वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

ग़ाज़ा में महिलाओं व बच्चों के लिए, यूएन एजेंसियों की एकजुट अपील

ग़ाज़ा में इसराइल के भीषण हमलों से बचने के लिए, बहुत से लोगों ने अल-क़ुद्स अस्पताल में पनाह ली. (2023)
WHO
ग़ाज़ा में इसराइल के भीषण हमलों से बचने के लिए, बहुत से लोगों ने अल-क़ुद्स अस्पताल में पनाह ली. (2023)

ग़ाज़ा में महिलाओं व बच्चों के लिए, यूएन एजेंसियों की एकजुट अपील

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र की तीन एजेंसियों की प्रमुखों ने, फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, महिलाओं और लड़कियों द्वारा भुगती जा रही ग़ैर-आनुपातिक तकलीफ़ों को बुधवार को सुरक्षा परिषद में रेखांकित किया है. उन्होंने बेहद कमज़ोर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, एक सामूहिक कार्रवाई किए जाने और युद्ध की चपेट में आईं महिलाओं व लड़कियों के लिए दीर्घकालीन शान्ति के लिए प्रतिबद्धता का आग्रह भी किया है.

ये अपील और आग्रह करने वालों में – लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए सक्रिय यूएन एजेंसी – यूएन वीमैन की मुखिया सीमा बहौस, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सक्रिय यूएन एजेंसी – UNFPA की मुखिया नतालिया कानेम शामिल थीं.

उन्होंने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, ग़ाज़ा में मानवीय युद्ध विराम और बन्धकों की रिहाई के लिए, इसराइल व हमास के दरमियान हुए समझौते का स्वागत किया और एक दीर्घकालीन शान्ति समझौते की ज़रूरत को भी रेखांकित किया.

उन्होंने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव-2712 की महत्ता पर भी ज़ोर दिया, जो गत सप्ताह पारित किया गया था. 

इस प्रस्ताव में, ग़ाज़ा में आम लोगों की ज़िन्दगियों को संरक्षण मुहैया कराने के लिए, पूरे ग़ाज़ा क्षेत्र में, तत्काल और विस्तारित मानवीय युद्धविराम लागू किए जाने की पुकार लगाई गई है.

‘फिर भी वो अन्य की परवाह कर रही हैं’

सीमा बहौस ने सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, ग़ाज़ा में हिंसा की सघनता व गम्भीरता और वहाँ की आबादी पर इसके विनाशकारी प्रभाव को रेखांकित किया, विशेष रूप में महिलाओं व लड़कियों पर. अनुमानों के अनुसार, ग़ाज़ा में जो लगभग 14 हज़ार लोगों की मौतें हुई हैं, उनमें लगभग 67 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है.

उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए और उनम महिलाओं के लिए भी गहन चिन्ता व्यक्त की जिन्हें बिना चिकित्सा सामग्री, दर्दनिवारक, ऐनिस्थीसिया, या पानी के बिना ही, ऑपरेशन के ज़रिए अपने बच्चों को जन्म देना पड़ा है.

सीमा बहौस ने कहा, “इसके बावजूद, वो महिलाएँ अपने बच्चों, बीमारों, वृद्धजन की देखभाल करना जारी रखे हुए हैं, उन्हें दूषित जल में शिशु आहार तैयार करना पड़ रहा है, उन्हें इसलिए भूखा रहना पड़ता है, ताकि उनके बच्चे एक और दिन जीवित रह सकें, भारी भीड़ वाले आश्रय स्थलों में, अनेक तरह के जोखिमों का सामना करते हुए.”

‘बच्चों के लिए सर्वाधिक ख़तरनाक स्थान’

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने बच्चों पर, इस संकट के अत्यन्त गम्भीर को रेखांकित करते हुए ध्यान दिलाया कि 46 दिनों में, 5 हज़ार 300 से अधिक बच्चों की मौतों होने की ख़बरें हैं, जो ग़ाज़ा में हुई कुल मौतों की लगभग 40 प्रतिशत संख्या है.

उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व है. अन्य शब्दों में कहें तो ग़ाज़ा पट्टी, बच्चों के लिए, दुनिया भर में, सबसे ख़तरनाक स्थान है.”

कैथरीन रसैल ने कहा कि जो बच्चे इस युद्ध में जीवित बच रहे हैं, उनकी ज़िन्दगियाँ, बार-बार के हृदय विदारक हादसों का सामना करने के कारण, अपरिवर्तनीय रूप में बदल जाएंगी.

उन्होंने कहा, “उनके आसपास हिंसा और उथल-पुथल, ऐसा विषैला दबाव बनाएगी, जो उनके शारीरिक व संज्ञानात्मक विकास में हस्तक्षेप करेगा.”

उन्होंने ये भी बताया कि ग़ाज़ा क्षेत्र में लगभग 10 लाख या सारे बच्चे, अब खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं, “ये ऐसी स्थिति है जो जल्द ही, त्रासद पोषण संकट का रूप ले सकती है.”

प्रसन्नता पर मृत्यु व विनाश की छाया

यूएन प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी – UNFPA की मुखिया नतालिया कानेम ने भी सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए, बन्द होते अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल के गम्भीर अभाव पर ज़ोर दिया. इस स्थिति के कारण गर्भवती महिलाएँ और हाल ही में बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को जोखिम में धकेल दिया है.

उन्होंने कहा, “एक ऐसे क्षण में, जब एक नया जीवन शुरू हो रहा हो, जोकि आनन्द व प्रसन्नता का एक क्षण हो, मगर वो क्षण मृत्यु व विनाश, भयावहता और डर की काली छाया की चपेट में सिमट रहा है.”

नतालिया कानेम ने स्वच्छ जल और साफ़-सफ़ाई के साधनों के अभाव पर भी गहरी चिन्ता व्यक्ति, जिसके कारण अनेक तरह के स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो गए हैं, इनमें उन महिलाओं के लिए जोखिम भी शामिल हैं, जिनके पास अपने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता रखने के भी साधन नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि पूरे ग़ाज़ा में भोजन और पानी की कमी के, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य और रहन-सहन पर बहुत गम्भीर प्रभाव पड़ेंगे.

UNFPA की अध्यक्ष ने, ग़ाज़ा में कार्यरत मानवीय सहायता कर्मियों को संरक्षण मुहैया कराए जाने की ज़रूरत को भी रेखांकित किया, “जो अन्य लोगों की सेवा करते हुए, अपनी ज़िन्दगियों को जोखिम में डालते हैं.”

उन्होंने इस युद्ध में, फ़लस्तीनी शरणार्थियों की सहायता के लिए यूएन एजेंसी – UNRWA के 100 से अधिक कर्मचारियों की मौत पर शोक व्यक्त भी किया.

नतालिया कानेम ने निष्कर्षतः ज़ोर देकर कहा कि मानवता का भाग्य, उनके हाथों से सम्बद्ध नहीं है जो हथियार लहराते हैं, “ये महिलाओं और युवजन और ऐसे सहयोगियों से सम्बद्ध है जो शान्ति फैलाने के लिए एकजुट होते हैं.”

उन्होंने कहा, “इनसानियत के इस आपात इम्तेहान में, महिलाओं और लड़कियों को, टिकाऊ शान्ति की बेहद ज़रूरत है. मैं सुरक्षा परिषद से, शान्ति क़ायम करने के लिए, उसकी सामर्थ्य में सभी सम्भव कार्रवाई करने का आहवान करती हूँ.”