यूएन महासभा के 78वें सत्र का उदघाटन, पारस्परिक सहयोग में निहित लाभ पर बल
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र के समापन के साथ ही मंगलाव को 78वां सत्र आरम्भ हुआ है, जिसके अवसर पर बहुपक्षवादी सहयोग की अहमियत को रेखांकित किया गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र के लिए अध्यक्ष कसाबा कोरोसी ने सचेत किया कि भूराजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं के इस दौर में, देशों में पास्परिक सहयोग परम आवश्यक है.
यूएन महासभा का 77वाँ सत्र, पिछले वर्ष औपचारिक रूप से 13 सितम्बर को आरम्भ हुआ था. इस सत्र के दौरान, कई अहम उच्चस्तरीय बैठकों का आयोजन हुआ, जिनमें मार्च 2023 में यूएन जल सम्मेलन भी था, जहाँ जल संरक्षण के लिए एक कार्रवाई योजना को पारित किया गया.
इसके अलावा, 77वें सत्र के दौरान आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सर्वजन के लिए न्याय, समावेशी समाजों के निर्माण, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और टिकाऊ खपत व उत्पादन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
महासभा प्रमुख कसाबा कोरोसी ने अपने समापन सम्बोधन में संयुक्त राष्ट्र के तीन स्तम्भों का उल्लेख किया: शान्ति व सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार. साथ ही, उन्होंने परमाणु हथियारों की दौड़ पर विराम लगाने और परमाणु अप्रसार पर बल दिया.
कसाबा कोरोसी ने महासभा और सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र के अहम निकायों में सुधार व बदलाव की आवश्यकता का उल्लेख किया. “वर्ष 1952 में, विश्व के पहले यात्री जेट विमान में 36 यात्री थे. यह प्रौद्योगिकी विकास में एक बड़ी सफलता थी.”
“मगर, इसका यह अर्थ नहीं कि हम इसका इस्तेमाल, मंगल तक पहुँचने में कर सकते हैं...समय बदल रहा है, और इस संगठन में भी उसके साथ बदलाव आने होंगे.”
व्यावहारिक समाधानों पर ज़ोर
यूएन उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की ओर से सम्बोधित करते हुए, पिछले एक वर्ष में 77वें सत्र के अध्यक्ष कसाबा कोरोसी के कुशल नेतृत्व के लिए उनकी सराहना की.
उन्होंने महासभा में सतत कूटनीति पर ध्यान केन्द्रित रखने, सम्वाद व बहस को बढ़ावा देने और आमजन व पृथ्वी के लिए व्यावहारिक समाधानों की दिशा में प्रयास किए जाने की प्रशंसा की.
यूएन उपप्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि महासभा को बहुपक्षवाद साबित करने वाला मंच बनाना होगा, सदस्य देशों के बीच भरोसे, जुड़ाव व एकजुटता निर्माण के लिए.
साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा विश्व भर में आम लोगों व समुदायों को लाभान्वित करने वाले समाधानों को आकार दिया जा सके.
इसके बाद मंगलवार दोपहर, यूएन महासभा के 78वें सत्र का उदघाटन हुआ, जिसमें उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने ध्यान दिलाया कि जनरल ऐसेम्बली, हमारी साझा मानवता और शान्ति, टिकाऊ विकास व मानवाधिकारों के लिए हमारे साझा संकल्प को दर्शाती है.
उन्होंने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से आशावादी बने रहने और एक साथ मिलकर टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति सुनिश्चित करने का आहवान किया.
वैश्विक एकजुटता
यूएन महासभा के 78वें सत्र के लिए अध्यक्ष डेनिस फ़्राँसिस ने अपने उदघाटन सम्बोधन में अपनी चार महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं का उल्लेख किया: शान्ति, समृद्धि, प्रगति व सततता.
उन्होंने माना कि दुनिया के समक्ष इस समय अनेक जटिल चुनौतियाँ हैं, और जलवायु परिवर्तन, हिंसक टकराव व निर्धनता के कारण शान्ति, दूर हो रही है और भूराजनैतिक दरारों के कारण, बहुपक्षवादी व्यवस्थाओं के लिए सन्देह पनप रहे हैं.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मुख्य नीतिनिर्माता निकाय के तौर पर, यह सुनिश्चित करना महासभा की विशेष ज़िम्मेदारी है कि हमारे प्रयासों की आधारशिला एक स्फूर्त, बहुपक्षवादी व्यवस्था बनी रहे, जोकि यूएन चार्टर के उल्लिखित मूल्यों व सिद्धान्तों के अनुरूप हो.
इस पृष्ठभूमि में, उन्होंने महासभा के सुरक्षा परिषद वीटो पहल का ज़िक्र किया, जोकि वीटो अधिकार के इस्तेमाल के सम्बन्ध में पारदर्शिता व जवाबदेही की दिशा में बढ़ाया गया एक क़दम है.
यूएन महासभा के नए प्रमुख ने हिंसक टकरावों, हिंसक टकराव के बाद उपजे हालातों से जूझ रहे देशों के लिए आवश्यकता अनुरूप समाधान ढूंढे जाने की आवश्यकता पर बल दिया.
इसके समानान्तर, डेनिस फ़्राँसिस ने स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ क़दम बढ़ाए जाने और जलवायु अनुकूलन के लिए वित्त पोषण को और अधिक सुलभ व पहुँच के भीतर बनाए जाने की पैरवी की.
डेनिस फ़्राँसिस ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों को साकार करने के नज़रिये से आगामी एसडीजी शिखर बैठक को प्रगति में तेज़ी लाने का अवसर बताया, जोकि उनके अनुसार महासभा के इस सत्र के एजेंडा की दिशा तय करेगी.
उनके अनुसार, कोविड-19 से उपजी स्वास्थ्य चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सहनसक्षम स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के निर्माण के लिए वैश्विक एकजुटता व सहयोग की दरकार है.
साथ ही, उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता हानि से तत्काल निपटे जाने का आग्रह करते हुए परिवर्तनकारी जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया है.