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नेपाल: सहायता प्रयासों के बीच, भूकम्प के झटकों से सदमे में परिवार

एक लड़का रुकुम में भूकम्प में ध्वस्त हुए अपने घर के मलबे पर बैठा है.
© UNICEF/Laxmi Prasad Ngakhusi
एक लड़का रुकुम में भूकम्प में ध्वस्त हुए अपने घर के मलबे पर बैठा है.

नेपाल: सहायता प्रयासों के बीच, भूकम्प के झटकों से सदमे में परिवार

मानवीय सहायता

नेपाल के पश्चिमी हिस्से को दहला देने वाले भूकम्प के बाद प्रभावित इलाक़ों में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ प्रभावित इलाक़ो में मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए प्रयास जारी रखे हैं. इस आपदा में 153 लोगों की मौत हुई है, 330 से अधिक घायल हुए हैं और हज़ारों लोगों को जमा देने वाली सर्दी में खुले में रात गुज़ारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

ज़मीन पर मौजूद यूएन एजेंसियों के अनुसार, शुक्रवार देर रात 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प के बाद अब तक 380 से अधिक झटके महसूस किए जा चुके हैं. 

आरम्भिक जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों, रुकुम व जाजरकोट में चार हज़ार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, और 13 लाख लोग इस आपदा में प्रभावित हुए हैं.

ढाई लाख से अधिक लोगों को तात्कालिक सहायता की आवश्यकता होने की सम्भावना है. समाचार माध्यमों के अनुसार, 213 स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 91 ढह चुके हैं.

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यह दुर्गम क्षेत्र है, जहाँ भूस्खलन का ख़तरा है और बार-बार आने वाले झटकों के कारण स्थिति सम्वेदनशील है. 

नेपाल में अप्रैल-मई 2015 में आए भूकम्प के बाद यह अब तक का सबसे जानलेवा भूकम्प था. आठ वर्ष पहले आई उस आपदा में में लगभग नौ हज़ार लोगों की मौत हुई थी, पाँच लाख से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे और अरबों डॉलर का आर्थिक नुक़सान हुआ था.

नेपाल के साथ एकजुटता 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भूकम्प से हुई जान-माल की हानि पर गहरा शोक प्रकट किया है. 

महासचिव गुटेरेश के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि सर्वाधिक प्रभावितों तक तत्काल राहत पहुँचाने के लिए यूएन एजेंसियाँ, स्थानीय प्रशासन के साथ नज़दीकी रूप से प्रयास कर रही हैं.

यूएन प्रमुख की ओर से सोमवार को जारी एक वक्तव्य के अनुसार, महासचिव नेपाल यात्रा से हाल ही में लौटे हैं और देश में उनके आतिथ्य-सत्कार की स्मृति अब भी ताज़ा है. 

एंतोनियो गुटेरेश ने इस घड़ी में नेपाल की सरकार और स्थानीय लोगों के साथ अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है और पीड़ितों के परिजनों के प्रति गहरी सम्वेदना व्यक्त की है. 

भूकम्प प्रभावित इलाक़ा, देश में सबसे अधिक साधनहीन इलाक़ों में है. बड़ी संख्या में पुरुष यहाँ से रोज़गार की तलाश में अन्य इलाक़ों में जाते हैं, और अनेक महिलाओं, बच्चों, व बुज़ुर्ग गाँवों और नगरों में पीछे छूट जाते हैं.

यूएन एजेंसियों के सक्रिय प्रयास  

संयुक्त राष्ट्र की टीमें नेपाल सरकार और अन्य मानवीय सहायता संगठनों के साथ मिलकर अस्थाई आश्रय स्थलों, भोजन व ग़ैर-खाद्य वस्तुओं का प्रबन्ध कर रही हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने छह मीट्रिक टन से अधिक आपात भोजन को रवाना किया है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएन जनसंख्या कोष चिकित्सा आपूर्ति व दलों को भेज रहे हैं. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष द्वारा, सम्वेदनशील परिस्थितियों का सामना कर रहे बच्चों व परिवारों को आपात सामग्री प्रदान की जा रही है. एक हज़ार से अधिक तिरपाल, 1,300 कम्बल पहले ही वितरित किए जा चुके हैं, जबकि तीन हज़ार से अधिक रवाना किए जा चुके हैं. 

इसके अलावा जल, साफ़-सफ़ाई व्यवस्था और स्वच्छता बरतने के लिए सामान की भी आपूर्ति की जा रही है.

यूएन जनसंख्या कोष ने अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर, लिंग-आधारित हिंसा से जुड़े मामलों पर ध्यान केन्द्रित किया है और परामर्शदाताओं व समुदाय-आधारित मनोसामाजिक देखभाल विशेषज्ञों की व्यवस्था की गई है.