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भारत-यूएन विकास कोष: साझेदारी के छह वर्ष

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने, भारत-यूएन विकास साझेदारी के 6 वर्ष पूरे होने पर, यूएन मुख्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया (29 नवम्बर 2023).
UN News/Mehboob Khan संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने, भारत-यूएन विकास साझेदारी के 6 वर्ष पूरे होने पर, यूएन मुख्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया (29 नवम्बर 2023).

भारत-यूएन विकास कोष: साझेदारी के छह वर्ष

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण कार्यालय ने, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने के अवसर पर, बुधवार 29 नवम्बर को यूएन मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया. वैश्विक दक्षिण क्षेत्र में, बहुपक्षवाद और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के महत्वाकांक्षी एजेंडा से प्रेरित भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष, 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा को साकार बनाने की दिशा में, विकासशील देशों के प्रयासों में योगदान करता है. इस कार्यक्रम की यहाँ वीडियो रिकॉर्डिंग यहाँ देखी जा सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के दक्षिण-दक्षिण कार्यालय द्वारा यूएन मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर, यूएन उप महासचिव आमीना जे मोहम्मद ने कहा, "जहाँ हम पिछले छह वर्षों की उपलब्धियों पर विचार कर रहे हैं, तो आइए हम नए उद्देश्य और दृढ़ संकल्प के साथ भविष्य की ओर बढ़ें."

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"भारत, संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी निधि, उन असाधारण उपलब्धियों का प्रमाण है, जिन्हें राष्ट्र तब हासिल कर सकते हैं जब वे सीमाओं और मतभेदों को भूलकर एकजुट हों, ताकि एक स्थाई, समतापूर्ण और न्यायपूर्ण दुनिया का निर्माण किया जा सके."

आयोजन में शामिल संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष, डेनिस फ़ांसिस ने साझेदारी निधि की सराहना करते हुए कहा कि इसके तहत सभी भौगोलिक क्षेत्रों का समर्थन किया जाता है, जिससे इसका विकास का दृष्टिकोण स्पष्ट होता है – यानि धन को वहाँ उपयोग करने की क्षमता, जहाँ उनकी सबसे अधिक आवश्यकता हो.

उन्होंने कहा, "हमें 2030 के एजेंडे को तेज़ी से आगे बढ़ाने के अपने संकल्प पर दृढ़ रहना चाहिए. हमें ऐसे नए आर्थिक वातावरण को आकार देना चाहिए जो हमारे सामूहिक विकास प्रयासों बढ़ावा देने के साथ-साथ, उनका पूरा लाभ भी उठा सके."

"इसे ध्यान में रखते हुए, महासभा से लेकर, भूमि से घिरे विकासशील देशों के तीसरे सम्मेलन और कॉप28 में पेरिस समझौते के 'वैश्विक आकलन' तक, संयुक्त राष्ट्र की अनेक उच्च स्तरीय बैठकें वैश्विक दक्षिण पर गहरा प्रभाव डालने की क्षमता रखती हैं."

सहयोग का चमकता उदाहरण

यूएन कार्यालय के अनुसार, भारत-यूएन विकास कोष, यूएन व्यवस्था में दक्षिण-दक्षिण सहयोग का एक चमकता उदाहरण है.

यूएन में भारत की स्थाई प्रतिनिधि राजदूत रुचिरा काम्बोज ने इस कार्यक्रम में कहा, "भारत एक ऐसे वैश्विक वातावरण का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ छोटे या बड़े, चाहे वो आर्थिक रूप से मज़बूत हो या नहीं, हर देश को समृद्ध होने का अवसर मिले."

"अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर हमारी सक्रिय और सहानुभूतिपूर्ण भागेदारी, सतत विकास के लिए हमारी अभूतपूर्व पहलें और निष्पक्षता एवं न्याय के प्रति हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता, एक संतुलित तथा समावेशी विश्व व्यवस्था के निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर करती है."

राजदूत रुचिरा काम्बोज ने कहा कि यह नेतृत्व केवल पैरोकारी तक सीमित नहीं है,  इसे ठोस कार्यों द्वारा परिभाषित किया गया है जिसने अरबों लोगों के जीवन में उल्लेखनीय रूप से सुधार किया है.

भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.