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भीषण युद्ध से तबाह ग़ाज़ा में, बमबारी फिर शुरू, भय और आतंक का माहौल

फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, इसराइली बमबारी में तबाह हुए एक इलाक़े में, युद्ध-ठहराव के दौरान अपने बच्चे के साथ निकलते हुए. (फ़ाइल)
© UNRWA/Ashraf Amra
फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, इसराइली बमबारी में तबाह हुए एक इलाक़े में, युद्ध-ठहराव के दौरान अपने बच्चे के साथ निकलते हुए. (फ़ाइल)

भीषण युद्ध से तबाह ग़ाज़ा में, बमबारी फिर शुरू, भय और आतंक का माहौल

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, शुक्रवार को युद्धक गतिविधियाँ फिर शुरू होने पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. साथ ही, यूएन मानवीय सहायता एजेंसियों ने अपनी सहायता गतिविधियाँ जारी रखने और ज़रूरतमन्द लोगों की मदद करने का संकल्प व्यक्त किया है. एजेंसियों का ये भी कहना है कि युद्ध से तबाह हुए ग़ाज़ा क्षेत्र में, "कोई भी जगह हमलों से सुरक्षित नहीं है".

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष - UNICEF के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने कहा है कि ग़ाज़ा के दक्षिणी इलाक़े में स्थित नासेर अस्पताल में, शुक्रवार को प्रातः सात बज़े के कुछ देर बाद ही, गोलाबारी की आवाज़ें सुनाई देने लगी थीं. वहाँ छोटे-छोटे बच्चों में डर की लहर दौड़ गई और वो अपनी माताओं से जा चिपके.

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जेम्स ऐल्डर ने ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस इलाक़े से, वीडियो लिंक के ज़रिए, जिनीवा में पत्रकारों को बताया, "बमबारी, मानवीय युद्ध-ठहराव समाप्त होने के कुछ क्षणों बाद शुरू हो गई."

युद्ध के ज़ख़्म

प्रवक्ता ने कहा कि "अल नासेर अस्पताल पर भी हमले किए गए हैं, मिसाइल से, रॉकेट से, कुछ ऐसा ही... युद्ध के ज़ख़्मों वाले बच्चे हर जगह नज़र आ रहे हैं, युद्ध के ज़ख़्मों वाले बच्चे अब भी गलियारों में हैं. इस अस्पताल में, सैकड़ों महिलाओं और बच्चों ने पनाह ली हुई है."

"सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) से बाहर आए तो हमने देखा कि दो बिस्तरों पर पाँच लोग थे."

इसराइली बलों और हमास चरमपंथियों के दरमियान एक सप्ताह तक युद्ध-ठहराव लागू रहने के बाद, ये हिंसा फिर शुरू हुई है. 

इस युद्ध-ठहराव के बीच, यूएन मानवीय सहायता एजेंसियाँ, अनेक ज़रूरतमन्द इलाक़ों में, ईंधन, खाद्य सामग्री और पानी इत्यादि, पहुँचाने में सफल रहीं.

इस युद्ध-ठहराव के दौरान, हमास की तरफ़ से कुछ बन्धकों को रिहा किया गया और इसराइल ने भी अनेक फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा किया.

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों ने ख़बर दी है कि इसराइली हमले शुरू होने के बाद से, 15 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें हज़ारों बच्चे बमबारी में तबाह हुई इमारतों के मलबे में दबे बताए गए हैं.

यूनीसेफ़ प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने बताया कि इस युद्ध में, लगभग एक हज़ार बच्चे ऐसे हैं, जिनके अंग काटने पड़े हैं.

युद्धविराम की नई अपीलें

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सोशल मीडिया पर अपने सन्देश में, ग़ाज़ा में युद्धरत पक्षों से, एक लम्बी अवधि वाले युद्धविराम पर सहमत होने के लिए, बातचीत की मेज़ पर वापिस लौटने की अपीलों की पुकारों की अगुवाई की है, ताकि ग़ाज़ा में, बेहद अधिक ज़रूरत वाली सहायता आपूर्ति की जा सके.

यूएन महासचिव ने कहा, "मुझे बेहद अफ़सोस है कि ग़ाज़ा में सैन्य अभियान फिर शुरू हो गए हैं."

"मुझे अब भी आशा है कि एक सप्ताह पहले लागू किया गया युद्ध-ठहराव आगे बढ़ाया जाएगा. युद्धक गतिविधियों का फिर शुरू होना केवल ये दिखाता है कि एक वास्तविक मानवीय युद्धविराम लागू किया जाना कितना अहम है."

सहायता सामग्री पहुँचने दें

ग़ाज़ा में युद्ध में तबाह हुए एक इलाक़े का दृश्य.
© WHO

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी शान्ति की पुकार दोहराते हुए, इसराइल के राजनैतिक और सैन्य नेताओं की इन घोषणाओं पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है कि वो, "सैन्य हमलों का दायरा बढ़ाने और उन्हें सघन करने की योजना बना रहे हैं".

वोल्कर टर्क ने कहा है, "ग़ाज़ा में युद्धक गतिविधियों का फिर शुरू होना त्रासदीपूर्ण है."

उन्होंने युद्धरत पक्षों और उन पर प्रभाव रखने वाले देशों से, मानवीय और मानवाधिकार आधारों पर, तत्काल एक युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए, अपने प्रयास दोगुने करने का आग्रह भी किया है.

मानवाधिकार प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि, "फ़लस्तीनियों और इसराइलियों के मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान और उनका संरक्षण, एक अति महत्वपूर्ण मुद्दा है."

उन्होंने कहा कि तमाम आम लोगों का संरक्षण, अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अन्तर्गत करना बहुत ज़रूरी है. 

वोल्कर टर्क ने, इसराइल से फ़लस्तीनी क्षेत्र पर एक क़ाबिज़ ताक़त के रूप में, ये सुनिश्चित करने की अपील की कि ग़ाज़ा की आबादी की, भोजन, पानी और चिकित्सा देखभाल जैसी बुनियादी ज़रूरतें अवश्य पूरी हों.

"मैं सभी पक्षों को, पूरे ग़ाज़ा क्षेत्र में, ज़रूरतमन्द आबादी तक, मानवीय राहत की निर्बाध आपूर्ति की अनुमति दिए जाने की उनकी ज़िम्मेदारी की याद दिलाता हूँ."