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इंटरव्यू: नेपाल में भूकम्प प्रभावित इलाक़ो में सहायता प्रयासों के लिए, यूएन एजेंसियाँ मुस्तैद

नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से ध्वस्त हुई एक सरकारी इमारत.
Courtesy: PK Shahi, Legal Officer, Bheri Municipality, Jajarkot
नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से ध्वस्त हुई एक सरकारी इमारत.

इंटरव्यू: नेपाल में भूकम्प प्रभावित इलाक़ो में सहायता प्रयासों के लिए, यूएन एजेंसियाँ मुस्तैद

मानवीय सहायता

पश्चिमी नेपाल में शुक्रवार रात आए 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प के बाद, देश में मौजूद संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ मुस्तैदी से राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई हैं. नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की रैज़िडेण्ट कोऑर्डिनेटर, हैना सिंगर-हामदी ने यूएन न्यूज़ हिन्दी को दिए एक इन्टरव्यू में बताया कि भूकम्प से लगभग 13 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और अनुमान है कि लगभग ढाई लाख लोगों को अगले कुछ दिनों में तात्कालिक मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी.

यूएन न्यूज़: नेपाल में इस सप्ताहान्त आए शक्तिशाली भूकम्प से कौन से इलाक़े सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?

हैना सिंगर-हामदी: नेपाल के पश्चिमी हिस्से के करनाली प्रान्त में, 3 नवम्बर को स्थानीय समय के अनुसार, रात के लगभग 11:45 बजे 6.4 तीव्रता का भूकम्प आया. इसके बाद कई और झटके भी महसूस किए गए. 

भूकम्प का केंद्र, जाजरकोट नामक ज़िले में था, जो प्रान्त की राजधानी सुरखेत से लगभग 65 किलोमीटर दूर है. झटके बहुत तेज़ थे, और वो राजधानी काठमांडू में भी महसूस किए गए, यहाँ तक कि भारत में भी झटके महसूस किए गए. 

यह अभी तक की शुरुआती जानकारी है. नए आँकड़ों के साथ, संख्या बदल सकती है. अभी तक की जानकारी के अनुसार, करनाली प्रान्त के आसपास लगभग 160 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं.

चिन्ता बनी हुई है कि वास्तविक आँकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं क्योंकि इनमें से कई बहुत निर्जन क्षेत्र हैं. इसलिए, लोगों तक पहुँचने और खोज एवं बचाव कार्यों में समय लग सकता है. 

स्थानीय अधिकारियों ने चिन्ता ज़ाहिर की है कि हताहतों की संख्या में वृद्धि हो सकती है. स्वास्थ्य सुविधाओं पर भीषण दबाव है और रुकुम व बांके के अस्पताल, केवल गम्भीर मरीज़ों का ही इलाज कर पा रहे हैं.

यूएन न्यूज़: भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में कितने लोगों को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की सहायता की आवश्यकता है?

हैना सिंगर-हामदी: इन क्षेत्रों में हमारे अनुभव के आधार पर हम कह सकते हैं कि लगभग 13 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं और लगभग 2 लाख 50 हज़ार लोगों को, अगले 72 घंटों में तात्कालिक मानवीय सहायता की आवश्यकता हो सकती है – ख़ासतौर पर इसलिए क्योंकि हिमालय के इस हिस्से में सर्दियों का मौसम शुरु हो रहा है. 

हालाँकि, हमारी प्राथमिकता, लोगों को मलबे से निकालने व खोज और बचाव कार्य की रहेगी. उसके बाद चिकित्सा सहायता व सदमे से उबरने के लिए देखभाल पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा. 

फिलहाल तत्काल आवश्यकता, तापन व्यवस्था वाले आश्रय स्थल, गर्म कपड़े, स्वास्थ्य देखभाल और भोजन जैसी अहम वस्तुओं की है.

नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जान माल की भारी क्षति हुई है.
PK Shahi, Legal Officer, Jajarkot
नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जान माल की भारी क्षति हुई है.

यूएन न्यूज़: राहत और बचाव कार्यों में, संयुक्त राष्ट्र की क्या भूमिका है? विशेष रूप से, प्रभावित लोगों को अपने घरों का पुनर्निर्माण करने या जीवन दोबारा शुरू करने में मदद करने में यूएन किस प्रकार सहायता करेगा?

हैना सिंगर-हामदी: यहाँ संयुक्त राष्ट्र की एक बहुत मज़बूत टीम है. नेपाल एक सबसे कम विकसित देश (एलडीसी) की श्रेणी में आता है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र की यहाँ अच्छी मौजूदगी है. हम नेपाल के विभिन्न हिस्सों में भी मौजूद हैं, इसलिए हमारी पहुँच सभी क्षेत्रों में है. 

मेरे सहयोगियों की तत्काल प्रतिक्रिया, आश्रय प्रदान करने की रही है. शीतकालीन सहायता, चिकित्सा देखभाल जैसी सेवाएँ प्रदान करने में WHO व WFP आगे रहे हैं. 

ऐसी गम्भीर आपात स्थितियों में, स्वच्छ पेयजल बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए यूनीसेफ़ विस्थापित आबादी के लिए शुद्धिकरण गोलियाँ, अस्थाई शौचालय उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी बीमारी के प्रकोप से बचे रहें.

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र उपग्रह केन्द्र शुरू किया गया है, जिसे हम यूएनओसेट कहते हैं और यह उपग्रह छवि विश्लेषण के ज़रिए, दूरस्थ क्षति का आकलन करने में सक्षम होता है. 

वहीं UNFPA, महिलाओं को गरिमा किट भी प्रदान कर रहा है. यह सारे क़दम तात्कालिक जवाबी कार्रवाई के लिए उठाए गए हैं. 

पुनर्बहाली के लिए, हम नुक़सान की भयावहता का आकलन करने हेतु, सरकार के साथ बातचीत की प्रतीक्षा कर रहे हैं. लेकिन यह अगला क़दम है. अभी हमारी सबसे बड़ी चिन्ता, जीवन बचाने और सुरक्षा प्रदान करने की है.

यूएन न्यूज़: भूकम्प के प्रति नेपाल विशेष रूप से सम्वेदनशील है. हमने देश में 2015 के भूकम्प का विनाशकारी प्रभाव देखा है. पिछले कुछ वर्षों में क्या-कुछ बदलाव लाये गए हैं, जिससे आपदाओं के कारण जान-माल की न्यूनतम हानि हो?

हैना सिंगर-हामदी: नेपाल में, समुदाय एवं विकास पोर्टलों ने 2015 के भूकम्प से बहुत कुछ सीखा है और नेपाल की विशेष परिस्थितियों व दूरदराज़ के क्षेत्रों में फैली आबादी के मद्देनज़र, सामुदायिक सहभागिता, बुनियादी ढाँचे को सहनसक्षम बनाने व मज़बूत समन्वय पर ध्यान केन्द्रित किया गया है. 

मेरा मानना है कि अब सरकार के पास एक अच्छी समन्वय प्रणाली है, चाहे वह गृह मंत्रालय हो या राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन, इन सभी प्रणालियों के साथ संयुक्त राष्ट्र लम्बे समय से काम करता आ रहा है. लेकिन वास्तव में, सामुदायिक सशक्तिकरण और समुदाय में अधिक निवेश व सामुदायिक सहमसक्षमता निर्माण से ही बड़ा फ़र्क पड़ेगा.

मैं 10 साल पहले यहाँ काम करती थी, और मुझे तब से बहुत अन्तर नज़र आता है. विशेषकर, नेपाल की आपदा प्रतिक्रिया रणनीतियों के तहत आपदा प्रबन्धन बेहतर हुआ है, प्रारम्भिक चेतावनी प्रणालियाँ, समुदायों के साथ तेज़ी से संचार का प्रसार सुनिश्चित करना और विशेष रूप से उपराष्ट्रीय स्तर पर आपदा से निपटने की तैयारियों में बड़ा सुधार हुआ है. 

यूनीसेफ़ कर्मचारी, जाजरकोट ज़िले में मानवीय राहत पहुँचाने के लिए ट्रक रवाना कर रहे हैं.
Courtesy: PK Shahi, Legal Officer, Bheri Municipality, Jajarkot
यूनीसेफ़ कर्मचारी, जाजरकोट ज़िले में मानवीय राहत पहुँचाने के लिए ट्रक रवाना कर रहे हैं.

उपराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया की पहली पंक्ति को मज़बूत किया गया है. भूकम्प की प्रतिक्रिया के लिए, अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सन्दर्भ में हमने विश्वविद्यालयों के साथ भी काम किया है. 

हम भूकम्प की भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं, लेकिन हम यह जान सकते हैं कि सम्वेदनशील क्षेत्र कौन से हैं, जो सबसे अधिक प्रभावित होंगे और किस तरह से होंगे. 

इसलिए मुझे लगता है कि सरकार, संयुक्त राष्ट्र और विकास भागीदारों के साथ-साथ, विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय से, तत्परता में सुधार हुआ है. हालाँकि, कई चुनौतियाँ भी मौजूद हैं, विशेष रूप से काठमांडू में, जहाँ भीड़भाड़ है, और जिस तरह से इमारतें बनी हैं, घरों की सुरक्षा अभी भी चिन्ता का मुद्दा है. 

यह एक ऐसा मसला है जिस पर हमें काम करना जारी रखना होगा – ख़ासतौर पर बुनियादी ढाँचे और भवन मानकों को मज़बूत करने, सख़्त कोड और फिर से बदलाव लाने के नियमों का पालन करने में. यही एकमात्र तरीक़ा है जिससे हम भूकम्प के प्रति सम्वेदनशीलता कम कर सकते हैं.

यूएन न्यूज़: सरकार को आप किस प्रकार का समर्थन देते हैं? देश में आपदा प्रबन्धन में मदद के लिए, संयुक्त राष्ट्र किन क्षेत्रों में सरकार के साथ मिलकर करता है?

हैना सिंगर-हामदी: आपातकाल के समय में एक तात्कालिक प्रतिक्रिया होती है, जिसके तहत आपूर्ति, ग़ैर-खाद्य वस्तुएँ आदि आवंटित की जाती हैं. लेकिन लम्बी अवधि की प्रतिक्रिया के तहत, हम पिछले कुछ वर्षों से सरकार के साथ मिलकर व्यापक दृष्टिकोण पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं. 

इसमें, केन्द्रीय स्तर पर विभिन्न विभागों में क्षमता निर्माण एवं उपराष्ट्रीय स्तर पर नीति विकास, सामुदायिक सहभागिता के साथ काम करना, प्रभावी आपातकालीन प्रतिक्रिया व समन्वय तंत्र का समर्थन करना और ज़रूरत पड़ने पर संसाधन जुटाने में सरकार की मदद करना शामिल है.

इसलिए, इस संयुक्त प्रयास के ज़रिए, सरकार को प्रतिक्रिया के लिए तैयारी करने और कुशल व समन्वित तरीक़े से आपदा से उबरने की उनकी क्षमता मज़बूत करने में सहायता की जाती है. 2015 के भूकम्प से बड़ा सबक़ सीखकर, क्षमताओं को मज़बूत करने व प्रतिक्रिया के लिए समन्वय प्रयासों की दृढ़ता सुनिश्चित की गई है.

ये इंटरव्यू स्पष्टता और संक्षिप्तता के लिए सम्पादित किया गया है.