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‘प्रवासन जीवन की एक सच्चाई’ और ‘अच्छाई की एक ताक़त’

नए देश में जीवन शुरू करने से पहले एक प्रवासी परिवार की यात्रा.
IOM/Muse Mohammed
नए देश में जीवन शुरू करने से पहले एक प्रवासी परिवार की यात्रा.

‘प्रवासन जीवन की एक सच्चाई’ और ‘अच्छाई की एक ताक़त’

प्रवासी और शरणार्थी

प्रवासन "जीवन की एक सच्चाई है" और ये "एकग अच्छी ताक़त" है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को यह सन्देश देते हुए, ख़तरे और निराशा की स्थिति में, अपने जीवन को बेहतर बनाने के अवसरों की तलाश करने वाले लाखों लोगों के लिए, सुरक्षित विकल्प का आहवान किया.

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संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस के अवसर पर एक सन्देश में, इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रवासन, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है और आर्थिक विकास में योगदान देता है, लेकिन साथ ही, "अगर प्रवासन का प्रशासन ख़राब हो तो वो बड़ी पीड़ा का कारण है."

उन्होंने प्रवासन के ख़राब प्रवासन के प्रभावों का ज़िक्र करते हुए कहा, “यह लोगों को, तस्करों के क्रूर दायरे में धकेलता है, जहाँ उन्हें शोषण, दुर्व्यवहार और यहाँ तक कि मौत का सामना करना पड़ता है. यह, सरकारों और संस्थानों में विश्वास को कमज़ोर करता है, सामाजिक तनाव को बढ़ाता है और हमारी साझा इनसानियत को नष्ट करता है.”

‘ग्लोबल कॉम्पैक्ट’ का सन्दर्भ

एंतोनियो गुटेरेश ने पाँच साल पहले अनेक देशों द्वारा अपनाए गए सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन के लिए, ग्लोबल कॉम्पैक्ट को, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और प्रवासन के लिए अधिकार-आधारित मार्गों का विस्तार करने के लिए एक "महत्वपूर्ण सन्दर्भ बिन्दु और संसाधन" के रूप में याद किया.

“फिर भी ऐसे उपाय अपवादही बने हुए हैं, सामान्य चलन नहीं.” 

उन्होंने सभी से मूल, पारगमन के दौरान और गन्तव्य के समुदायों सहित सभी के लाभ के लिए, प्रवास के अधिक मानवीय और व्यवस्थित प्रबन्धन की दिशा में काम करने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, "आइए हम सब मिलकर, सभी के लिए एक सुरक्षित और अधिक समृद्ध भविष्य सुरक्षित करें."

लगभग $650 अरब का योगदान

संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दुनिया की लगभग 3.6 प्रतिशत आबादी प्रवासी जन हैं – जिन्हें ऐसे के रूप में परिभाषित किया जाता है जो देश के भीतर या अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर, अस्थाई या स्थाई रूप से अपने सामान्य निवास स्थान से दूर चले जाते हैं.

उनमें से बहुत से लोग बेहतर अवसरों की तलाश में आगे बढ़ते हैं और वे ऐसा करते हुए, अपने परिवार व समुदायों को अपने मूल स्थानों पर छोड़ते हैं और वहीं उनका भरण-पोषण करते हैं.

उदाहरण के लिए, 2022 के आँकड़ों के अनुसार, प्रवासियों ने लगभग 647 बिलियन डॉलर की रक़म, अपने मूल स्थानों को भेजी.

'मानवता जितना ही पुराना चलन'

आईओएम की महानिदेशक ऐमी पोप ने कहा कि प्रवासन "मानवता जितना ही पुराना चलन है", जिसमें लोग अक्सर टकराव की स्थतियों से बचकर भागने और उत्पीड़न से बचने की कोशिश में अन्यत्र स्थानों के लिए पलायन करते हैं.

उन्होंने वर्ष 2023 में प्रवास करने वाले लोगों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि का ज़िक्र करते हुए कहा, “फिर भी, आज, प्रवासन अधिक जटिल होता जा रहा है.”

ऐमी पोप ने कहा, "जलवायु परिवर्तन और स्पष्ट आर्थिक असमानता के कारण, बहुत से लोगों के पास कहीं और जाकर आजीविका खोजने के अलावा, बहुत कम विकल्प हैं."

आईओएम प्रमुख ने, उन लोगों के लिए सबूत पर आधारित और लोगों पर केन्द्रित साधानों का आग्रह किया जिनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो अभी यात्रा पर हैं, जो भविष्य में यात्रा पर रहेंगे और जो प्रवासी अपने स्थानों पर बने रहना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "ऐसे समाधान जो लोगों को अपने समुदायों में बने रहने के लिए कारगर हों, और उन लोगों के लिए भी कारगर हों, जो प्रवास करना चाहते हैं या उन्हें प्रवास करना पड़ेगा.

अन्तरराष्ट्रीय दिवस

2000 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक स्तर पर समाजों में प्रवासियों द्वारा किए गए योगदान को मान्यता देते हुए, 18 दिसम्बर को अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस के रूप में घोषित किया था.

इसी दिन यूएन महासभा ने 1990 में, सभी प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के रूप में जानी जाने वाली सन्धि को अपनाया था.

उनके अधिकारों को पहचानें, उनकी रक्षा करें

प्रवासी श्रमिकों पर संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र समिति ने, देशों से प्रवासन के कारकों के रूप में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय आपदाओं के प्रभावों का, बेहतर ढंग से सामना करने का आहवान किया है.

यह सन्देश इस पृष्ठभूमि में आया है कि विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार, बदलती जलवायु 21.6 करोड़ लोगों को स्थानान्तरित होने के लिए मजबूर कर सकती है, जिससे प्रवासियों की निर्बलता बढ़ जाएगी और उन्हें मानवाधिकारों के हनन का सामना करना पड़ेगा.

इसी तरह, प्रवासियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर गेहाद मादी ने प्रवासियों और उनके परिवारों के ख़िलाफ़ पूर्वाग्रह, नस्लवाद और ज़ेनोफोबिया से निपटने का आहवान किया.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा, "हमें सकारात्मक बातचीत में प्रवासियों की भूमिका को सशक्त बनाना और पहचानना चाहिए, विशेष रूप से पारगमन और प्राप्त करने वाले समाजों के साथ-साथ, उनके मूल समुदायों में उनके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए."

समिति के सदस्यों और विशेष दूत की नियुक्ति, जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद करती है. वे संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं, और वे अपनी व्यक्तिगत क्षमता में काम करते हैं. इस काम के लिए, उन्हें संयुक्त राष्ट्र से कोई वेतन नहीं मिलता है.