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पाकिस्तान में शरण ढूंढ रहे परिवारों व बच्चों को समर्थन देने की पुकार

पाकिस्तान में शरण लेने वाले अफ़ग़ान नागरिक अब अपने देश वापिस लौट रहे हैं.
© UNHCR/Caroline Gluck
पाकिस्तान में शरण लेने वाले अफ़ग़ान नागरिक अब अपने देश वापिस लौट रहे हैं.

पाकिस्तान में शरण ढूंढ रहे परिवारों व बच्चों को समर्थन देने की पुकार

प्रवासी और शरणार्थी

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने पाकिस्तान में बिना दस्तावेज़ों के देश में रह रहे विदेशी नागरिकों को उनके वतन वापस भेजे जाने की योजना से प्रभावित बच्चों व परिवारों की सुरक्षा व कल्याण पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है, और आगाह किया है कि इस योजना को अमल में लाए जाने के दुष्परिणाम हो सकते हैं.

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कुछ हफ़्ते पहले, पाकिस्तान ने घोषणा 1 नवम्बर के बाद, देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को देश से निर्वासित किए जाने की घोषणा की थी, जिसका सबसे अधिक असर उन 14 लाख अफ़ग़ान नागरिकों पर होने की आशंका है, जिन्होंने बिना दस्तावेज़ों के पाकिस्तान में शरण ली हुई है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR), अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM), और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने शुक्रवार को जारी अपने एक वक्तव्य में ध्यान दिलाया है कि पाकिस्तान में शरणार्थियों की मेज़बानी की एक लम्बी परम्परा रही है, जिससे लाखों ज़िन्दगियों की रक्षा हुई है.

यूएन एजेंसियों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि इस उदारता की अब भी आवश्यकता है.

इस योजना से प्रभावित होने की आशंका, सबसे अधिक अफ़ग़ान नागरिकों पर है जो अब गिरफ़्तारी या देश निकाला दिए जाने के भय से अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौट रहे हैं. 

मुश्किलों में घिरा अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान, फ़िलहाल एक गम्भीर संकट से जूझ रहा है, देश में मानवाधिकारों के लिए हालात बद से बदतर हुए हैं और कड़ी सर्दी का मौसम जल्द शुरू हो जाएगा.

देश में तीन करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर है और 33 लाख से अधिक लोग देश की सीमाओं के भीतर विस्थापित हुए हैं. 

15 सितम्बर के बाद से अब तक, एक लाख 60 हज़ार से अधिक अफ़ग़ान शरणार्थियों के पाकिस्तान से चले जाने का अनुमान है, जिनमें 86 प्रतिशत परिवार गिरफ़्तारी के भय की वजह से जल्दबाज़ी में अफ़ग़ानिस्तान लौट रहे हैं.

पाकिस्तान सरकार ने इस योजना के पहले चरण में स्पष्ट किया था कि बिना दस्तावेज़ों के रहने वाले विदेशी नागरिकों को ही देश से वापिस भेजा जाएगा.

इसके बावजूद, क़ानूनी दस्तावेज़ों के साथ पंजीकृत अफ़ग़ान नागरिकों व शरणार्थियों के भी पाकिस्तान से वापिस चले जाने की ख़बरें हैं, जबकि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि उनकी रक्षा सुनिश्चित की जाएगी.

इनमें महिलाएँ व बच्चे भी हैं. यूएन एजेंसी को ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि लोगों को उनके घरों में निशाना बनाया जा रहा है. 

अनेकानेक जोखिम

पाकिस्तान में सफ़र के दौरान बच्चों पर गम्भीर संरक्षण सम्बन्धी जोखिम हैं. हिरासत केन्द्रों, सीमा चौकियों और अफ़ग़ानिस्तान वापिस लौटने के बाद भी.

इन परिस्थितियों में बच्चों को उनकी सुरक्षा के प्रति भय, परिवार से अलग होने, दबाव, भय, शोषण व दुर्व्यवहार जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, और भोजन व आश्रय समेत अन्य ज़रूरी आवश्यकताओं में भी व्यवधान दर्ज किया गया है.

यूएन एजेंसी के अनुसार, अधिकाँश पंजीकृत अफ़ग़ान शरणार्थी पेशावर और क्वेटा शहरों में UNHCR के स्वैच्छिक देश वापसी केन्द्रों पर जाकर, अपनी वतन वापसी में सहायता का अनुरोध कर रहे हैं. 

पाकिस्तान में यूएन शरणार्थी एजेंसी की प्रतिनिधि फ़िलिप्पा कैंडलर ने कहा कि हर वापसी को स्वैच्छिक बनाया जाना होगा, और एक सुरक्षित व व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जाना होगा, जिसमें मानवाधिकारों का पूर्ण रूप से सम्मान किया जाए. 

यूएन एजेंसियों ने पाकिस्तान में उन लोगों को छूट देने का आग्रह किया है जिनकी सुरक्षा पर सन्देह है, और एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने में समर्थन देने का आग्रह किया है कि जिससे पंजीकरण, प्रबन्धन और जाँच में यह पता लगाया जा सके कि किन लोगों को देश में रुकने की ज़रूरत है.