इंटरनैट कनेक्टिविटी और डिजिटल व्यवस्था में पसरी विषमताओं को दूर करने पर बल
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भूराजनैतिक तनावों, अनेकानेक संकटों और बढ़ती असमानताओं के बीच टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा को साकार करने में इंटरनैट की भूमिका को रेखांकित किया है.
चंद देशों में टैक्नॉलॉजी और उसका इस्तेमाल तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है, मगर सच्चाई यह है कि विश्व में ढाई अरब से अधिक लोग अब भी ऑफ़लाइन हैं. मुख्यत:, वैश्विक दक्षिण में स्थित देशों और संवेदनशील हालात में जीवन गुज़ार रहे समुदायों में.
इस वर्ष, ‘18वीं इंटरनैट गवर्नेंस फ़ोरम’ जापान में आयोजित की जा रही है, जिसकी थीम है: जैसा इंटरनैट हम चाहते हैं – लोगों का सशक्तिकरण.
इंटरनैट शासन-विधि (internet governance) फ़ोरम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल टैक्नॉलॉजी में निहित सम्भावनाओं का लाभ उठाया जाए, और जोखिमों में कमी लाई जाए.
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, चूँकि कृत्रिम बुद्धिमता समेत प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेज़ गति से आ रहे बदलावों से मौजूदा असमानताओं के और पैना होने की आशंका है.
संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि डिजिटलीकरण सम्पूर्ण-समाज को प्रभावित करने वाली एक प्रक्रिया है, जिससे इंटरनैट से जुड़ी और उसके दायरे से बाहर, दोनों आबादियाँ प्रभावित होती हैं.
इसके बावजूद, उससे होने वाले लाभों में गहरी विसंगति है.
डिजिटल टैक्नॉलॉजी को संवारना
यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने फ़ोरम को सम्बोधित करते हुए कनेक्टिविटी और डिजिटिल व्यवस्था में पनपी खाइयों को पाटने के लिए एक साथ मिलकर प्रयास करने की बात कही.
उन्होंने कहा कि डिजिटल सहयोग, मानवाधिकार आधारित व व्यक्ति-केन्द्रित उपायों को अपनाया जाना होगा.
महासचिव के अनुसार, इंटरनैट की सहायता से डिजिटल टैक्नॉलॉजी को निरन्तर संवारते रहने की आवश्यकता है, ताकि टिकाऊ विकास लक्ष्यों के वादों को पूरा किया जा सके, जलवायु कार्रवाई हो और एक बेहतर विश्व को आकार दिया जाए.
इस क्रम में, यूएन प्रमुख ने यूएन वैश्विक डिजिटल कॉम्पैकट की अहमियत को रेखांकित किया है, जिसके ज़रिये सिद्धान्तों, उद्देश्यों और क़दमों का ख़ाका प्रस्तुत किया गया है ताकि मानव-केन्द्रित डिजिटल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके.
अगले वर्ष भविष्य की शिखर बैठक में इश मुद्दे पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.
उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉम्पैक्ट में उल्लिखित प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सरकारों, निजी सैक्टर और नागरिक समाज को एक साथ आना होगा.
सर्वजन तक इंटरनैट का लाभ
इंटरनैट फ़ोरम के उदघाटन दिवस पर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा नियुक्त एक पैनल द्वारा एक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया, जिसमें डिजिटल शासन-विधि (internet governance) को आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.
इस आयोग के प्रमुख इंटरनैट पुरोधा के रूप में देखे जाने वाले विन्ट सर्फ़ और उपप्रमुख मारिया रेस्सा हैं, जिन्हें 2021 में नोबल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
यह विश्लेषण बताता है कि इंटरनैट को सम्पूर्ण, ख़ुला, सार्वभौमिक और समावेशी, स्वच्छंद भरोसे लायक बनाए रखने के क्या मायने हैं.
इंटरनैट फ़ोरम
8-12 अक्टूबर तक आयोजित इस फ़ोरम के दौरान इंटरनैट शासन-विधि से जुड़े सबसे अहम मुद्दों, चुनौतियों व रुझानों पर चर्चा होगी, और अच्छी नीतियों व तौर-तरीक़ों का आदान-प्रदान किया जाएगा.
इससे इंटरनैट की सततता, सुरक्षा, स्थिरता व विकास को प्रोत्साहन मिलेगा. इस फ़ोरम में 170 से अधिक देशों में आठ हज़ार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जोकि अब तक की सबसे बड़ी और भौगोलिक नज़रिय से सबसे विविध फ़ोरम है.
इसमें 300 से अधिक सत्रों में निम्न आठ विषयों पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा:
- एआई व उभरती हुई टैक्नॉलॉजी
- इंटरनैट को बिखरने से बचाना
- साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, ऑनलाइन सुरक्षा
- डेटा शासन-विधि व भरोसा
- डिजिटल दरार व समावेशन
- वैश्विक डिजिटल शासन-विधि व सहयोग
- मानवाधिकार व आज़ादियाँ
- सततता व पर्यावरण