वैश्विक परिप्रेक्ष्य मानव कहानियां

'वसुधैव कुटुम्बकम' विषय पर, भारतीय मिशन द्वारा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन

यूएन मुख्यालय में 'वसुधैव कुटुम्बकम' की थीम पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन.
UN Photo/Rick Bajornas
यूएन मुख्यालय में 'वसुधैव कुटुम्बकम' की थीम पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन.

'वसुधैव कुटुम्बकम' विषय पर, भारतीय मिशन द्वारा अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन

एसडीजी

यूएन महासभा अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ विषय पर आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा है कि हर परिवार के पास जिस तरह से अपनी समर्थन प्रणाली है, वैसे ही हमें भी एक साथ मिलकर एक वैश्विक समर्थन प्रणाली का निर्माण करने की आवश्यकता है. 

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने वसुधैव कुटुम्बकम यानि 'सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है' नामक यह अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन, मंगलवार, 10 अक्टूबर को, न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय परिसर में आयोजित किया. 

यूएन महासभा अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने इस कार्यक्रम में कहा कि एक विश्व, एक कुटुम्ब पर केन्द्रित इस सम्मेलन की थीम, एकजुटता व एकता के सिद्दान्तों के अनुरूप है.

"मगर, दुनिया भर में लोग पीड़ा सह रहे हैं - हिंसक टकराव से लेकर जलवायु आपात स्थिति तक; वैश्विक महामारियों से लेकर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों तक; मौजूदा दौर, हर घंटा बीतने के साथ और अधिक गम्भीर रूप धारण कर रहा है."

उनके अनुसार मध्य पूर्व में भड़की हिंसा और बड़ी संख्या में मासूम लोगों की मौतें, किसी भी प्रकार से एक विश्व, एक कुटुम्ब और एकता व एकजुटता के सिद्धान्तों के अनुरूप नहीं है. 

उन्होंने कहा, “जब हमें शान्ति की कहीं अधिक आवश्यकता है, हमारे पास वो कम है,” जिससे सर्वाधिक प्रभावितों में कमज़ोर और संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाली आबादियाँ हैं. 

एकजुटता की दरकार

यूएन महासभा प्रमुख डेनिस फ़्रांसिस ने कहा कि गहरी चिन्ताओं व तनावों के दौर में, हमें अक्सर स्वयं महसूस करते हैं कि एक साथ आकर मिलें, चाहे यह एकजुटता के लिए हो, सांत्वना के लिए या फिर फिर दोनों ही कारण हों.

उन्होंने भारत की जी20 समूह की अध्यक्षता का उल्लेख किया, जिसके ज़रिए एक पृथ्वी, एक कुटुम्ब, एक भविष्य का संदेश गुंजायमान हुआ.

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि इस थीम के तहत भारत ने ध्यान दिलाया कि यह दुनिया, जिसे हम अपना घर बुलाते हैं, उसकी रक्षा करना हमारा दायित्व व आवश्यकता है.

“विशाल या लघु, हिन्द या प्रशान्त, उत्तर या दक्षिण, हम विविध, अस्तित्व से जुड़े ख़तरों की वास्तविकता का एक साथ सामना कर रहे हैं, और हम केवल एक साथ आकर ही डटे रहेंगे. और सम्भवत: संरक्षित करेंगे.”

यूएन महासभा के 78वें सत्र के लिए अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने सम्मेलन को सम्बोधित किया.
UN Photo/Rick Bajornas
यूएन महासभा के 78वें सत्र के लिए अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने सम्मेलन को सम्बोधित किया.

वैश्विक समर्थन प्रणाली

यूएन महासभा अध्यक्ष डेनिस फ़्रांसिस ने कहा कि जिस तरह से हर परिवार के पास अपनी समर्थन प्रणाली है, वैसे ही हमें एक साथ मिलकर एक वैश्विक समर्थन प्रणाली का निर्माण करने की आवश्यकता है. 

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महासभा प्रमुख ने एक दूसरे को सशक्त बनाने की अहमियत को रेखांकित किया. फिर चाहे यह महिलाओं के नेतृत्व में विकास के ज़रिए हो, डिजिटल दरार को पाटने के लिए टैक्नॉलॉजी को अपनाने के ज़रिए हो, या फिर समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के ज़रिए.

“हमें हमारे अनुभव, हमारी प्रौद्योगिकियाँ, हमारी क्षमताएँ व संसाधन साझा करने होंगे.”

“हमें एक परिवार के रूप में क़दम उठाने होंगे, सभी के हित को ध्यान में रखते हुए साथ मिलकर काम करना होगा.”

कार्रवाई की पुकार

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि, राजदूत रुचिरा काम्बोज ने अपने सम्बोधन में कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम, केवल एक उच्च आदर्श ही नहीं है बल्कि “यह कार्रवाई की पुकार है, जोकि हमें हमारी साझा नियति को पहचानने का आग्रह करती है, सामने मौजूद कठिनाइयों के दौरान एक साथ आने की, और एक ऐसी दुनिया का निर्माण करने की, जहाँ हर व्यक्ति के साथ, वो चाहे कहीं से भी हो, इस भव्य, वैश्विक परिवार के एक हिस्से के रूप में बर्ताव किया जाए.”

इसके मद्देनज़र, उन्होंने युवाओं को विविध संस्कृतियों के बारे में शिक्षित करने, अन्तर-सांस्कृतिक संवादों को बढ़ावा देने, और साझा मानवता का उत्सव मनाने का आग्रह किया. 

राजदूत रुचिरा काम्बोज ने कहा कि इसके लिए यह ज़रूरी है कि हमें विभाजित करने वाले मतभेदों के बजाय, साझा सपनों व मूल्यों पर ध्यान केन्द्रित किया जाए.

इस सम्मेलन में भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के अध्यक्ष डॉक्टर विनय सहस्रबुद्धे, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, पूर्व राजनयिक विजय नाम्बियार समेत अन्य गणमान्य लोगों ने शिरकत की.

कार्यक्रम के दौरान निम्न दो विषयों पर चर्चा हुई:

सत्र-1: वसुधैव कुटुम्बकम और अन्तरराष्ट्रीय शान्तिरक्षा बल.

सत्र-2: वसुधैव कुटुम्बकम और जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता हानि व पर्यावरण प्रदूषण से निपटना.