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अफ़ग़ानिस्तान: भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर गम्भीर असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम, पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में भूकम्प प्रभावितों को ज़रूरी सहायता मुहैया कराने में जुटी हैं.
© WHO/Zakarya Safari
विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम, पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान में भूकम्प प्रभावितों को ज़रूरी सहायता मुहैया कराने में जुटी हैं.

अफ़ग़ानिस्तान: भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर गम्भीर असर

मानवीय सहायता

अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी हेरात प्रान्त में आए सिलसिलेवार भीषण भूकम्पों में अपना सब कुछ गँवा देने वाले परिवारों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र मानवीय राहतकर्मियों ने शुक्रवार को सचेत किया है कि आगामी सर्दी के महीनों से पहले उन्हें राहत दी जानी होगी. 

हेरात में पहला भूकम्प 7 अक्टूबर को आया, जिसमें 1,400 लोगों की मौत हुई और 1,800 से अधिक घायल हुए. इनमें से अधिकाँश महिलाएँ व बच्चे थे. जीवित बचे लोगों ने फ़िलहाल अपने क्षतिग्रस्त घरों के नज़दीक टैंट में शरण ली है. वे हताश हैं और उन्हें भूकम्प के झटकों का ख़तरा अब भी बना हुआ है. 

भूकम्प प्रभावित इलाक़ों में तापमान में गिरावट आ रही है और पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाना शुरू हो गया है. 

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मानवीय सहायता मामलों में संयोजन के लिए यूएन कार्यालय के अनुसार, अब तक भूकम्प से प्रभावित हुए क्षेत्र में, दो-तिहाई हिस्से की समीक्षा की जा चुकी है. 

साढ़े 21 हज़ार से अधिक घरों के ध्वस्त होने की पुष्टि हुई है जबकि 17 हज़ार से अधिक घर गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.  इस आपदा में डेढ़ लाख से अधिक लोगों पर असर हुआ है.

मनोसामाजिक समर्थन की दरकार

भूकम्प प्रभावितों में क़रीब साढ़े सात हज़ार गर्भवती महिलाएँ भी हैं, जिनमें से अनेक ने अपने परिजनों को खो दिया है. यौन एवं प्रजनन मामलों के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) के अनुसार, अपने परिवार के सदस्यों की मौत होने का उन पर गहरा असर हुआ है.

इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने मनोसामाजिक परामर्शदाताओं को वहाँ तैनात किया है, ताकि इस गम्भीर क्षति का सामना करने में उन्हें मदद मिल सके.

परामर्शदाता फ़ैज़ा ज़रिए ने बताया कि उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जिन्हें वो अपनी व्यथा सुना सकें. ऐसे में मनोसामाजिक समर्थन बेहद अहम है. 

स्थानीय महिलाओं के समक्ष अन्य कई बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिनमें उन मातृत्व मौतों के जोखिम में हुई वृद्धि है, जिन्हें आसानी से टाला जा सकता है.

इसके अलावा, लिंग-आधारित हिंसा, भरपेट भोजन ना मिल पाने की भी चुनौती है.

यूएन जनसंख्या कोष, प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयासरत है. 

संगठन ने एक करोड़ 16 लाख डॉलर की अपील जारी की है, ताकि जीवनरक्षक यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सामग्री व सेवाओँ का प्रबन्ध किया जा सके. 

स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्यकर्मियों पर असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि चिकित्सा सेवाओं की सुलभता पर गम्भीर असर हुआ है, और कम से कम 40 स्वास्थ्य केन्द्र क्षतिग्रस्त हुए हैं. यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ की आबादी मोटे तौर पर पहले से ही अति आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित थी. 

यूएन स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि पाँच लाख 80 हज़ार से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में गम्भीर व्यवधान आया है.

इस आपदा में अनेक स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित हुए हैं, उन्होंने अपने परिजनों को खोया है, या फिर स्वास्थ्य सेवा केन्द्रों के ढह जाने का ख़तरा है.

इन हालात में, उनके लिए अपने समुदायों तक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को पहुँचा पाना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है.

संगठन के अनुसार, सतत स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होगी.  इस क्रम में, यूएन एजेंसी और साझेदार संगठनों ने अगले छह महीनों के लिए 79 लाख डॉलर की सहायता धनराशि की अपील की है.