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नेपाल: भूकम्प से हताहतों में आधी संख्या बच्चों की, सहायता प्रयासों में तेज़ी

यूनीसेफ़ कर्मचारी, भूकम्प प्रभावित जाजरकोट में राहत आपूर्ति प्रबन्धन में जुटे हैं.
UNICEF Nepal
यूनीसेफ़ कर्मचारी, भूकम्प प्रभावित जाजरकोट में राहत आपूर्ति प्रबन्धन में जुटे हैं.

नेपाल: भूकम्प से हताहतों में आधी संख्या बच्चों की, सहायता प्रयासों में तेज़ी

मानवीय सहायता

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने मंगलवार को बताया कि नेपाल के पश्चिमी हिस्से में गत सप्ताहान्त आए घातक भूकम्प में, मौत का शिकर हुए और घायल होने वालों में आधी संख्या बच्चों की है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत प्रयासों को आगे बढ़ा रही हैं.

नेपाल में सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 3 नवम्बर को 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प में, 153 से अधिक लोगों की मौत हुई और 338 से अधिक घायल हुए. 

इसके बाद, प्रभावित इलाक़ों में 5.8 तीव्रता वाले भूकम्प के झटके फिर से महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों, विशेष रूप से बच्चों में भय व्याप्त है.

ज़मीन पर मौजूद यूएन एजेंसियों के अनुसार, शुक्रवार देर रात 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प के बाद, अब तक 380 से अधिक झटके महसूस किए जा चुके हैं. 

आरम्भिक जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों, रुकुम व जाजरकोट में चार हज़ार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, और 13 लाख लोग इस आपदा में प्रभावित हुए हैं.

नेपाल में यूएन विकास कार्यक्रम के करनाली फ़ील्ड कार्यालय के प्रमुख, रफ़ीक़ अहमद सिद्दीक़ी ने भूकम्प सर्वाधिक प्रभावित इलाक़े जाजरकोट में पहुँचने के बाद यूएन न्यूज़ को बताया कि मृतकों को सरकार की तरफ़ से मुआवज़ा दिया जा रहा है. 

गम्भीर रूप से घायल लोगों को, हवाई मार्ग से काठमांडू और नेपालगंज के लिए रवाना किया गया है.

प्रभावितों के लिए आश्रय व्यवस्था की गई है, जिसके तहत तिरपाल मुहैया कराया गया है, उन्हें भोजन व स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं. इसके अलावा, भारत, चीन समेत अन्य देशों से प्राप्त राहत सामग्री को ज़रूरतमन्दों में वितरित की जाने की व्यवस्था की जा रही है.

नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जाजरकोट ज़िला सर्वाधिक प्रभावित है.
© UNICEF/Smriti Kamar
नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जाजरकोट ज़िला सर्वाधिक प्रभावित है.

त्रासदीपूर्ण आपदा

नेपाल में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि ऐलिस अकूंगा ने बताया कि यह त्रासदीपूर्ण है कि इस भीषण भूकम्प में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. 

“बच्चे, विषमतापूर्ण ढंग से प्रभावित हुए हैं और उन्हें बाहर सर्दीं में रात गुज़ारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.”

उन्होंने कहा कि बच्चों और उनके परिजन को तत्काल चिकित्सा सहायता, आश्रय, सुरक्षित पेयजल, भोजन, कम्बल और सर्दी के मौसम से पहले गर्म कपड़ों की आवश्यकता है.

यूएन टीमें ज़मीन पर मौजूद हैं और सरकारी एजेंसियों के समन्वय में राहत प्रयासों को समर्थन प्रदान कर रही हैं. मगर, हिमालय क्षेत्र में ठंड पाँव पसार रही है और सहायता का स्तर तत्काल बढ़ाए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि यूनीसेफ़ द्वारा हरसम्भव राहत प्रयास किए जा रहे हैं, मगर बच्चों व महिलाओं की स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण और जल, साफ़-सफ़ाई व स्वच्छता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कहीं अधिक मदद की ज़रूरत होगी.