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जलवायु चुनौती की तुलना में 'बौनी' है कार्रवाई, महत्वाकाँक्षी समाधानों की पुकार

यूएन महासचिव द्वारा बुलाई गई जलवायु महत्वाकाँक्षा शिखर बैठक में देशों, व्यवसायों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में जुटे हैं.
© UN News/Anton Uspensky
यूएन महासचिव द्वारा बुलाई गई जलवायु महत्वाकाँक्षा शिखर बैठक में देशों, व्यवसायों और नागरिक समाज के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में जुटे हैं.

जलवायु चुनौती की तुलना में 'बौनी' है कार्रवाई, महत्वाकाँक्षी समाधानों की पुकार

जलवायु और पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आगाह किया कि जलवायु चुनौती के स्तर की तुलना में जलवायु कार्रवाई बौनी साबित हो रही है. उन्होंने बुधवार को न्यूयॉर्क में ‘जलवायु महत्वाकाँक्षा शिखर बैठक’ के दौरान अपने सम्बोधन में नेताओं, व्यावसायियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधिंयों से आगामी महीनों में लामबन्द प्रयासों का आहवान किया है.

जलवायु सम्बन्धी अनेक बैठकें हुई हैं, लेकिन यह सम्मेलन विशेष है क्योंकि ये एक अति महत्वपूर्ण राजनैतिक पड़ाव का प्रतिनिधित्व करता है: संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश एक मंच पर एकत्र होने और विश्व को अधिक न्यायसंगत, हरित, और सभी के लिए स्वच्छ बनाने के लिए, सामूहिक इच्छाशक्ति के साथ जुटे हैं.

इस बैठक का उद्देश्य देशों की सरकारों, व्यवसायों, नागरिक समाज समेत उन सभी हितधारकों के अनुभवों को सुनना है, जो जलवायु कार्रवाई में आगे बढ़कर पहले क़दम उठा रहे हैं. 

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यूएन प्रमुख के अनुसार, सिलसिलेवार जलवायु आपदाओं को टालने के लिए एक न्यायसंगत और समतापूर्ण ऊर्जा स्रोतों में बदलाव किया जाना होगा, बिना किसी देरी के.

उन्होंने चरम मौसम घटनाओं में आई तेज़ी की ओर ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि मानवता ने नर्क के दरवाज़ों को खोल दिया है. 

महासचिव ने क्षोभ प्रकट किया कि असहाय किसान बाढ़ में अपनी फ़सलों को बर्बाद होते देख रहे हैं, बढ़ते तापमानों के कारण गम्भीर बीमारियाँ फैल रही हैं और जंगलों में अभूतपूर्व आग लगने की घटनाओं की वजह से बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित हो रहे हैं.

यूएन प्रमुख ने मौजूदा जलवायु कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए सचेत किया कि फ़िलहाल मानवता वैश्विक तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की ओर बढ़ रही है. 

“हमारा ध्यान यहाँ जलवायु समाधानों पर है – और हमारा यह काम तत्काल किया जाना है.”

उन्होंने कहा कि लेकिन ऐसा नहीं है कि भविष्य तय हो चुका है. उनके अनुसार पैरिस जलवायु समझौते के  अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित अब भी रखा जा सकता है.

उन्होंने जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पक्षों को सम्बोधित करते हुए कहा कि “हम अब भी स्वच्छ वायु, हरित रोज़गारों, और सर्वजन की पहुँच के भीतर स्वच्छ ऊर्जा की दुनिया का निर्माण कर सकते हैं.”

बदलाव के लिए उपाय

यूएन प्रमुख ने एक जलवायु एकजुटता समझौते का उल्लेख किया, जिसके तहत मुख्य उत्सर्जक देशों की जवाबदेही को तय किया जाना होगा. 

साथ ही, मौजूदा जलवायु संकट पर पार पाने के लिए सम्पन्न देशों द्वारा उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए समर्थन प्रदान करना होगा. 

जलवायु कार्रवाई में तेज़ी लाने पर केन्द्रित ‘Acceleration Agenda’ में सरकारों से त्वरित गति से क़दम बढ़ाने का आग्रह किया गया है.

यूएन प्रमुख ने जलवायु न्याय सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया, और माना कि विश्व के निर्धनतम देश इस संकट के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं, मगर उसके विषमतापूर्ण प्रभावों को झेल रहे हैं. 

जलवायु कार्रवाई की ओर 

यूएन प्रमुख ने कहा कि वार्षिक जलवायु सम्मेलन, कॉप28 के दौरान जलवायु हानि व क्षति कोष के संचालन को अन्तिम रूप देना होगा, और विकसित देशों को 100 अरब डॉलर के संकल्प को पूरा करना होगा. 

साथ ही, हरित जलवायु कोष को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना, अनुकूलन के लिए धनराशि को दोगुना किया जाना, और सर्वजन को समय पूर्व चेतावनी प्रणाली के दायरे में लाना अहम है. 

‘Acceleration Agenda’ में व्यवसायों और वित्तीय संस्थाओं से वास्तविक नैट शून्य कार्बन उत्सर्जन को हासिल करने के मार्ग पर बढ़ने का आग्रह किया गया है. 

इसके लिए, उत्सर्जन में कमी लाने की योजनाओं में पारदर्शिता व विश्वसनीयता पर ध्यान केन्द्रित करना होगा.

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि न्यूयॉर्क में बैठक कक्षों से बाहर आकर ये क़दम उटाए जाने होंगे और ऐसा किया जाना सम्भव है.