन एयर कंडीशनर, बर्जिल है,  जिसका उपयोग 3,000 वर्षों से मध्य पूर्व और एशिया में अन्दर के तापमान को ठंडा रखने के लिए किया जाता था.

कई अन्य उपहार भी परिसर में मौजूद हैं, जिनमें आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के लिए स्वीडन द्वारा दी गईं आधुनिक कुर्सियाँ शामिल हैं. नॉर्थ डेलीगेट्स लाउंज में, चीन की विशाल ग्रेट वॉल टेपेस्ट्री प्रदर्शित की गई है, जिसे बनाने में 26 तकनीशियनों को पूरा एक साल लगा. 

स्विट्ज़रलैंड ने विश्व निकाय को सम्बोधित करने वाले राष्ट्राध्यक्षों की मेज़बानी के लिए महासभा के हॉल पोडियम के पीछे प्रतिष्ठित GA-0200 ड्योढ़ी बनवाई, और क़तर ने ईस्ट लाउंज को शानदार ढंग से सुसज्जित किया.

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 240 से अधिक आधिकारिक उपहारों के अलावा, संगठन को दान की गई कई अन्य वस्तुएँ भी प्रदर्शित हैं. अधिक जानकारी के लिए संयुक्त राष्ट्र टूर गाइड से पूछें या यहाँ संयुक्त राष्ट्र की उपहार रजिस्ट्री में देखें.

अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों और प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, यू थांट को चंद्रमा की चट्टान का एक टुकड़ा और संयुक्त राष्ट्र का वो ध्वज भेंट करते हुए, जिसे अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, एडविन एल्ड्रिन जूनियर और माइकल कोलिन्स, 1969 में चंद्रमा …
UN Photo/Yutaka Nagata