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म्याँमार: मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने युद्धापराध मामलों पर जताई चिन्ता

म्याँमार की एक बस्ती का दृश्य.
Unsplash/Ajay Karpur
म्याँमार की एक बस्ती का दृश्य.

म्याँमार: मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने युद्धापराध मामलों पर जताई चिन्ता

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त स्वतंत्र मानवाधिकार जाँचकर्ताओं ने मानवाधिकार परिषद को बताया है कि म्याँमार में उग्र होती हिंसा के बीच आम लोग, सैन्य नेतृत्व द्वारा अंजाम दिए जा रहे भयावह अपराधों की पीड़ा भुगत रहे हैं.

म्याँमार के लिए जाँच-पड़ताल टीम के प्रमुख निकोलस कुमजियन के अनुसार, हाल के महीनों में युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों की आवृत्ति और गहनता केवल बढ़ी है. 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने 2018 में म्याँमार जाँच टीम की स्थापना की थी, और उसके अगले वर्ष इस दल ने अपना कार्य आरम्भ किया.

मानवाधिकार विशेषज्ञ ने जिनीवा में मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि बिना किसी सोच-विचार के हवाई बमबारी और ताबड़तोड़ गोलाबारी की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप बच्चों समेत मासूम लोग मारे जा रहे हैं.

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“हमने बन्दी बनाए गए लड़ाकों व आम नागरिकों को मौत की सज़ा दिए जाने और घरों व गाँवों को जानबूझकर जलाए जाने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी देखी है.”

निकोलस कुमजियन ने यातना, यौन हिंसा व गिरफ़्तारी समेत मानवाधिकार उल्लंघन के सिलसिलेवार मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यथोचित प्रक्रिया व युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही का अभाव है, विशेष रूप से म्याँमार की सेना के लिए. 

इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने म्याँमार में 1 फ़रवरी 2021 को तख़्तापलट करने वाले सैन्य शासकों से आम नागरिकों की आकाँक्षाओं को सुनने का आग्रह किया था. 

उन्होंने कहा कि सभी राजनैतिक बन्दियों को रिहा किया जाना होगा, और एक लोकतांत्रिक शासन की दिशा में लौटने का दरवाज़ा खोलना होगा.

साक्ष्य एवं जानकारी

जाँच-पड़ताल टीम के प्रमुख निकोलस कुमजियन ने मानवाधिकार परिषद को बताया कि म्याँमार में कार्य आगे बढ़ाने के लिए उनकी अब भी इलाक़ों तक पहुँच नही है.

“जानकारी व पहुँच प्रदान करने के लिए बार-बार किए गए अनुरोधों को सैन्य प्रशासन ने नज़रअन्दाज़ कर दिया है.”

योरोपीय संघ, फ़िनलैंड, कैनेडा, और कोस्टा रीका समेत अन्य प्रतिनिधिमंडलों ने इस हिंसा की निन्दा की है, जबकि अन्य देशों ने सैन्य नेतृत्व से देश में जाँच टीम की पहुँच सुनिश्चित करने की अपील की है.

मानवाधिकार परिषद के 47 सदस्य देशों में से चीन, ईरान और रूस ने बाहरी हस्तक्षेप के राष्ट्रीय के सम्बन्ध में राष्ट्रीय सम्प्रभुता के सिद्धान्त को रेखांकित किया है.  

जाँच दल ने बताया है कि म्याँमार में जाँच कार्य आगे बढ़ाने की अनुमति ना दिए जाने के बावजूद, प्रत्यक्षदर्शियों और आधुनिक टैक्नॉलॉजी के ज़रिये अभूतपूर्व स्तर पर जानकारी जुटाई गई है.  

निकोलस कुमजियन का कहना है कि इन साक्ष्यों को अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय, अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के साथ-साथ, अर्जेन्टीना के साथ भी साझा किया गया है, जहाँ रोहिंज्या समुदाय के विरुद्ध अपराधों के मामलों में अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक प्रक्रिया जारी है. 

प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदाय

इस जाँच टीम द्वारा हिंसा के उन मामलों की भी जाँच की जा रही है, जिनके कारण 2016 से 2017 के दौरान, रोहिंज्या समुदाय का विस्थापन हुआ था. 

जाँच टीम प्रमुख ने बताया कि बड़े पैमाने पर रोहिंज्या समुदाय के गाँवों को जलाए जाने, और आम नागरिकों पर हमले किए जाने की घटनाओं पर साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जोकि उनकी भयावहता को दर्शाते हैं.

पिछले महीने, यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने म्याँमार की सेना द्वारा छेड़े गए अभियान की पृष्ठभूमि में मुख्यत: मुसलमान अल्पसंख्यक समुदाय के विस्थापन के छह साल पूरे होने पर न्याय सुनिश्चित किए जाने की पुकार लगाई थी.   

इस अभियान के दौरान क़रीब 10 हज़ार रोहिंज्या पुरुषों, महिलाओं, बच्चों और नवजात शिशुओं के मारे जाने, 300 से अधिक गाँवों को जला कर खाक किए जाने की आशंका है. क़रीब सात लाख से अधिक रोहिंज्या लोगों ने जान बचाने के लिए भागकर बांग्लादेश में शरण ली थी.