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क्यूबा: अमेरिकी प्रतिबन्धों के विरोध में पेश हुए प्रस्ताव के लिए पुरज़ोर समर्थन

यूएन महासभा में क्यूबा पर थोपे गए प्रतिबन्धों के विरोध में लाए गए प्रस्ताव पर मतदान.
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यूएन महासभा में क्यूबा पर थोपे गए प्रतिबन्धों के विरोध में लाए गए प्रस्ताव पर मतदान.

क्यूबा: अमेरिकी प्रतिबन्धों के विरोध में पेश हुए प्रस्ताव के लिए पुरज़ोर समर्थन

आर्थिक विकास

संयुक्त राष्ट्र महासभा में गुरूवार को सदस्य देशों ने एक विशाल अन्तर से क्यूबा पर लागू अमेरिकी आर्थिक व व्यापार प्रतिबन्धों के विरोध में लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है. इन प्रतिबन्धों को पहली बार 1960 में थोपा गया था, जिसके विरोध में पिछले 30 वर्षों से हर साल यह प्रस्ताव पेश किया जाता है.

187 देशों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जबकि अमेरिका और इसराइल ने विरोध में मत डाले. यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

यूएन महासभा में गुरूवार को पेश किए गए इस प्रस्ताव का शीर्षक है: क्यूबा के विरुद्ध, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा थोपे गए आर्थिक, वाणज्यिक व व्यापारिक प्रतिबन्धों का अन्त करने की अनिवार्यता.

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज़ पेरिल्ला ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि छह दशक पुरानी इस नाकेबन्दी से क्यूबाई नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है. 

उनके अनुसार, परिवारों के पास सामान नहीं हैं, लम्बी क़तारें और ऊँची क़ीमतें है, पशु चारा, औद्योगिक उपकरण व अन्य ज़रूरी आवश्यकताएँ पूरी कर पाना सम्भव नहीं है.

क्यूबाई विदेश मंत्री ने कहा कि विश्व भर में बैन्कों पर क्यूबा के साथ काम ना करने का दबाव है. इस नाकेबन्दी से क्यूबाई परिवार अलग हो गए हैं, और अमेरिकी नागरिक क्यूबा की यात्रा पर नहीं जा सकते.

वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि ने अपने वोट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उनका देश, क्यूबाई नागरिकों के साथ मज़बूती से खड़ा है. 

उनके अनुसार, क्यूबा पर ये पाबन्दियाँ, एक ऐसा औज़ार हैं जिनके ज़रिये, वहाँ लोकतंत्र व मानवाधिकारों के लिये सम्मान को बढ़ावा देने और स्थानीय नागरिकों के लिये बुनियादी आज़ादियों को समर्थन देने का प्रयास किया जा रहा है. 

तीन दशकों से हर वर्ष प्रस्ताव 

अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से पुरज़ोर समर्थन के साथ, इस प्रस्ताव को वर्ष 1992 से पारित किया जाता रहा है, जनरल असेम्बली में उस साल, इस मुद्दे पर वार्षिक मतदान की शुरुआत हुई थी.

उदाहरणस्वरूप, 2022 में हुए मतदान के दौरान 185 सदस्य देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग की, जबकि अमेरिका और इसराइल ने विरोध में मतदान किया. ब्राज़ील और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.  

महासभा ने चिन्ता जताई कि तीन दशक पहले शुरू किए गए इन प्रस्तावों के बावजूद, क्यूबा पर आर्थिक, वाणिज्यिक व वित्तीय प्रतिबन्ध अब भी लागू हैं, जिनका क्यूबा के लोगों और अन्य देशों में रहने वाले क्यूबाई नागरिकों पर विपरीत असर हुआ है.

महासभा ने ध्यान दिलाया है कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2015 और 2016 में इन प्रतिबन्धों को अमल में लाए जाने के अनेक पहलुओं में बदलाव के लिए उपाय अपनाए थे. मगर, 2017 के बाद से इन्हें फिर से मज़बूती से लागू किए जाने के लिए क़दम आगे बढ़ाए गए हैं.

यूएन महासभा ने सभी सदस्य देशों से आग्रह किया है कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और यूएन चार्टर के अन्तर्गत तयशुदा दायित्वों के अनुरूप, ऐसे सख़्त क़ानूनों व उपायों को लागू करने से बचा जाना होगा.