वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

भूकम्प से दहला पश्चिमी नेपाल, राहत प्रयासों में जुटीं यूएन एजेंसियाँ

नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जान माल की भारी क्षति हुई है.
PK Shahi, Legal Officer, Jajarkot
नेपाल में 6.4 की तीव्रता वाले भूकम्प से जान माल की भारी क्षति हुई है.

भूकम्प से दहला पश्चिमी नेपाल, राहत प्रयासों में जुटीं यूएन एजेंसियाँ

मानवीय सहायता

नेपाल के करनाली प्रान्त में आए शक्तिशाली भूकम्प के बाद, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ प्रभावित समुदायों तक मानवीय सहायता पहुँचाने के प्रयासों में जुट गई हैं. रिक्टर पैमाने पर 6.4 की तीव्रता वाले इस भूकम्प से अब तक 130 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं. 

मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय (UNOCHA) के अनुसार, पश्चिमी नेपाल का करनाली प्रान्त स्थानीय समयानुसार शुक्रवार देर रात 11.47 बजे भूकम्प से थर्रा उठा. 

Tweet URL

रिक्टर पैमाने पर भूकम्प की तीव्रता 6.4 आंकी गई है, जिसके बाद भी अनेक झटके महसूस किए गए. भूकम्प का केन्द्र, जाजरकोट ज़िले में रामीडांडा बताया गया है, जोकि करनाली प्रान्त की राजधानी सुरखेत से क़रीब 65 किलोमीटर दूर स्थित है. 

भूकम्प के झटके नेपाल के सुदुरपश्चिम, लुम्बिनी प्रान्तों समेत भारत की राजधानी नई दिल्ली तक महसूस किए गए हैं. 

आरम्भिक जानकारी के अनुसार, करनाली प्रान्त में 133 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं. हताहतों का वास्तविक आँकड़ा इससे कहीं अधिक होने की आशंका है, चूँकि भूकम्प के समय अधिकाँश लोग अपने घरों में मौजूद थे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयस ने करनाली प्रान्त में भूकम्प पीड़ितों के प्रति अपनी सम्वेदना व्यक्त की है. 

उन्होंने नेपाल सरकार को भरोसा दिलाया है कि तात्कालिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने और उन्हें बहाल करने के लिए यूएन एजेंसी तैयार है. 

बचाव व राहत प्रयास

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तलाश एवं बचाव कार्य जारी है और ध्वस्त हुई इमारतों के मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका व्यक्त की गई है.

कुछ इलाक़ों में भूकम्प के बाद भूस्खलन होने से सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है, जिसे खोलने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

जाजरकोट और रुकुम सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में हैं, और दूरदराज़ के इलाक़ों में स्थित होने के कारण संचार व्यवस्था कमज़ोर है, जिससे बचाव व राहत कार्य में चुनौतियाँ पेश आ रही हैं. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने बताया है कि जाजरकोट व रुकुम में पहले से तैयार सहायता सामग्री को रवाना किया गया है, और बच्चों व उनके परिवारों को आने वाले दिनों में हरसम्भव मदद प्रदान की जाएगी.