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भारत: विश्व कप क्रिकेट मैच के दौरान, बाल अधिकारों की गूंज

यूनीसेफ़ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सदभावना दूत, सचिन तेंदुलकर ने विश्व कप क्रिकेट मैच के दौरान लड़कियों के अधिकारों के लिए 'वन डे फॉर चिल्ड्रन' अभियान का नेतृत्व किया.
ICC via Getty Images
यूनीसेफ़ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सदभावना दूत, सचिन तेंदुलकर ने विश्व कप क्रिकेट मैच के दौरान लड़कियों के अधिकारों के लिए 'वन डे फॉर चिल्ड्रन' अभियान का नेतृत्व किया.

भारत: विश्व कप क्रिकेट मैच के दौरान, बाल अधिकारों की गूंज

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) और अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की एक साझेदारी के तहत, गुरूवार, 2 नवम्बर, को 2023 विश्व कप में भारत-श्रीलंका क्रिकेट मैच के दौरान, बाल अधिकारों और लैंगिक समानता के समर्थन में मुम्बई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम को नीले रंग से रौशन किया गया. इस अवसर पर, दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सदभावना दूत और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने लड़कियों के अधिकारों के पक्ष में आवाज़ बुलन्द करने के लिए 'वन डे फ़ॉर चिल्ड्रन' नामक मुहिम का नेतृत्व किया.

सचिन तेंदुलकर ने, प्रतिष्ठित श्रीलंकाई क्रिकेटर, मुथैया मुरलीधरन के साथ मुंबई में भारत-श्रीलंका मैच के दौरान, ‘बच्चों के लिए एक दिन’ और लैंगिक समानता का आहवान किया. 

मैच की दूसरी पारी में, सचिन तेंदुलकर और मुथैया मुरलीधरन ने एक बटन दबाया, जिससे 32 हज़ार दर्शकों की क्षमता वाला प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम, नीले रंग में सराबोर हो गया.

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'वन डे फ़ॉर चिल्ड्रन' नामक यह मुहिम, यूनीसेफ़ व आईसीसी की साझेदारी में, भारत में जारी आईसीसी पुरुष विश्व कप क्रिकेट 2023 के दौरान, बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दों के समर्थन में आयोजित की गई थी. 

दुनिया में किशोर उम्र की 60 करोड़ लड़कियों में से लगभग एक-तिहाई यानि 17 करोड़ से अधिक लड़कियाँ दक्षिण एशिया में रहती हैं - फिर भी दुनिया में बदलाव लाने उनकी क्षमता का पूर्ण दोहन नहीं किया गया है. 

हर 5 में से 1 लड़की कुपोषण का शिकार है. आधे से अधिक किशोरिय़ाँ ख़ून की कमी से पीड़ित हैं. केवल 36 प्रतिशत लड़कियों ने माध्यमिक शिक्षा पूरी की है. 

यूनीसेफ़ के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सदभावना दूत, सचिन तेंदुलकर ने कहा, "विश्व कप लोगों को एक साथ लाने और हर बच्चे के लिए आशा और समानता को बढ़ावा देने का एक उपयुक्त क्षण है, और मुझे ख़ुशी है कि श्रीलंका और भारत के बीच आज के मैच को ‘बच्चों के लिए एक दिन’ अभियान के लिए चुना गया है." 

"मैं खिलाड़ियों, यहाँ और दुनिया भर के दर्शकों एवं आईसीसी भागीदारों से आग्रह करता हूँ कि वे लड़कों व लड़कियों के साथ समानता का व्यवहार करने की प्रतिज्ञा लें और एक ऐसे विश्व का निर्माण करें जहाँ सभी बच्चों, विशेषकर लड़कियों को समान अधिकार प्राप्त हों." 

"मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे बच्चों के अधिकारों के समर्थक बनें और लैंगिक असमानता को मिलकर ख़त्म करने का संकल्प लें!''

नीले रंग से सराबोर

स्टेडियम में प्रवेश करते समय दर्शकों को, कलाई पर पहनने के लिए एलईडी युक्त बैंड दिए गए थे. स्टेडियम नीला होते ही वो बैंड भी नीले हो गए. साथ ही, एलईडी रिस्ट बैंड पर क्यूआर कोड (QR code) लिंक अंकित था, जिसके ज़रिए वो बच्चों के लिए अपनी प्रतिबद्धता जता सकते हैं. 

बैंड पहनने वाले प्रत्येक व्यक्ति को, अपने क्यूआर कोड को स्कैन करने और प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया. खिलाड़ियों ने खिलाड़ियों के नाम के साथ-साथ विश्व कप, 'वन डे 4 चाइल्ड' और यूनीसेफ़ के logo वाले आर्मबैंड भी पहने.

इस अवसर पर भारत में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि, सिंथिया मैककैफ्रे, ने कहा, “आज का विश्व कप मैच सभी बच्चों के अधिकारों और कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है. यह क्रिकेट की शक्ति - दुनिया भर में इसकी व्यापक पहुँच को लाखों लड़कियों व लड़कों के लिए बेहतर, सुरक्षित एवं सशक्त जीवन की वकालत करने का एक अभूतपूर्व अवसर है.'' 

उन्होंने कहा, "आईसीसी और बीसीसीआई के साथ हमारी साझेदारी बहुत अहम है, जिसकी वजह से हम क्रिकेट के ज़रिए, लाखों युवा प्रशंसकों व उस पर नज़र रखने वाले लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के प्रयास कर पा रहे हैं." 

"हम प्रशंसकों को जागरूक करने के साथ साथ, उनसे बच्चों, ख़ासतौर पर लड़कियों के अधिकारों के समर्थन में आगे आने का आग्रह करते हैं."

बाल अधिकारों की पैरवी

2016 से, यूनीसेफ़ और आईसीसी ने, बच्चों और युवाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए क्रिकेट आयोजनों की क्षमता का उपयोग किया है. 2022 से साझेदारी का केन्द्र, क्रिकेट के माध्यम से लड़कियों और युवा महिलाओं को सशक्त बनाना रहा है.

सचिन तेंदुलकर ने कहा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि खेलों में भाग लेने से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकता है. खेलों में लड़कियों की भागेदारी सुनिश्चित करना लैंगिक मानदंडों को चुनौती दे सकता है और स्कूलों, खेल के मैदानों व घरों में व्याप्त पूर्वाग्रह बदल सकता है. हर जगह लड़कियाँ व लड़के, बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं, और जब लड़कियाँ बेहतर करती हैं, तो हम सभी की बेहतर सम्भव होती है.”

आँकड़े दर्शाते हैं कि लड़कियों और महिलाओं के स्वास्थ्य व पोषण में पर्याप्त निवेश से, दुनिया भर में एक करोड़ 20 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती है एवं तीन करोड़ से अधिक अवांछित गर्भधारण रोके जा सकते हैं.

5 अक्टूबर से 19 नवंबर तक भारत में हो रहे, ICC पुरुष विश्व कप क्रिकेट ने लाखों प्रशंसकों और दर्शकों को आकर्षित किया है. ‘बच्चों के लिए एक दिन’ कार्यक्रम के अलावा, यूनीसेफ़ और आईसीसी ने, विश्व कप 2023 के दौरान लैंगिक समानता को बढ़ावा देने हेतु कई अन्य क्रिकेट पहलें भी शुरू की हैं. 

उदाहरण के लिए, 10 टीमों के हर एक खिलाड़ी ने, भारत के 8 शहरों में 10 क्रिकेट क्लीनिकों में लगभग 50 युवा लड़कों व लड़कियों के साथ खेलकर उनका हौसला बढ़ाया है.