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इसराइल-फ़लस्तीन संकट: ग़ाज़ा सिटी अब एक ‘भूतहा नगर'

फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, नसर बस्ती में, एक महिला, इसराइली हमलों में हुई भीषण तबाही के मलबे के पास से गुज़रती हुई.
© UNICEF/Mohammad Ajjour
फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, नसर बस्ती में, एक महिला, इसराइली हमलों में हुई भीषण तबाही के मलबे के पास से गुज़रती हुई.

इसराइल-फ़लस्तीन संकट: ग़ाज़ा सिटी अब एक ‘भूतहा नगर'

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, युद्ध के विनाश के निशान हर तरफ़ नज़र आ रहे हैं और ग़ाज़ा सिटी अब एक भूतहा स्थल नज़र आ रहा है. इस बीच इसराइल और हमास के बीच मानवीय युद्ध-ठहराव की अवधि बढ़ाने जाने की उम्मीदें प्रबल हैं और सहायता आपूर्ति के प्रयास जारी हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए, यूएन सहायता एजेंसी – UNRWA ने ख़बर दी है कि अक्टूबर में युद्ध भड़कने के बाद से पहली बार, ग़ाज़ा के उत्तरी इलाक़ों में स्थित इसके आश्रय स्थलों में, पहली बार मानवीय सहायता सामग्री पहुँची है.

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ग़ाज़ा में UNRWA के मामलों के निदेशक थॉमस व्हाइट का कहना है, “हमने अपने वाहनों के ज़रिए ग़ाज़ा सिटी से गुज़रे तो देखा कि वो एक भूतहा नगर जैसा था; तमाम रास्ते सुनसान थे.”

“भीषम हवाई हमलों और गोलाबारी के प्रभाव हर तरफ़ नज़र आ रहे थे. सड़कें टूट-फूट के गहरे निशानों से प्रभावित हैं, जिससे सहायता आपूर्ति जटिल हो रही थी.”

युद्ध-विराम समझौता

इसराइल और हमास के बीच चार दिन का मानवीय युद्ध-ठहराव समझौता शुक्रवार, 24 नवम्बर को शुरू हुआ था, जिसका अवधि बुधवार को इस समझौते का अन्तिम दिन था.

मानवीय सहायता एजेंसियों ने युद्धरत पक्षों से, युद्ध में ठहराव को आगे बढ़ाने की अन्तरराष्ट्रीय पुकारों को समर्थन देने का आग्रह किया है. 

इस समझौते के तहत, अभी तक हमास ने 85 बन्धकों को रिहा किया है और इसराइल ने भी 180 फ़लस्तीनी क़ैदी रिहा किए हैं.

यूएन आपदा राहत समन्वय एजेंसी – UNOCHA के अनुसार, इस युद्ध-ठहराव की बदौलत, मानवीय सहायता एजेंसियों को, ग़ाज़ा के विभिन्न इलाक़ों में, सहायता सामग्रियों की आपूर्ति करने में सफलता मिली है.

सहायता कर्मियों का साहस

UNRWA ने बताया है कि सोमवार को, छह ट्रकों का क़ाफ़िला, जबालिया में पहुँचा है जो, ग़ाज़ा में सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर है और ये ग़ाज़ा सिटी के उत्तरी इलाक़े में स्थित है.

थॉमस व्हाइट ने बताया है कि जबालिया में इस यूएन एजेंसी के सहयोगी, स्थानीय समुदायों की दिन-रात सेवा करने में जुटे हुए हैं, इनमें एजेंसी की स्वच्छता सेवाओं के प्रमुखों में से एक भी शामील हैं, जो अपनी पत्नी और बेटी की मृत्यु के बाद भी, बिना रुके सेवा में जुटे हुए हैं.

एजेंसियों के अनुसार, 24 नवम्बर को युद्ध-ठहराव समझौते पर अमल शुरू होने के बाद से, हर दिन लगभग 200 सहायता ट्रक, मिस्र की तरफ़ से ग़ाज़ा में दाख़िल हो रहे हैं.

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, ग़ाज़ा में इसराइली हवाई हमलों में 15 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें लगभग 6,000 बच्चे हैं.

टैड्रॉस की चेतावनी

मानवीय सहायता एजेंसियाँ, युद्ध-ठहराव के दौरान, राहत सामग्री, ग़ाज़ा के आश्रय स्थलों में पहुँचाने में सफल रहे हैं.
© UNRWA

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी – WHO ने, हिंसा के कारण विस्थापित हुई आबादी में, बीमारियाँ फैलने के उच्च जोखिम के बारे में, बुधवार को फिर से, नई चेतावनी जारी की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने, ये गम्भीर आकलन दोहराए हैं कि रहन-सहन के ख़तरनाक हालात और स्वास्थ्य देखभाल के अभाव के कारण, बमबारी में मारे गए लोगों से कहीं अधिक लोग, बीमारियों से मारे जाने की आशंका है.

स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम आँकड़ों में दिखाया गया है कि लगभग एक लाख 11 हज़ार लोग, साँस सम्बन्धी गम्भीर संक्रमण से प्रभावित हैं और डायरिया के 75 हज़ार मामले सामने आए हैं. उनके अलावा लाखों लोग, त्वचा सम्बन्धी अनेक अन्य बीमारियों के शिकार हैं. 

UNRWA के अनुसार, इस युद्ध में लगभग 18 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जो ग़ाज़ा की कुल आबादी का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है.