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ग़ाज़ा टकराव से ग़रीबी में भारी उछाल की आशंका, यूएन एजेंसियों की चेतावनी

ग़ाज़ा में इसराइल की हवाई बमबारी में तबाह हुए अपने घर में, एक 9 वर्षीय बच्चा.
© UNICEF/Eyad El Baba
ग़ाज़ा में इसराइल की हवाई बमबारी में तबाह हुए अपने घर में, एक 9 वर्षीय बच्चा.

ग़ाज़ा टकराव से ग़रीबी में भारी उछाल की आशंका, यूएन एजेंसियों की चेतावनी

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल और हमास के बीच युद्ध, अगर दूसरे महीने भी जारी रहता है तो इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों में, पिछले क़रीब 20 वर्षों के दौरान हासिल गई विकास प्रगति का पूर्ण सफ़ाया हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम – (UNDP) और पश्चिमी एशिया के लिए आर्थिक व सामजिक आयोग (ESCWA) के गुरूवार को प्रकाशित एक आकलन में, आरम्भिक सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का जायज़ा लिया गया है. इसमें चेतावनी भी दी गई है कि निर्धनता में तेज़ उछाल के साथ-साथ, सखल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.4 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है, इसे दूसरे शब्दों में कहें तो क़रीब एक अरब 70 करोड़ डॉलर के बराबर नुक़सान.

यूएन एजेंसियों ने जीवन हानि, पीड़ा और निरन्तर जारी तबाही की भर्त्सना करते हुए, एक युद्धविराम और एक अति महत्वपूर्ण क़दम के रूप में मानवीय सहायता की सतत आपूर्ति की ज़रूरत को रेखांकित किया है.

बढ़ती निर्धनता, अभूतपूर्व तबाही

यूएन एजेंसियों का कहना है कि टकराव, वैसे तो ग़ाज़ा में चल रहा है, मगर उसके प्रभाव पश्चिमी तट के साथ-साथ लेबनान, जॉर्डन और मिस्र तक में महसूस किए जा रहे हैं.

7 अक्टूबर को, मौजूदा टकराव शुरू होने से पहले बी, पूरे फ़लस्तीन देश में, लगभग 18 लाख लोग, निर्धनता में जीवन जी रहे थे. अगर ये टकराव दूसरे महीने में भी जारी रहता है तो फ़लस्तीन में निर्धनता में रहने वाले लोगों की संख्या में 34 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हो सकती है. इसका मतलब है कि लगभग 5 लाख दीगर लोग, निर्धनता के दायरे में पहुँच जाएंगे.

कोई ठिकाना नहीं

ग़ाज़ा में पहले ही लगभग 35 हज़ार घर पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुके हैं, और लगभग दो लाख 12 हज़ार आवासीय इकाइयों को आंशिक क्षति हुई है, जोकि एजेंसियों के अनुसार, अभूतपूर्व घटनाक्रम है. अगर तुलनात्मक परिदृश्य पेश किया जाए तो सीरिया में युद्ध के दौरान, इतना आवासीय नुक़सान होने में चार वर्ष लगे थे.

ग़ाज़ा की आबादी लगभग 20 लाख है और जिसमें से लगभग 15 लाख की आबादी, पहले ही आन्तरिक रूप से विस्थापित हो चुकी है.

लेबनान की राजधानी बेरूत में स्थित ESCWA की कार्यकारी सचिव रोला दश्ती ने कहा, “अगर हालात ऐसे ही रहे तो ग़ाज़ा की अधिकतर आबादी के पास, सुरक्षा के लिए कोई ठिकाना नहीं बचेगा, जिसे वो अपना घर कह सकें और वहाँ ठहर सकें.”

उन्होंने कहा कि ग़ाज़ा की लगभग 96 प्रतिशत आबादी को, तमाम बुनियादी सेवाओं के अभूतपूर्व अभाव का सामना करना पड़ रहा है और ये आबादी ऐसे हालात में धकेल दी गई है, जिसे बहु-उन्मुखी निर्धनता के नाम से जाना जाता है.

जीडीपी और आय हानि

यूएनडीपी के सहायक महासचिव और अरब देशों के लिए क्षेत्रीय ब्यूरो के निदेशक, अब्दल्लाह अल दरदरी का कहना है कि उससे भी अधिक, कुल मिलाकर फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था को, टकराव के इस एक महीने के दौरान ही, सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4 प्रतिशत नुक़सान हो चुका है, जबकि लगभग तीन लाख 90 हज़ार रोज़गार-शुदा पद, ख़त्म हो गए हैं.

उन्होंने बताया कि ग़ाज़ा में यूएनडीपी की 45 प्रतिशत परियोजनाएँ पहले ही तबाह हो चुकी हैं. स्वास्थ्य केन्द्र, सौर ऊर्जा स्टेशन, जल उपचार संयंत्र, और निजी क्षेत्र, लघु स्तरीय व्यवसायों और महिलाओं को समर्थन मुहैया कराने वाले केन्द्र, ख़त्म हो चुके हैं.

“उससे भी अधिक महत्वपूर्ण - जो मैं कहना चाहूंगा – मानव विकास की हानि है.”

अब्दल्लाह अल दरदरी ने कहा, “दो महीने के युद्ध के बाद, केवल ग़ाज़ा ही नहीं, बल्कि पूरे फ़लस्तीन में, 16 वर्ष के मानव विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा, और बुनियादी ढाँचे व आर्थिक विकास की हानि होगी. फ़लस्तीन फिर से वर्ष 2005 की स्थिति में पहुँच जाएगा.”

पुनर्बहाली के लिए धीमा रास्ता

रोला दश्ती ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने और दीर्घकालीन शान्ति स्थापित कराने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, “इतिहास हमें सबक़ सिखाता है कि टिकाऊ शान्ति के बिना, इस टकराव में शामिल सभी हितधारी ना केवल भविष्य में ज़िन्दगियों का और भारी नुक़सान उठाएंगे, बल्कि टिकाऊ विकास के लिए उनकी सम्भावनाएँ भी ख़तरे में पड़ जाएंगी.”

“कड़ी मेहनत से हासिल किए गए आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण के उनके लाभ, अदृश्य हो जाएंगे.”