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फ़लस्तीनी श्रम बाज़ार को सहारा देने के लिए, $2 करोड़ की अपील

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन से सहायता प्राप्त एक परियोजना की बदौलत ख़रीदे गए उपकरणों का एक उदाहरण.
© FAO/Mohammed Nehro Al-Thalath
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन से सहायता प्राप्त एक परियोजना की बदौलत ख़रीदे गए उपकरणों का एक उदाहरण.

फ़लस्तीनी श्रम बाज़ार को सहारा देने के लिए, $2 करोड़ की अपील

आर्थिक विकास

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने इसराइल और हमास के बीच मौजूदा टकराव से प्रभावित लाखों फ़लस्तीनी लोगों व कर्मचारियों की अहम ज़रूरतें पूरी करने के लिए, गुरूवार को दो करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने की अपील जारी है.

इस अपील में मिलने वाली धनराशि का इस्तेमाल, तत्काल राहत मुहैया कराने और दीर्घकाल में रोज़गार और कारोबारी पुनर्बहाली में सहारा देने के साथ-साथ, सामाजिक संरक्षा के लिए, तीन चरणीय कार्यक्रम को लागू करने के लिए किया जाएगा.

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के महानिदेशक गिलबर्ट होउंगबो ने, गुरूवार को जिनीवा में यह अपील जारी करते हुए कहा, “युद्धक गतिविधियों ने मानव जीवन को बहुत दुखद नुक़सान पहुँचाया है और ये नुक़सान अब भी जारी है. इसमें आजीविकाओं, रोज़गार परक कामकाज, आमदनी, कारोबार और नागरिक बुनियादी ढाँचे को भी भारी हानि हुई है.”

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आर्थिक गतिविधि बाधित

श्रम संगठन ने एक बुलेटिन प्रकाशित किया है जिसमें ये आकलन किया गया है कि 7 अक्टूबर को भड़के इस टकराव ने, इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र में, अभी तक श्रम बाज़ार और आजीविकाओं को किस तरह प्रभावित किया है.

फ़लस्तीनी इलाक़े में 34 लाख से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें लगभग 15 लाख लोग, श्रम बल का हिस्सा हैं.

यूएन श्रम एजेंसी का अनुमान है कि फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा में, श्रम बाज़ार का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा ख़त्म हो गया है, जोकि अनुमानतः एक लाख 82 हज़ार रोज़गार-शुदा व्यक्तियों के बराबर है. 

इस टकराव ने फ़लस्तीनी क्षेत्र पश्चिमी तट को भी प्रभावित किया है, जहाँ लगभग 24 प्रतिशत रोज़गार समाप्त हो गया है, जोकि अनुमानतः दो लाख 8 हज़ार रोज़गार-शुदा व्यक्तियों के समान है.

इस सब नुक़सान को, अगर एक साथ मिला दिया जाए तो, अभी तक लगभग एक करोड़ 60 लाख डॉलर के बराबर दैनिक श्रम का नुक़सान हो चुका है.

आईएलओ के महानिदेशक गिलबर्ट होउंगबो ने, ग़ाज़ा में हुई तबाही का कुछ ख़ाका पेश किया. 

उन्होंने कहा कि पूरी की पूरी बस्तियाँ तबाह हो गई हैं, बुनियादी ढाँचे को भारी नुक़सान पहुँचा है, कारोबार बन्द हो गए हैं, इलाक़ों के भीतर ही विशाल पैमाने पर विस्थापन हुआ है, और पानी, भोजन व ईंधन की कमी ने, आर्थिक गतिविधि को ठप कर दिया है.

कामगार अधर में, व्यापार ठप

इस सबके अलावा, लगभग छह हज़ार ऐसे कामगार पश्चिमी तट में बहुत गम्भीर हालात में फँस गए हैं, जो ये टकराव शुरू होने से पहले, इसराइल में काम करते थे. संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य और सहायता कर्मी भी, धरातल पर बेहद गम्भीर ख़तरे के बीच काम कर रहे हैं.

उससे भी अधिक, इसराइल द्वारा पूरे क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र में, पहुँच अधिकारों को प्रभावहीन बना दिए जाने के कारण, वैध लाइसेंस धारक कामगारों और व्यापारियों को भी, किसी भी सीमा चौकी से, इसराइल और पूर्वी येरूशेलम में दाख़िल होने से रोका जा रहा है.

इसराइल की तरफ़ से, क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्र के लिए, अति महत्वपूर्ण सामान के परिवहन पर भी व्यापार प्रतिबन्ध लगे हुए हैं, जिससे परिवारों की बुनियादी ज़रूरतें और सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर भारी प्रतिकूल असर पड़ रहा है.

स्थिति और भी बदतर होगी

ग़ाज़ा पर, इसराइल ने, वर्ष 2006 से नाकाबन्दी कर रखी है, इसलिए मौजूदा टकराव शुरू होने से पहले ही, हालात बेहद ख़राब थे.

ग़ाज़ा में निर्धनता और नाज़ुक हालात की लगातार उच्च दरें रही हैं और इस वर्ष की दूसरी तिमाही तक, वहाँ बेरोज़गारी दर 46.4 प्रतिशत थी – जोकि विश्व में सर्वोच्च दरों में शामिल हैं.

अरब देशों के लिए आईएलओ की क्षेत्रीय निदेशक रूबा जरादात ने आगाह करते हुए कहा है, “हमारे शोध में पाया गया है कि अगर ये टकराव और त्रासद मानवीय संकट जारी रहा तो, हालात और भी बदतर होने की सम्भावना है, जिसके परिणाम, आने वाले अनेक वर्षों तक महसूस किए जाएंगे.”

सहायता, विश्लेषण और पुनर्बहाली

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहायता कार्यक्रम के तहत, इस संकट के प्रभाव का सामना, तीन चरणों में करने की योजना है.

प्रथम चरण में तत्काल राहत पहुँचाने का उद्देश्य है जो पहले ही शुरू हो चुकी है. इसमें फ़लस्तीनी कामगारों को, आपात आजीविका समर्थन योजनाओं जैसी तात्कालिक सहायता पहुँचाने की योजना है. 

इनमें ग़ाज़ा के वो लोग भी शामिल हैं जो, इसराइल के भीतर अपने रोज़गार वाले कामकाज ख़त्म हो जाने के बाद, पश्चिमी तट में फँस गए हैं.

आईएलओ ने पहले ही, अपने आन्तरिक संसाधनों में से 20 लाख डॉलर की रक़म, राहत कार्यक्रमों और प्रारम्भिक आँकड़े एकत्र करने में लगा दी है. संगठन, सहायता योजना को लागू करने के लिए भी संसाधन आवंटित करने के लिए काम कर रहा है.

द्वितीय चरण में, सहायता कार्यक्रमों की योजना बनाने, उन्हें प्राथमिकता देने और उन्हें गुणवत्ता वाला अन्तिम रूप देने में मदद के लिए, डेटा एकत्रीकरण और प्रभाव विश्लेषण शामिल है.

अन्तिम चरण है पुनर्बहाली का. इसमें रोज़गार सघन ढाँचा पुनर्बहाली और अन्य साधनों के ज़रिए, रोज़गार सृजन पर ध्यान रहेगा. इसके अतिरिक्त सामाजिक संरक्षण उपायों व रोज़गारों और कारोबारों की पुनर्बहाली पर भी ध्यान रहेगा.