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AI टैक्नॉलॉजी से उभरते जोखिमों के मद्देनज़र, मज़बूत बचाव उपायों पर बल

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने एआई टैक्नॉलॉजी से उपजे जोखिमों से बचाव के विषय पर ब्रिटेन में आयोजित एक शिखर बैठक में हिस्सा लिया.
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यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने एआई टैक्नॉलॉजी से उपजे जोखिमों से बचाव के विषय पर ब्रिटेन में आयोजित एक शिखर बैठक में हिस्सा लिया.

AI टैक्नॉलॉजी से उभरते जोखिमों के मद्देनज़र, मज़बूत बचाव उपायों पर बल

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ब्रिटेन में कृत्रिम बुद्धिमता (AI) से जुड़े विषय पर गुरूवार को आयोजित एक शिखर बैठक के दौरान कहा कि एआई के लिए संचालन व्यवस्था सिद्धान्तों को यूएन चार्टर और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणापत्र के आधार पर तैयार करना होगा.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने ब्रिटेन के प्रसिद्धत ब्लैचली पार्ट ऐस्टेट में प्रतिभागियों को अपने सम्बोधन में एआई टैक्नॉलॉजी के जोखिमों, चुनौतियों व अवसरों के परिप्रेक्ष्य में सतत व ढाँचा आधारित बातचीत की ज़रूरत है.  

महासचिव गुटेरेश ने बताया कि आज एआई टैक्नॉलॉजी की गति और पहुँच, अभूर्तवपूर्व है, मगर उसके साथ एआई और उसकी संचालन व्यवस्था में खाई भी बढ़ती जा रही है. 

“एआई से सम्बन्धित जोखिम अनेक और नाना प्रकार के हैं. एआई अपने आप में अब भी उभर ही रही है, और वे अपने लिए नए समाधान की मांग करते है.” यूएन प्रमुख ने कहा कि यह स्पष्टता से समझना होगा कि उनके लिए नए सिद्धान्तों की आवश्यकता नहीं है. 

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उनके अनुसार, एआई संचालन व्यवस्था के लिए सिद्धान्तों को यूएन चार्टर व मानवाधिकारों क सार्वभौमिक घोषणा पर आधारित करना होगा, और इन्हें एआई टैक्नॉलॉजी से उपजने वाले जोखिमों से बचाव उपायों में समाहित किया जाना होगा.  

तीन अहम क्षेत्र

इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई का खाका प्रस्तुत किया है.

पहला, एआई के शक्तिशाली मॉडल जारी किए जाने से सम्बन्धित उन मौजूदा ख़तरों से निपटा जाना होगा, जिनके लिए फ़िलहाल पर्याप्त रक्षा उपाय और निरीक्षण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. 

दूसरा, एआई टैक्नॉलॉजी के इस्तेमाल से दीर्घकालिक, नकारात्मक नतीजों जैसेकि रोज़गार पर असर, सांस्कृतिक विविधता का क्षरण और इस टैक्नॉलॉजी पर चंद देशों के दबदबे से भूराजनैतिक तनावों में उछाल जैसी चुनौतियों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना ज़रूरी होगी.

तीसरा, महासचिव गुटेरेश ने सचेत किया कि तत्काल कार्रवाई के अभाव में, एआई से वो विषमताएँ और पैनी होंगी, जो पहले से ही गहरी होती जा रही थीं.

“यह एक जोखिम नहीं है; यह एक वास्तविकता है.”

नीतिपरक सिद्धान्त

यूएन प्रमुख ने इन चिन्ताओं के मद्देनज़र, एआई के लिए 100 से अधिक प्रकार के नीतिपरक सिद्धान्त विकसित किए जाने पर बल दिया है, जो अक्सर आपस में गुंथे हुए होते हैं. 

विश्वसनीयता, पारदर्शिता, जवाबदेही और एआई ऐप्लीकेशन को बन्द कर देने की योग्यता समेत अन्य सिद्धान्तों पर मोटे तौर पर सहमति है, मगर विसंगतियों और मौजूदा खाइयों को पाटने के लिए वैश्विक निरीक्षण व्यवस्था की आवश्यकता होगी. 

यूएन प्रमुख ने एआई पर एक नए परामर्शदाता निकाय गठित किए जाने का उल्लेख किया, जिसमें सरकारों, व्यवसायों, टैक्नॉलॉजी समुदाय, नागरिक समाज और शिक्षा जगत से विशेषज्ञों को लिया गया है.  

महासचिव ने बताया कि विश्व में सभी हिस्सों के प्रतिनिधित्व के साथ, इस निकाय के ज़रिये ऐसे नैटवर्क-आधारित, समावेशी, तथ्य-आधारित समाधानों को प्रोत्साहन दिया गया है, जिनकी फ़िलहाल ज़रूरत है.