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कक्षा में बैठे कुछ युवा थाई छात्र एक प्रशिक्षक से शारीरिक संरचना के मॉडल का उपयोग करके यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में सीख रहे हैं।

थाईलैंड: किशोरावस्था के गर्भधारण की समस्या से निपटने की मुहिम

UN News/Daniel Dickinson संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) द्वारा समर्थित एक गैर-सरकारी संगठन के काम की बदौलत, थाईलैंड के उत्तर में किशोर युवजन, गर्भ-निरोधकों व अन्य यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य मुद्दों के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त कर रही हैं.

थाईलैंड: किशोरावस्था के गर्भधारण की समस्या से निपटने की मुहिम

महिलाएँ

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, थाईलैंड के प्रगतिशील क़ानून के परिणामस्वरूप, किशोरावस्था में गर्भधारण की दर में नाटकीय रूप से गिरावट आई है. लेकिन अगर लड़कियों और युवा महिलाओं के अधिकारों का पूर्ण सम्मान हो, तो इसमें और कमी लाने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है.

हर साल 11 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अन्तरराष्ट्रीय बालिका दिवस से ठीक पहले, थाईलैंड में यूएनएफ़पीए की कंट्री डायरेक्टर, असा टॉर्केलसन ने यूएन न्यूज़ से बातचूत के दौरान बताया कि किस तरह संयुक्त राष्ट्र, ख़ासतौर पर युवजन को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य तक पहुँच प्रदान करने में मदद कर रहा है.

यूएन न्यूज़: थाईलैंड में किशोरावस्था में गर्भधारण की समस्या कितनी व्यापक है?

असा टॉर्केलसन: थाईलैंड की सरकार ने, यूएनएफ़पीए जैसे राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय भागीदारों के सहयोग से, पिछले दशक में किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में कमी लाने में अहम प्रगति की है. 2011 में, 15 से 19 वर्ष की आयु की महिलाओं के बीच इसकी दर, प्रति 1,000 पर 53.4 जन्म थी, जो दस्तावेज़ीकरण शुरू होने के बाद से, थाईलैंड में दर्ज सबसे अधिक दर है.

2016 में लागू किए गए क़ानून का लक्ष्य था, इस दर को 10 वर्षों के भीतर आधा करना, लेकिन यह लक्ष्य 2021 तक ही पूरा हो गया, और अब नया लक्ष्य है, 2027 तक प्रति 1,000 पर 15 से कम जन्म के आँकड़ों तक पहुँचने का. आँकड़े बताते हैं कि थाईलैंड में उत्कृष्ट प्रगति हुई है, लेकिन अभी अधिक कार्रवाई की ज़रूरत है.

यूएन न्यूज़: किशोर गर्भधारण की दर घटाने के लिए और क्या करने की आवश्यकता है?

असा टॉर्केलसन: कई सामाजिक मुद्दे, किशोरावस्था में गर्भधारण का कारण बनते हैं. इनमें गर्भ-निरोधकों तक पहुँच, लैंगिक असमानता, ग़रीबी, यौन हिंसा व ज़बरदस्ती के अलावा, महिलाओं एवं लड़कियों को लेकर नकारात्मक दृष्टिकोण शामिल हैं. इसमें कमी लाने के अनगिनत प्रयासों में, लड़कों और पुरुषों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी नज़रअन्दाज़ किया गया है. हमें ऐसे पुरुषत्व को बढ़ावा देने के प्रयास करने की आवश्यकता है, जो महिलाओं व लड़कियों की गरिमा का सम्मान करता हो और उनकी बात सुनता हो.

UNFPA की कंट्री डायरेक्टर डॉ. आसा टॉर्केलसन, थाईलैंड के चियांग माई में एक जातीय समुदाय के दौरे के दौरान मुस्कुराती हैं।
© UNFPA Thailand

लड़कियों के अधिकारों का समर्थन करने और उन्हें किशोरावस्था में गर्भधारण की समस्या से बचाने के लिए सशक्त बनाने हेतु, अधिक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है. ऐसे दृष्टिकोण के तहत, समस्त युवजन के लिए आयु-उपयुक्त व्यापक कामुकता शिक्षा, लड़कियों का सशक्तिकरण और पुरुषों व लड़कों के सहयोग से लैंगिक-समानता वाले समाज का निर्माण, तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जानकारी, व उनसे सम्बन्धित सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होने चाहिए.

हमें युवजन के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के विकल्पों पर चर्चा करने के लिए, सुरक्षित स्थान स्थापित करने में युवाओं, परिवारों तथा समुदायों की भागेदारी की ज़रूरत है.

यूएन न्यूज़: इसमें कलंक एवं भेदभाव की क्या भूमिका होती है?

असा टॉर्केलसन: जब युवा लड़कियाँ गर्भवती हो जाती हैं, तो दुनिया के हर एक कोने में, उन्हें अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है, और थाईलैंड में भी यही हाल है. थाईलैंड कई मायनों में एक पारम्परिक समाज है और इसलिए गर्भवती किशोरियों को स्वीकृति नहीं मिलती, या फिर दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें कलंकित किया जाता है.

यूएनएफ़पीए ने कई युवा लड़कियों से मुलाक़ात की है जो कहती हैं कि पाठ्यक्रम का हिस्सा होने पर भी उन्हें स्कूल में उचित कामुकता शिक्षा नहीं मिली है. वहीं कई अन्य ने कहा है कि गर्भनिरोधक माँगने पर उन्हें असहजता या शर्मिंदगी महसूस होती है क्योंकि स्वास्थ्य देखभाल कर्मी उनके साथ तिरस्कार भरा व्यवहार करते हैं और उनकी पीठ पीछे बात करते हैं.

सबसे ख़राब मामलों में, इस भेदभाव और कलंक के कारण, किशोरावस्था में माँ बनी लड़कियों को स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है और यहाँ तक ​​कि उनके परिवार उन्हें त्याग देते हैं.

यूएन न्यूज़: किशोरावस्था में गर्भधारण के क्या दीर्घकालिक प्रभाव होते हैं?

असा टॉर्केलसन: किशोरावस्था में होने वाले अधिकाँश गर्भधारण, अनियोजित व अनपेक्षित होते हैं और अक्सर अपने साथ कई चुनौतियाँ लाते हैं.

ज़्यादातर किशोरियाँ, गर्भावस्था या प्रसव के लिए शारीरिक रूप से तैयार नहीं होतीं और इसलिए जटिलताओं का शिकार होती हैं. वास्तव में, थाईलैंड में कम उम्र की लड़कियों की मृत्यु का प्रमुख कारण समय से पूर्व गर्भधारण ही है.

साथ ही, थाईलैंड में यह किशोरियाँ अक्सर कम आय वाले परिवारों से आने के कारण कुपोषित होती हैं, जिससे गर्भावस्था और बच्चे पैदा करने से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं.किशोरावस्था में गर्भधारण करने पर, कई लड़कियाँ स्कूल जाना बंद कर देती हैं, जिससे उनकी शिक्षा व आय अर्जित करने की क्षमता पर भारी असर पड़ता है. 

स्कूल की वर्दी पहने दो युवक कक्षा में अन्य छात्रों के सामने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर एक प्रस्तुति देते हैं।
UN News/Daniel Dickinson

यूएन न्यूज़: यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के मामले में थाईलैंड कितना प्रगतिशील है?

असा टॉर्केलसन: थाईलैंड की सरकार ने युवजन समेत देश में रहने वाले सभी लोगों के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए अथक कार्रवाई की है.

2002 में, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रणाली शुरू की गई, जिससे सभी लोगों को स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच प्राप्त हुई. इसमें परिवार नियोजन सेवाएँ और गर्भनिरोधक विकल्पों की एक विस्तृत श्रृँखला तक लोगों को पहुँच देना शामिल है, जैसे कि गर्भनिरोधक गोली और लम्बे समय तक काम करने वाली गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण प्रणालियाँ. 2021 से, थाईलैंड के प्रत्येक युवा को, सप्ताह में 10 मुफ़्त कॉन्डोम प्राप्त करने का प्रावधान है.

2016 में, ख़ासतौर पर किशोर गर्भावस्था के मुद्दे को सम्बोधित करने के उद्देश्य से, किशोर गर्भावस्था समस्या की रोकथाम व समाधान अधिनियम के तहत, अतिरिक्त क़ानून लागू किया गया. इस क़ानून के अन्तर्गत, युवजन के आवश्यक अधिकारों को सुनिश्चित किया गया है, जिसमें शिक्षा का अधिकार भी शामिल है, विशेषकर उन किशोरियों के लिए जो गर्भवती हो जाती हैं. क़ानून के तहत ऐसे में लड़कियों को इन अधिकारों से वंचित रखना गैर-क़ानूनी माना गया है.

यूएन न्यूज़: क्या यह क़ानून, किशोर गर्भावस्था के मामले कम करने में मददगार रहा है?

असा टॉर्केलसन: क़ानून के प्रभावी होने के लिए, क़ानून पारित करने से कहीं अधिक किए जाने की आवश्यकता होती है. यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि थाईलैंड में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को नवीन ज़रूरतों के अलावा, युवा गर्भवती लड़कियों को सम्भालने का उचित प्रशिक्षण भी दिया जाए.

एक जातीय महिला, जिसने पारंपरिक लंबी गर्दन का आभूषण और रंगीन सिर का आभूषण पहना हुआ है, कुर्सी पर बैठी है और एक टैबलेट कंप्यूटर पकड़े हुए है।
UNESCO/Pornpilin Smithveja

समाज का दृष्टिकोण बदलना भी आवश्यक है और, ख़ासतौर पर माध्यमिक शिक्षा में अधिक निवेश की ज़रूरत है, ताकि लड़कों को इसमें शामिल किया जा सके व लड़कियों को उनके अधिकारों की पूर्ण जानकारी दी जा सके.

यह स्पष्ट है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि युवजन, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकारों तक पहुँच सकें और उनका आनंद उठा सकें, क्योंकि तेज़ी से बूढ़े होते समाज में युवाओं को भविष्य की समृद्धि की कुँजी माना जाता है.

अपनी ओर से, यूएनएफ़पीए सरकारी प्रयासों का समर्थन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए नई साझेदारियों की एक श्रृँखला तैयार कर रहा है कि युवजन अपने अधिकारों का आनंद उठा सकें – ख़ासतौर पर दूरदराज़ के इलाक़ों में रहने वाले, आदिवासी समुदायों और ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग.हमारी साझेदारियों में निजी क्षेत्र, मशहूर हस्तियों, ऑनलाइन प्रभावशाली व्यक्तियों, विकलांग पैरोकारों और कमज़ोर वर्ग के युवाओं के समूहों के साथ मिलकर काम करना शामिल है.

एसडीजी 5: 2030 तक सभी महिलाओं व लड़कियों का सशक्तिकरण

• महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ सभी प्रकार के भेदभाव और हिंसा को समाप्त करें

• समय-पूर्व व जबरन विवाह और महिला जननांग विकृति जैसी हानिकारक प्रथाओं को ख़त्म करें

• लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं एवं लड़कियों को सशक्त बनाने वाले क़ानून को मज़बूती से लागू करें

• राजनैतिक, आर्थिक एवं सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व के लिए महिलाओं की पूर्ण व प्रभावी भागेदारी तथा समान अवसर सुनिश्चित करें

• यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य देखभाल तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करें

वैश्विक स्तर पर, वर्तमान में समस्त विवाहित महिलाओं में से लगभग आधी महिलाएँ, अपने यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा अधिकारों पर निर्णय लेने की शक्ति से वंचित हैं.