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महासभा को सम्बोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंतोनियो गुटेरेश.

UNGA78: 21वीं सदी के लिए, बहुपक्षवाद को नए सिरे से आकार दिए जाने की पुकार

UN News/Anton Upenskiy
महासभा को सम्बोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासचिव, एंतोनियो गुटेरेश.

UNGA78: 21वीं सदी के लिए, बहुपक्षवाद को नए सिरे से आकार दिए जाने की पुकार

यूएन मामले

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन महासभा के वार्षिक उच्चस्तरीय खंड को सम्बोधित करते हुए आग्रह किया है कि 21वीं सदी की राजनैतिक व आर्थिक वास्तविकताओं के आधार पर बहुपक्षीय संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार किया जाना होगा. उन्होंने सचेत किया कि जब तक मौजूदा संस्थाएँ, वर्तमान जगत को परिलक्षित नहीं करेंगी, तब तक समस्याओं के कारगर समाधानों को ढूंढ पाना कठिन होगा.

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में यूएन महासभा के 78वें सत्र में उच्चस्तरीय बहस में हिस्सा लेने के लिए विश्व भर से नेतागण पहुँच रहे हैं. 

यूएन प्रमुख ने महासभा की जनरल डिबेट से पहले अपने संगठन के कामकाज की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि अधीर हो रही दुनिया को केवल संकल्प व समझौते के ज़रिये ही बचाया जा सकता है. 

उन्होंने विश्व नेताओं को आगाह किया कि दुनिया दरक रही है, भूराजनैतिक तनाव बढ़ रहे हैं, वैश्विक चुनौतियाँ उभर रही हैं और इनसे निपटने के लिए हम एक साथ आने में असमर्थ हैं. 

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लीबिया में बाढ़ से हुई तबाही से अपने सम्बोधन की शुरुआत करते हुए ध्यान दिलाया कि नौ दिन पहले ही, डेरना शहर में अनेक वैश्विक चुनौतियाँ भयावह ढंग से एक साथ नज़र आईं, जहाँ अभूतपूर्व, विकराल बाढ़ की चपेट में आने से हज़ारों लोगों की मौत हो गई.

“वे अनेक बार पीड़ा का शिकार हो चुके हैं. वर्षों के हिंसक टकराव के पीड़ित. जलवायु अराजकता के पीड़ित. नज़दीक व दूर स्थित उन नेताओं के पीड़ित, जो उनके लिए शान्ति मार्ग नहीं ढूंढ सके.” 

उन्होंने कहा कि डेरना के लोग इसी बेपरवाही के केन्द्र में जीते रहे और मारे गए.

महासचिव गुटेरेश ने क्षोभ प्रकट किया कि डेरना, विश्व में मौजूदा हालात की एक दुखद तस्वीर है – असमता, अन्याय, और हमारे बीच में मौजूद चुनौतियों का सामना ना कर पाने की क्षमता की बाढ़.

दृढ़ता पर बल

यूएन महासचिव ने कहा कि लाल सागर में पर्यावरणीय तबाही की रोकथाम करने में संयुक्त राष्ट्र के प्रयास सफल रहे हैं, जोकि उसके संकल्प व प्रभावीपन का परिचायक हैं.

“जब कोई अन्य यह ना कर सका, या ना करता, यूएन की दृढ़ता ने इस कार्य को पूर्ण किया.” 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अनेकानेक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, संकल्प व दृढ़ता की यही भावना दुनिया को आगे बढ़ा सकती है.

इस क्रम में, उन्होंने विश्व नेताओं से एकता, शान्ति, मानवाधिकारों और सर्वजन के लिए टिकाऊ विकास के प्रति संकल्प दर्शाने का आहवान किया.

“आइए, हम साझा भलाई के लिए एक साथ आने का संकल्प लें.”

दरक जाने का जोखिम

महासचिव गुटेरेश ने समकालीन मुद्दों से निपटने के लिए मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने कहा कि दुनिया में अनेक बदलाव आए हैं, लेकिन उनके अनुरूप अन्तरराष्ट्रीय संस्थाएँ नहीं बदली हैं, और इस वजह से वे समाधान के बजाय, समस्या का ही हिस्सा बन गए हैं.

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि सुधार का कोई विकल्प नहीं है.

मुख्यालय यूएन महासचिव ने यूएन चार्टर के आरम्भिक शब्दों का उल्लेख करते हुए ध्यान दिलाया कि इनमें युद्ध की बुराई का अन्त करने के लिए प्रण लिया गया है.

“जब देश इन संकल्पों को तोड़ते हैं, तो वे हर किसी के लिए असुरक्षा भरी दुनिया को उत्पन्न करते हैं.” 

उनके अनुसार, यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के विश्व में हर किसी के लिए गम्भीर नतीजे हुए हैं. इसलिए शान्ति स्थापना के लिए बिना रुके प्रयास करते रहने होगा, ताकि यूक्रेन और उससे इतर आमजन की पीड़ा का अन्त किया जा सके.

बढ़ती पीड़ा, घटता समर्थन

यूएन प्रमुख ने सूडान से लेकर हेती और अफ़ग़ानिस्तान से म्याँमार तक हिंसक टकरावों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बढ़ती मानवीय पीड़ा की ओर ध्यान आकृष्ट किया.

उन्होंने कहा कि आवश्यकताएँ बढ़ रही हैं, लेकिन सहायता धनराशि में कमी आ रही है, और मानवीय राहत अभियानों में कटौती के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने देशों से वैश्विक मानवीय राहत अपील के लिए आगे बढ़ कर वित्तीय सहायता प्रदान करने की अपील की है.

एंतोनियो गुटेरेश ने यूएन चार्टर में सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने पर केन्द्रित पुकार का उल्लेख किया, और उसे टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और वैश्विक विषमता से निपटने से जोड़ा.

जलवायु अराजकता से लड़ाई  

महासचिव गुटेरेश ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने की आवश्यकता को रेखांकित किया, जोकि उनके अनुसार नए रिकॉर्ड ध्वस्त कर रही है. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई के लिए किसी अन्य की प्रतीक्षा करने या किसी दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराने के बजाय, स्वयं आगे बढ़कर कार्रवाई करनी होगी.

यूएन प्रमुख ने जलवायु एकजुटता समझौते का ज़िक्र किया, जोकि बड़े उत्सर्जक देशों द्वारा उत्सर्जन में कमी लाने के लिए उपाय किए जाने पर केन्द्रित है, और साथ ही सम्पन्न देशों द्वारा उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को सहायता प्रदान की जानी होगी.

साथ ही, उन्होंने जीवाश्म ईंधन पर सब्सिडी ख़त्म करने, कार्बन की क़ीमत तय करने, और देशों द्वारा जलवायु वित्त पोषण के वादों को पूरा किए जाने को अहम बताया.