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म्याँमार: ‘अमानवीयता का भयावह कुरूप जारी है’, टर्क

म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में, विस्थापित जन, अपने अस्थाई आश्रयस्थलों की मरम्मत करते हुए.
© UNICEF/Naing Linn Soe
म्याँमार के राख़ीन प्रान्त में, विस्थापित जन, अपने अस्थाई आश्रयस्थलों की मरम्मत करते हुए.

म्याँमार: ‘अमानवीयता का भयावह कुरूप जारी है’, टर्क

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने म्याँमार की स्याह स्थिति का एक और आकलन मंगलवार को जारी किया है जिसमें देश की सेना द्वारा अपने ही नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचारों का विवरण दिया गया है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने कहा, “म्याँमार के लोग हर दिन, भयावह हमलों, खुलेआम मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना कर रहे हैं और अपनी आजीविकाओं व उम्मीदों को बिखरते हुए देख रहे हैं.”

वोल्कर टर्क ने यूएन मानवाधिकार परिषद में जानकारी प्रस्तुत करते हुए ये बातें बताईं. ग़ौरतलब है कि यूएन मानवाधिकार पर, दुनिया भर में मानवाधिकारों के संरक्षण व सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है.

सैनिक शासन का क्रूर दमन

मानवाधिकार प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि म्याँमार की सेना, मानवता के बुनियादी सिद्धान्तों और हिंसक गतिविधियों को तत्काल रोकने व मानवीय सहायता के लिए निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने के, सुरक्षा परिषद की बारम्बार की गई मांगों का, धड़ल्ले से असम्मान कर रही है.

उन्होंने बतया कि सेना के बेतुके हमलों , मानवाधिकारों का संकट और भी अधिक गहरा रहा है जिसमें आपस में गुँथे हुए मानवीय, राजनैतिक और आर्थिक प्रभाव हो रहे हैं, और उससे म्याँमार के लोगों पर असीम कष्टकारी असर हो रहा है.

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मुक्त प्रैस का दमन

उन्होंने मई 2023 में मोका तूफ़ान के दौरान, मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए, सेना द्वारा निर्बाध पहुँच नहीं दिए जाने पर भी चिन्ताएँ व्यक्त की हैं, विशेष रूप में राख़ीन प्रान्त में. उस प्रान्त में विधवा रोहिंज्या महिलाओं को, खाने-पीने के सामाने के लिए भीख मांगने पर मजबूर होने की ख़बरें मिली हैं.

सेना ने मृतकों की आधिकारिक संख्या 116 बताई थी, और इससे अलग संख्या बताने वाले किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी थी.

इस सन्दर्भ में एक सेना ने, राख़ीन प्रान्त में मोका तूफ़ान के बाद के हालात की रिपोर्टिंग करने वाले एक फ़ोटो पत्रकार को 20 वर्ष की क़ैद की सज़ा सुनाई. वर्ष 2021 के सैन्य तख़्तापलट के बाद से किसी पत्रकार को ये सबसे लम्बी क़ैद की सज़ा है.

विदेशी सूत्रों पर निर्भरता

वोल्कर टर्क ने सेना द्वारा आम लोगों के विरुद्ध अपनाए जा रहे तीन दमनकारी तरीक़ों की तरफ़ ध्यान दिलाया: हवाई हमले, सामूहिक हत्याएँ, और गाँव के गाँवों जला देना.

म्याँमार की सेना ने, अप्रैल 2022 और मई 2023 के दौरान, 687 हवाई हमले किए, जोकि उससे पहले के 14 महीनों के दौरान किए गए हवाई हमलों की संख्या से भी अधिक थे.

अमानवता अपने भीषणतम कुरूप में

वोल्कर टर्क ने बताया कि ज़मीनी अभियानों के कारण, 22 सामूहिक हत्याओं को अंजाम दिया गया, जिनके दस्तावेज़ भी मौजूद हैं. उनमें 10 या उससे अधिक लोगों कि हत्याएँ किया जाना भी शामिल है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने सैनिकों को कष्ट देने के भयावह तरीक़े प्रयोग करते हुए देखा जिनमें आम लोगों को भीषण दर्द देना, लोगों को जीवित जला देना, सिर काट देना, शरीर के अंग काट देना, बलात्कर और उससे भी कहीं अधिक.

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, “ये अमानवीयता का, भीषणतम कुरूप है.”

उन्होंने बताया कि पूरे के पूरे गाँवों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे 75 हज़ार से भी अधिक ढाँचे बर्बाद हुए, लोगों का विस्थापन हुआ और मानवीय सहायता आवश्यताओं में वृद्धि हुई.

नागरिक शासन ग़ायब

वोल्कर टर्क ने कहा कि म्याँमार में नागरिक शासन गुम हो गया है और सेना, देश में जान बूझकर प्रशासन व न्याय की बुनियादों को कमज़ोर बना रही है.

उन्होंने यूएन सुरक्षा परिषद से, इस स्थिति को, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) को सौंपने का आग्रह किया है.

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, 24 हज़ार 836 लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जिनमें से 19 हज़ार 264 अब भी हिरासत में हैं. सैन्य शासन द्वारा नियंत्रित अदालतों ने 150 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है, जिसमें निष्पक्ष मुक़दमा चलाए जाने और स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया का पालन किए जाने का अभाव है.