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काराबाख़ क्षेत्र: ‘अचानक’ हुए पलायन के बाद, चंद जातीय आर्मिनियाई के ही रह जाने की आशंका

काराबाख़ क्षेत्र से जातीय आर्मिनियाई समुदाय के लोगों ने आर्मिनिया में शरण ली है.
© WHO/Nazik Armenakyan
काराबाख़ क्षेत्र से जातीय आर्मिनियाई समुदाय के लोगों ने आर्मिनिया में शरण ली है.

काराबाख़ क्षेत्र: ‘अचानक’ हुए पलायन के बाद, चंद जातीय आर्मिनियाई के ही रह जाने की आशंका

मानवीय सहायता

अज़रबैजान के काराबाख़ क्षेत्र से हाल के दिनों में एक लाख से अधिक जातीय आर्मिनियाई लोगों के पलायन के बाद वहाँ अब केवल 50 से एक हज़ार लोगों के ही शेष रह जाने का अनुमान है. पिछले 30 वर्षों में पहली बार इस क्षेत्र का दौरा कर रहे संयुक्त राष्ट्र मिशन ने सोमवार को यह जानकारी दी है. 

अज़रबैजान में संयुक्त राष्ट्र के रैज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर के नेतृत्व में अन्य वरिष्ठ यूएन अधिकारियों रविवार को काराबाख़ क्षेत्र का दौरा करने वाली टीम ने सोमवार को एक वक्तव्य जारी किया है.

यूएन मिशन ने हालात का जायज़ा लेने के बाद बताया कि ख़ानकेंडी शहर में सार्वजनिक इमारतों को क्षति पहुँचने के कोई संकेत नहीं मिले हैं. 

यूएन टीम के अनुसार, जिस तरह अचानक स्थानीय आबादी ने अपने घरों को छोड़ा और इस अनुभव की वजह से जिस पीड़ा को उन्होंने झेला होगा, वह हैरान कर देने वाला है.

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मिशन ने बताया कि उन्होंने कई स्थानीय निवासियों और अन्य लोगों से बातचीत की, और नवीनतम युद्धविराम के बाद से अब तक, आम नागरिको के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं की जानकारी नहीं मिली है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब काराबाख़ क्षेत्र में बचे जातीय आर्मिनियाई लोगों की संख्या 50 से एक हज़ार के बीच होने का अनुमान है.

यूएन टीम ने अपने मिशन के दौरान, अग़दम से ख़ानकेंडी का दौरा किया, जिसे जातीय आर्मिनियाई समुदाय स्टेपानाकेर्ट के नाम से भी जानता है.

जिन इलाक़ों का जायज़ा लिया गया है, वहाँ अस्पतालों, स्कूलों, घरों, सांस्कृतिक व धार्मिक परिसरों समेत सार्वजनिक इमारतों को क्षति पहुँचने के साक्ष्य नहीं मिले हैं. इसके अलावा, वहाँ दुकानें बन्द थीं.

यूएन टीम ने कहा कि अज़रबैजान की सरकार शहर में स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को फिर से बहाल करने के लिए तैयारी में जुटी है.

यूएन अधिकारियों को ग्रामीण इलाक़ों में जाने की अनुमति नहीं मिल पाई, मगर उन्हें कृषि बुनियादी ढाँचे और मवेशियों को नुक़सान पहुँचने के चिन्ह नज़र नहीं आए हैं.

लाचीन मार्ग 

यूएन मिशन ने सीमा पार करने के लिए लाचीन मार्ग को अपनाया, जिससे होकर एक लाख से अधिक जातीय आर्मिनियाई नागरिकों ने अपने घरों से पलायन किया. 

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों को आर्मिनिया की ओर जाने वाले रास्ते पर आम लोगों के वाहन दिखाई नहीं दिए.

टीम ने आम लोगों के साथ बातचीत के आधार पर बताया कि अभी इस समय यह कह पाना कठिन है कि स्थानीय आबादी की वापिस लौटने की इच्छा है या नहीं.

वक्तव्य में ज़ोर देकर कहा गया है कि भरोसे व विश्वास का निर्माण करना आवश्यक है, जिसके लिए सभी पक्षों से समय व प्रयास की ज़रूरत होगी. साथ ही, स्थानीय आबादी के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसम्भव कोशिश की जानी होगी. 

वक्तव्य में कहा गया है कि अज़रबैजान में संयुक्त राष्ट्र टीम क्षेत्र में रह रही आबादी और वहाँ वापसी के लिए इच्छुक लोगों को समर्थन प्रदान करने के लिए तैयार है.

आर्मिनिया में हालात

आर्मिनिया में सीमावर्ती शहर गोरिस में पहुँचने वाले अधिकाँश शरणार्थी, आगमन के बाद से देश के अन्य हिस्सों का रुख़ कर चुके हैं.

अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के अनुसार, आर्मिनिया में शरण लेने वाले लोग बेहद कठिन यात्राओं के बाद वहाँ पहुँचे हैं. उन्हें कई दिनों तक पैदल चलना पड़ा, और उन्होंने गुफ़ाओं या भूमिगत स्थलों पर शरण ली.

यूएन प्रवासन एजेंसी के प्रवक्ता जो लॉरी ने यूएन न्यूज़ को आर्मिनिया के येरेवान शहर से जानकारी देते हुए बताया कि पलायन करने वाले लोगों के कुपोषण का शिकार होने की ख़बरें मिली हैं, विशेष रूप से वृद्धजन और बच्चों में, और तेज़ बुखार व न्यूमोनिया के मामले भी सामने आए हैं. 

मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, आर्मिनियाई सरकार के साथ मिलकर वहाँ पहुँचने वाले शरणार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य समर्थन प्रदान करने में तत्परता से जुटी हैं. 

यूएन प्रवासन एजेंसी ने सोमवार को दो सचल क्लीनिक शुरू किए हैं, और आगामी दिनो में चार अन्य क्लीनिक खोले जाने की योजना है.

इन सचल स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रशिक्षित मनोचिकित्सक उपलब्ध होंगे, जोकि लोगों की तात्कालिक मानसिक स्वास्थ्य व मनोसामाजिक ज़रूरतों का ध्यान रखेंगे, और ज़रूरत होने वाले उन्हें आगे देखभाल के लिए कहेंगे.

आवश्यक सेवाओं पर ज़ोर

आर्मिनिया की आबादी लगभग 30 लाख है, और वहाँ पिछले कुछ दिनों में एक लाख से अधिक लोग पहुँचे हैं, जिसके मद्देनज़र राष्ट्रीय सेवाओं में व्यापक स्तर पर विस्तार की मांग की जा रही है.

इसके तहत, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों को मज़बूती प्रदान की जानी होगी. 

यूएन एजेंसी के प्रवक्ता जो लॉरी ने बताया कि नए स्कूलों की आवश्यकता होगी, जिन्हें बनाया जाना होगा. यह केवल एक कक्षा में चार या पाँच कुर्सियाँ रख देने की बात नहीं है. और यही बात अस्पताल के लिए कही जा सकती है.

उनके अनुसार, आर्मिनिया पहुँच रहे लोगों को आजीविका सहायता, जैसेकि नौकरी व नए घरों की आवश्यकता होगी, और मेज़बान समुदायों के लिए भी समर्थन सुनिश्चित करना होगा.