अफ़ग़ानिस्तान: मलबे से उठकर, सहनसक्षमता व पुनर्बहाली का अभूतपूर्व सफ़र
अफ़ग़ानिस्तान के हेरात प्रान्त में वर्ष 2023 में आए भूकम्प में जीवित बची 61 वर्षीय फ़ातिमा, छह लोगों के अपने परिवार की मुखिया हैं. भूकम्प के घातक झटकों में उन्होंने अपना घर खो दिया और कड़कड़ाती ठंड में अस्थाई आश्रयों में रहने के लिए मजबूर हो गईं. यूएनडीपी की मदद से, अब फ़ातिमा के परिवार को कुछ समय के लिए सुरक्षित एवं मज़बूत आश्रय मिल गया है और वो अपने भविष्य को लेकर आशान्वित हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी प्रान्त हेरात में आए सिलसिलेवार भूकम्पों को तीन महीने बीत चुके हैं. लेकिन आज भी उन क्षणों को याद करते हुए फ़ातिमा की आवाज काँप उठती है, “जब पृथ्वी हिली तो हमें जो डर महसूस हुआ, उसे व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. बच्चों की चीख़ें और रोने की आवाज़ें बहरा कर देने वाली थीं. जिस जगह को हम घर कहते थे वह हमारी आँखों के सामने ढह रहा था.”
चहक गाँव की यह 61 वर्षीय निवासी उन पलों के को याद करते हुए, चौकसी से अपने पोते-पोतियों की चंचल हरक़तों पर भी नज़र रख रही थीं, जो अपनी दादी की परेशानियों से अनजान वहीं खेल रहे थे.
भूकम्प से बिखरी जिन्दगियाँ
फ़ातिमा को, अपने पति को खोने के तीन साल बाद परिवार के मुखिया की भूमिका अपनानी पड़ी. यह एक ऐसी वास्तविकता है, जो हाल ही में सत्तारूढ़ तालेबान प्रशासन द्वारा रोज़गार एवं शिक्षा पर लगे प्रतिबन्धों के मद्देनज़र, अफ़ग़ान महिलाओं के लिए आसान नहीं है.
ऐसे में, भूकम्प आने पर फ़ातिमा, उनकी विधवा बेटी और पोते-पोतियों को बाहर लकड़ियों और चादरों से बने अस्थाई तम्बू में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. “पुरुष और लड़के कहीं भी सो सकते हैं लेकिन महिलाओं और लड़कियों की दुर्दशा की कल्पना करें. खुले में रहने से हमें बहुत असुरक्षित महसूस हुआ. हमारे पास शौचालय तक नहीं था.”
फ़ातिमा की ही तरह, महिला मुखिया वाले 68 हज़ार घर भूकम्प से प्रभावित हुए, जिससे वो अत्यधिक सम्वेदनशील स्थिति में आ गए.
अक्टूबर की शुरुआत में केवल पाँच दिनों के अन्दर, ईरान के क़रीब स्थित अफ़ग़ानिस्तान के इस हिस्से में तीन बड़े भूकम्प आए, जिसमें 2,400 लोग मारे गए और 1 लाख 42 हज़ार महिलाएँ प्रभावित हुईं.
दशकों की इस सबसे भयावह आपदा में, हेरात शहर के बाहर रेगिस्तानी गाँवों के अधिकाँश मिट्टी के घर ज़मींदोज़ हो गए. 10 हज़ार से अधिक घर मलबे का ढेर बन गए और 48 हज़ार से अधिक को गम्भीर या मध्यम नुक़सान पहुँचा.
जवाबी कार्रवाई
ऐसे में, यूएनडीपी ने, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, विकास साझीदारों और दानदाताओं के साथ मिलकर तेज़ी से जवाबी कार्रवाई आरम्भ की - और बुनियादी मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने, बिखरे जीवन की पुनर्बहाली और ख़तरों व झटकों के प्रति सामुदायिक सहनसक्षमता में सुधार करने हेतु समुदायों के साथ मिलकर मुस्तैदी से काम किया.
अफ़ग़निस्तान में यूएनडीपी ने अस्थाई आश्रयों का निर्माण करने, सामुदायिक रसोई के ज़रिए मुफ़्त गर्म भोजन प्रदान करने और खाना पकाने के लिए सौर कुकर वितरित करने के लिए अपनी टीमें एवं संसाधन जुटाए.
भूकम्प के तीन महीने बाद, आज भी 31 हज़ार से अधिक परिवार कड़ाके की ठंड का सामना करते हुए शिविरों में रह रहे हैं. तापमान के शून्य से नीचे चले जाने और तम्बुओं को चीरती तीखी, ठंडी हवाओं से, परिवारों को गम्भीर स्वास्थ्य समस्याओं को जोखिम बढ़ गया है.
यूएनडीपी ने, Norwegian Church Aid के साथ साझेदारी में, कुछ भूकम्प प्रभावित परिवारों को, थोड़े समय के लिए कठोर सर्दियों से बचाने के लिए, पूरी मेहनत से संक्रमणकालीन आश्रयों का निर्माण किया है.
चहक गाँव के सभी 235 संक्रमणकालीन आश्रय तैयार हैं और कमज़ोर तबक़े के 200 से अधिक परिवार वहाँ रहने जा चुके हैं. फ़ातिमा का परिवार इन्हीं में से एक है.
फ़ातिमा कहती हैं, “मैं बहुत राहत महसूस कर रही हूँ. अपने परिवार के लिए यह घर उपलब्ध करवाने के लिए यूएनडीपी की बेहद आभारी हूँ. ये आश्रय गर्म और मज़बूत हैं. मेरे पोते-पोतियाँ ख़ुश एवं स्वस्थ हैं, तथा कड़ाके की सर्दी में सुरक्षित हैं.”
एक महिला होने के नाते वह अपने नए घर में सुरक्षित महसूस कर रही हैं. "मैं अब सुरक्षित महसूस करती हूँ और इस घर में आराम से सो सकती हूँ."
अनूठी तकनीक से बने मज़बूत आश्रय
यह संक्रमणकालीन आश्रय अपने-आप में अनुपम हैं. इनका निर्माण, स्थानीय वास्तुकला तरीक़ों के अनुसार किया गया है - यानि पाखसा (मिट्टी और पुआल का मिश्रण), मिट्टी की ईंट और पत्थर की चिनाई जैसी स्थानीय सामग्रियों से पारम्परिक तरीक़ों से किया गया है. ये घर भूकम्प-रोधी हैं - मतलब ये कि फ़ातिमा और उनका परिवार, इस क्षेत्र में आने वाले भूकम्प के झटकों से भविष्य में सुरक्षित रहेगा.
फ़ातिमा, अपने नए घर में सुरक्षित होने के बावजूद वो सब याद करती हैं, जो उन्होंने इस त्रासदी में खोया है. वो कहती हैं, “सब कुछ ज़मीन के अन्दर धँस गया - कालीन, गद्दे, कम्बल और बर्तन. मैं मलबे से रोटी का एक टुकड़ा और पानी भी नहीं बचा सकी. मुझे बस अपने पुराने घर की बहुत याद आती है.''
चुनौतियों के बावजूद फ़ातिमा की उम्मीदें बरक़रार हैं. “हमारे पास अभी भी गर्म कपड़ों, गद्दे और तापन उपकरणों की कमी है, लेकिन हम स्वस्थ हैं और ठंड से बचे हुए हैं. मुझे बहुत ख़ुशी है कि यहाँ शौचालयों का निर्माण भी किया गया है, जो महिलाओं के लिए बेहद आवश्यक है.”
चहक गाँव में सभी संक्रमणकालीन आश्रयों के पूरा होने के साथ, आने वाले समय में यूएनडीपी इन परिवारों के लिए स्थाई आश्रयों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगा. यूएनडीपी अपनी दीर्घकालिक पुनर्बहाली योजना के हिस्से के रूप में, भागीदारों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के सहयोग से, सिंचाई नहरों और बाज़ारों जैसे समुदाय-आधारित बुनियादी ढाँचे बनाने, स्कूलों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों को सौर ऊर्जा समाधानों से सुसज्जित करने, तथा रोज़गार व आजीविका को समर्थन देते हुए, सहनसक्षम पुनर्बहाली के प्रयास करेगा.