वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

ग़ाज़ा में सक्रिय, UNRWA के 'गुमनाम नायक'

गाजा में संयुक्त राष्ट्र सशस्त्र बलों (UNRWA) के एक क्षतिग्रस्त स्कूल भवन के आसपास मलबा बिखरा पड़ा है और दो कारें भी मलबे के बीच पड़ी हैं।
© UNRWA/Mohammed Hinnawi ग़ाज़ा में विस्थापित परिवारों को आश्रय देने वाले UNRWA का स्कूल भी हमले की चपेट में आ गया है.

ग़ाज़ा में सक्रिय, UNRWA के 'गुमनाम नायक'

मानवीय सहायता

फ़लस्तीनी शरणार्थियों का समर्थन करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसीUNRWA के कर्मचारी, इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली हवाई हमलों और इस क्षेत्र की पूर्ण घेराबन्दी के बीचभारी व्यक्तिगत क्षति के बावजूद भीअपनी जीवनरक्षक कार्रवाई जारी रखे हुए हैं.

UNRWA की स्थापना 70 साल से भी पहले हुई थी, और इसकी सेवाओं में, मध्य पूर्व में फ़लस्तीन शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, शिविरों के बुनियादी ढाँचे एवं आजीविका सम्बन्धी सहायता शामिल है.

इसमें ग़ाज़ा में लगभग 20 लाख लोग शामिल हैं. यहाँ UNRWA के स्कूलों में लगभग एक लाख 70 हज़ार लोग आश्रय लिए हुए हैं, जो पिछले शनिवार को इसराइल के ख़िलाफ़ हमास के हमलों से बढ़ते संकट के कारण अपने घर छोड़कर भाग आए थे.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी भी इस संघर्ष की चपेट में आई थी. यूएन के चार कर्मचारी मारे गए हैं और 14 सुविधाओं को नुक़सान पहुँचा है. संयुक्त राष्ट्र के अनेक कर्मी भी इन स्कूलों में शरण लिए हुए हैं.

यूएन न्यूज़ ने जॉर्डन के अम्मान में मौजूद, UNRWA की संचार निदेशक जूलियट टौमा से बात की.

उन्होंने डॉक्टर, नर्स, शिक्षक और स्वच्छता कार्यकर्ता समेत अपने उन सभी 13 हज़ार सहयोगियों को "गुमनाम नायकों" का ख़िताब दिया, जो "ज़मीन पर ज़रूरतमन्द लोगों को सेवाएँ प्रदान करने में लगे हैं."

जूलियट टौमा ने यह रेखांकित करते हुए बातचीत की शुरूआत की कि इस संघर्ष से UNRWA अभी तक किस तरह प्रभावित हुआ है.

यह साक्षात्कार, स्पष्टता के लिए सम्पादित किया गया है.

Tweet URL
Tweet URL

जूलियट टौमा: 7 अक्टूबर की सुबह से हो रहे हवाई हमलों के कारण, हमारी 14 यूएन सुविधाएँ क्षतिग्रस्त हुई हैं. आज सुबह आस-पास के इलाक़ों में हुए भारी हवाई हमलों के कारण, हमारे मुख्यालय को भारी नुक़सान पहुँचा. यह तब हुआ जब हमारे कुछ कर्मचारी, इसी परिसर में पास की दूसरी इमारत में शरण ले रहे थे. सौभाग्य से, कोई हताहत नहीं हुआ. संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य सुविधा, विस्थापितों को आश्रय देने वाले एक स्कूल पर, कुछ दिन पहले ही सीधा हमला हुआ था.

कुल मिलाकर, हम ग़ाज़ा पट्टी में 80 से अधिक स्कूलों व अन्य सुविधाओं में लगभग एक लाख 70 लोगों की मेज़बानी कर रहे हैं. ये वह परिवार हैं जो गोलाबारी और बमबारी से बचकर भागे हैं, और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुविधाओं व परिसरों में शरण ली है.

यूएन न्यूज़: आपने बताया कि जिन स्कूलों में लोग शरण लिए हुए हैं उनमें से एक स्कूल पर सीधा हमला हुआ है. क्या उस स्कूल में कोई हताहत भी हुआ है?

जूलियट टौमा: सौभाग्य से, उस स्कूल पर हमले में कोई हताहत नहीं हुआ. हालाँकि उसमें लगभग 250 लोगों ने शरण ली हुई थी.

दुख की बात है कि 7 अक्टूबर के बाद से हम UNRWA के चार कर्मचारी खो चुके हैं, जो ग़ाज़ा पट्टी के विभिन्न हिस्सों में हमारे साथ काम करते थे. मैं हर दिन ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अपने सहयोगियों के सम्पर्क में रहती हूँ, कभी-कभी दिन में एक से अधिक बार. वे हमें बताते हैं कि वे कितने भयभीत हैं और सुरक्षा की तलाश में घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं. अनेक ने संयुक्त राष्ट्र भवनों और स्कूलों में शरण ली है. बहुत से लोगों ने अपने प्रियजन, रिश्तेदारों, पड़ोसियों को खो दिया है. वहीं कुछ सहयोगी बेघर हो गए हैं.

ग़ाज़ा पट्टी में बड़ी संख्या में हमारे कर्मचारी UNRWA के साथ काम करते हैं. हम 13 हज़ार कर्मचारियों के साथ संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी एजेंसी हैं. इनमें डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, इंजीनियर, सफ़ाई कर्मचारी, ड्राइवर, तर्कशास्त्री शामिल हैं. ये वास्तव में हमारे अभियान कार्रवाई की बुनियाद हैं, जो ग़ाज़ा पट्टी में संयुक्त राष्ट्र द्वारा चलाया जाने वाला सबसे बड़ा और सबसे पुराना अभियान है. ये हमारे गुमनाम नायक हैं.

इस सबके बावजूद, उनमें से कई ज़मीन पर ज़रूरतमन्द लोगों को सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं क्योंकि ग़ाज़ा पट्टी में 18 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी मौजूद हैं. इनमें से कई UNWRA सहायता पर निर्भर हैं.

यूएन न्यूज़: क्या यूएन कर्मचारी, इन सेवाओं को प्रदान करने के लिए, ज़रूरतमन्द इलाक़ों तक पहुँचने में सक्षम हैं? वे ग़ाज़ा पट्टी के आसपास किस तरह आवाजाही कर रहे हैं?

जूलियट टौमा: 7 अक्टूबर के बाद, UNRWA को ग़ाज़ा पट्टी में अपनी ज़मीनी कार्रवाई घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा. उदाहरण के लिए, हमें अपना भोजन वितरण केन्द्र बन्द करना पड़ा. हमारे पास ज़मीन पर 14 वितरण केन्द्र हैं, और बिगड़ते हालात के कारण हमें उन्हें बन्द करना पड़ा. हमारे स्कूल बन्द कर दिए गए हैं, जिससे ग़ाज़ा पट्टी में लगभग 3 लाख फ़लस्तीन शरणार्थी बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है.

हालाँकि अनेक कर्मचारी अभी भी काम कर रहे हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कुछ सहयोगी भी काम में लगे हैं. हमारे कई लोग आश्रय स्थलों में लोगों की मदद कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के सहयोग से, वे उन्हें गद्दे, सोने की जगह, साफ़ पानी, भोजन आदि मुहैया करवा रहे हैं. सभी काम कर रहे हैं: कुछ लोग तथ्य व आँकड़े एकत्र कर रहे हैं, कुछ कहानियाँ एकत्र कर रहे हैं, कुछ हमें विनाश के स्तर की जानकारी दे रहे हैं. हमारे कर्मचारी यथाशक्ति जो हो सके, कर रहे हैं. हालाँकि, हमें अपनी कार्रवाई घटानी पड़ी है.

गाजा में यूएनआरडब्ल्यूए के एक स्कूल के बाहर परिवार इकट्ठा हुए हैं, जहां पुरुष और बच्चे पानी के कंटेनर एक कार में लोड कर रहे हैं।
© UNRWA/Mohammed Hinnawi

यूएन न्यूज़: क्या आपने इसराइली अधिकारियों से बातचीत कर यह गारंटी लेने की कोशिश की है कि UNRWA सुविधाओं के साथ हुई घटनाएँ दोहराई न जाएँ? क्या आपके पास अपने कर्मचारियों व अपनी सुविधाओं की सुरक्षा के लिए उनसे कोई गारंटी मिल पाई है?

जूलियट टौमा: संयुक्त राष्ट्र की सुविधाओं और किसी भी संयुक्त राष्ट्र परिसर की क़ानूनन हर समय सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिसमें संघर्ष का दौर भी शामिल हैं. यह हम इस संघर्ष के दौरान, व क्षेत्र के अन्य संघर्षों में भी स्पष्ट करते रहे हैं. संघर्ष में शामिल पक्षों को हमेशा संयुक्त राष्ट्र परिसरों, स्कूलों की रक्षा करनी चाहिए. और इस मामले में तो यह संयुक्त राष्ट्र का एक स्कूल था. तो इस मायने में तो इसकी दोहरी सुरक्षा होनी चाहिए थी.

यूएन न्यूज़: इसराइली अधिकारियों द्वारा ग़ाज़ा पट्टी की पूर्ण घेराबन्दी से आपके अभियान किस तरह प्रभावित हो रहे हैं?

जूलियट टौमा: 16 वर्षों से सम्पूर्ण ग़ाज़ा पट्टी पर नाकाबन्दी जारी है, जिसका मतलब है कि ग़ाज़ा पट्टी के अन्दर हालात पहले से ही काफ़ी गम्भीर थे. दो-तिहाई लोग ग़रीबी में जी रहे हैं, 12 लाख लोग UNRWA की राहत व खाद्य सहायता पर निर्भर हैं. बिजली की आपूर्ति बहुत कम थी और पानी की भी यही स्थिति थी. लोग ग़ाज़ा पट्टी के भीतर व बाहर आज़ादी से आवाजाही नहीं कर सकते थे. 7 अक्टूबर से पहले भी, पिछले 16 वर्षों से आवाजाही पर प्रतिबन्ध थे.

7 अक्टूबर के बाद से हमें कोई भी मानवीय राहत आपूर्ति प्राप्त नहीं हो पा रही है: न केवल UNRWA को, बल्कि ग़ाज़ा पट्टी में काम करने वाले समस्त संयुक्त राष्ट्र परिवार को. हम संयुक्त राष्ट्र कर्मियों को अन्दर नहीं ला सकते और हमारे साथ काम करने वाले लोग बाहर नहीं जा सकते. तो, ग़ाज़ा पट्टी, मानवीय सहायता और राहत कर्मियों के लिए पूरी तरह से बन्द हो गई है.

यूएन न्यूज़: तो लोगों को भोजन कैसे मिल रहा है? आपके वितरण केन्द्र बन्द हैं, सीमाएँ बन्द हैं, सीमा-चौकियाँ बन्द हैं. ऐसी स्थिति में लोग कैसे जी रहे हैं?

जूलियट टौमा: फ़िलहाल कुछ दुकानें खुली हैं और ग़ाज़ा पट्टी में थोड़ी आपूर्ति है. हम भंडार पर बहुत बारीक़ी से नज़र रख रहे हैं, लेकिन कुछ ही हफ़्तों में ग़ाज़ा पट्टी में बुनियादी आपूर्ति व ईंधन ख़त्म हो जाएगा.

यूएन न्यूज़: क्या आपके पास मिस्र की रफ़ाह सीमा चौकी के बारे में कोई जानकारी है? क्या आपको मिस्र और ग़ाज़ा के बीच लोगों व वस्तुओं की आवाजाही नज़र आई है?

जूलियट टौमा: आमतौर पर मिस्र के साथ सीमा पर ग़ाज़ा पट्टी के सुदूर दक्षिण में स्थित, रफ़ा सीमा चौकी का उपयोग ग़ाज़ा के लोग, ग़ाज़ा पट्टी छोड़ने के लिए करते हैं. इसके लिए बहुत धनराशि व अत्यधिक समन्वय की ज़रूरत पड़ती है, इसलिए हर किसी के लिए मिस्र के ज़रिए बाहरी दुनिया में जाना सम्भव नहीं होता, मुझे कुछ सहकर्मियों से पता चला है कि कुछ दिन पहले वे इसका इस्तेमाल नहीं कर पाए थे, लेकिन अब तक, मुझे उस सीमा चौकी के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है.

यूएन न्यूज़: क्या आप दोनों पक्षों को कोई सन्देश देना चाहेंगी, या कुछ और बताना चाहेंगी?

जूलियट टौमा: संयुक्त राष्ट्र, सभी पक्षों से लड़ाई समाप्त करने और नागरिकों को अनावश्यक हानि से बचाने का आहवान कर रहा है. मेरे विचार से लोग लम्बे समय से अत्यधिक पीड़ा झेल रहे हैं. ग़ाज़ा पट्टी में कई लोग सातवीं बार इस संघर्ष की स्थिति से गुज़र रहे हैं.

ग़ाज़ा में विभिन्न दौर से गुज़रे हमारे अनेक कर्मचारियों का कहना है कि इस बार सबसे ख़राब स्थिति है. वे चिन्तित हैं और अपने व अपने बच्चों, अपने प्रियजनों के लिए भयभीत हैं. अगले दिन की तो बात तो दूर, अगले घंटे में क्या होगा यह भी मालूम नहीं है. 

अनिश्चितता, भय, दु:ख, पीड़ा. अब समय आ गया है कि सभी की ख़ातिर, इस संघर्ष का अन्त हो.