इराक़: गोलपोस्ट पर विजय हासिल करती लड़कियाँ
अगस्त में दुनिया भर में लगभग दो अरब लोगों ने महिला वर्ल्ड कप का फाइनल देखा. वहीं इराक़ के मोसुल शहर में टिगरिस नदी के तट पर कुछ किशोरियों का समूह अपने परिवारों के साथ, इन्टरनेट पर यह मैच दिखाने वाली साइटों को खंगाल रहा था. भले ही स्क्रीन पर तस्वीरें धुँधली नज़र आ रही थीं, लेकिन उन सभी को अपना लक्ष्य एकदम स्पष्ट नज़र आ रहा था – एक दिन मोसुल फुटबॉल क्लब भी इसी खेल के मैदान में दिखाई देगा.
13 वर्षीय रमा, 14 वर्षीय ज़ुबैदा और 15 वर्षीय हदील की कहानी विस्थापन और हानि की कहानी है. एक समय था जब उनका शहर मोसुल, मौत, विनाश और निराशा का पर्याय हुआ करता था.
उनके जैसे कई परिवार, वर्षों तक विस्थापित रहने के बाद मोसुल लौटकर आए हैं और अब अपने बच्चों के लिए एक उज्जवल भविष्य की चाहत रखते हैं. बाज़ार, स्कूल, सामुदायिक केन्द्र, सभी के पुनर्निर्माण या पुनर्बहाली का काम जारी है. बरसों का अपना दर्द और शोक पीछे छोड़कर, यह समुदाय अपनी सदियों पुरानी परम्पराओं और संस्कृति को पुनर्जीवित करने में लगा है.
मोसुल के अल अमाल फुटबॉल क्लब में फुटबॉल के अभ्यास के लिए तैयार होते समय रमा बताती हैं, “हम लड़के नहीं हैं. मोसुल में, महिलाएँ और लड़कियाँ एक-साथ नहीं खेलते. यह सामान्य बात नहीं है. मेरी माँ को डर लगता था कि मुझे गिरकर चोट लग जाएगी. लेकिन आख़िकार उन्होंने हाँ कर दी. आज वो ही मेरी सबसे बड़ी प्रशंसक हैं.”
टीम का हिस्सा, शहर की कई अन्य लड़कियों ने भी पहले-पहले परिवार व रिश्तेदारों से इसी हिचकिचाहट का सामना किया. लकिन बाद में हिदायतों के साथ अनुमति मिल ही गई. आज इनमें से ज़्यादातर लड़कियों को पूरे समुदाय का अटल समर्थन प्राप्त है.
‘स्थानीय हस्तियाँ’
पर्वतारोहण या गाड़ी चलाने जैसी जैण्डर पूर्वाग्रह तोड़ती समस्त गतिविधियों में माहिर, हदील बताती हैं, “जब भी हमारा मैच होता है, लोग हमें खेलता देखने के लिए आते हैं. हमारे स्कूल के प्रधानाध्यापक फेसबुक पर नियमित रूप से मैच के बारे में पोस्ट करते है – किसने कितना स्कोर किया, कौन जीता और कौन अच्छा खेला. मेरे अच्छा स्कोर करने पर मेरे पिता बहुत ख़ुश होते हैं और मुझे बेहतर खेलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.”
यह लड़कियाँ, स्थानीय रूप से मशहूर हस्तियाँ बन चुकी हैं और अन्य किशोरियों के लिए प्रेरणा स्रोत.
मोसुल में इस फुटबॉल टीम की शुरूआत, सतत शान्ति फाउण्डेशन (SPF) की एक परियोजना के तहत, शहाद ख़लील के नेतृत्व में 2021 में की गई थी.
29 वर्षीय शहाद ख़लील और उनकी टीम ने स्कूली शिक्षकों, सामुदायिक नेताओं और अभिभावकों से बातचीत करके, लड़कियों को Sports for Peace नामक इस परियोजना में भाग लेने के लिए तैयार किया. SPF ज़मीनी स्तर के उन 22 संगठनों में से एक है, जो वासल सिविल सोसाइटी फण्ड के ज़रिए, इराक़ में अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) द्वारा सामुदायिक स्तर की परियोजनाओं को डिज़ाइन एवं कार्यान्वित करके, अस्थिरता, विस्थापन व हिंसक उग्रवाद के चालकों को सम्बोधित करने की कोशिश कर रहा है.
‘फुटबॉल ने हमें साझा मक़सद दिया’
इस परियोजना के पीछे SPF का दृष्टिकोण, युवा लड़के और लड़कियों को खेल-कूद में हिस्सा लेने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करते हुए जैण्डर पूर्वाग्रहों को तोड़ना और युवजन के बीच सम्वाद व सामुदायिक सहनसक्षमता बढ़ाना है. इसका लक्ष्य है, हिंसक उग्रवाद व उसके ख़तरों से बचाव करना.
ज़ुबैदा कहती हैं, “सबसे अहम सबक़ है एकजुट होकर खेलना. जब हमने सबसे पहले टीमों में खेलना शुरू किया तो हमे समझ नहीं आता था कि मिलकर किस तरह खेलें, जिससे आपसी तनाव बढ़ जाता था. फुटबॉल ने हमें आपसी मतभेदों का हल करने का आधार प्रदान किया जिससे हम एक टीम के तौर पर अधिक मज़बूत हुए. अब हम खेल के मैदान पर छा जाते हैं.”
15 टीमें, जिनमें हर एक में 10 लड़कियाँ है, और कुल 20 महिला कोच, पिछले दस महीने में अपने फुटबॉल प्रेम के कारण एकजुट हुए हैं. वे साथ मिलकर प्रशिक्षण लेते हैं, आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं, और अन्य युवा लड़कियों को खेल-कूद में हिस्सा लेने की प्रेरणा देते हैं.
हिसंक उग्रवाद के प्रति सम्वेदनशील
इराक़ की 4 करोड़ 35 लाख की आबादी में से 60 फ़ीसदी लोग, 25 से कम आयुवर्ग के हैं. इनमें से कईयों ने अपने देश को चरम हिंसा, संघर्ष व अस्थिरता के दौर से गुज़रते देखा है. फिर भी , वो राष्ट्रीय शान्ति व सुलह के प्रयासों में सीमित भूमिका ही निभा पा रहे हैं.
युवजन के सक्रिय सम्वाद व भागीदारी के बिना, उन्हें हिंसक उग्रवाद के प्रति सम्वेदनशील बनाने वाले कारकों से निपटने के प्रयास अधूरे रह जाएँगे.
ख़लील कहते हैं, “ख़ासतौर पर युवा महिलाओं और लड़कियों के लिए यह बहुत अहम हैं. यह मानना ग़लत है कि युवा लड़कियों या महिलाओं पर हिंसक उग्रवाद का प्रभाव नहीं पड़ता या उन्हें हिंसक कार्रवाई करने के लिए डरा-धमकाकर मजबूर किया जाता है. हम जानते हैं कि दाएश गुट ने, हाशिए पर धकेले कमज़ोर वर्ग की महिलाओँ और लड़कियों की ख़राब आर्थिक स्थिति व समान अवसरों की कमी का फ़ायदा उठाकर ही, मोसुल और उसके आसपास अपने आतंक का शासन फैलाया था.
‘इराक़ के युवजन में जुनून है’
टीम निर्माण और विचार विनिमय के ज़रिए, ‘स्पोर्ट्स फ़ॉर पीस’ का उद्देश्य, मोसुल में लड़कियों की अगली पीढ़ी को पूर्वाग्रहों को चुनौती देने, सामाजिक अपेक्षा अस्वीकार करने और शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व की पैरोकारी करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करना है. परियोजना को छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया है और पूरे मोसुल में 10 टीमों में 150 से अधिक लड़कियाँ एक-साथ काम जारी रखेंगी.
आईओएम के वासल सिविल सोसाइटी फण्ड द्वारा इसी तरह की पहलों को फ़ालुजाह और हालबजा में भी कार्यान्वित किया गया है, जहाँ टूर्नामेंट में खेलने और सामाजिक एकजुटता पर सम्वाद को बढ़ावा देने के लिए, स्थानीय संगठन विभिन्न समुदायों के लोगों को विरासत स्थलों के दौरे पर लाते हैं.
आईओएम इराक़ के मिशन प्रमुख, जियोर्जी गिगौरी ने कहा, "इराक़ी युवजन, अपने समुदाय के लिए बेहतर भविष्य बनाने हेतु उत्सुक एवं प्रेरित हैं. मोसुल महिला फुटबॉल क्लब, इराक़ की अगली पीढ़ी के दृढ़ संकल्प एवं साहस का प्रतीक है, और हमें इन प्रयासों में निवेश करने और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, ख़ासतौर पर जब इन प्रयासों से लोग, एक उज्जवल भविष्य की दिशा में प्रयत्न करने हेतु एकजुट होते हैं."
अल अम्मल फुटबॉल क्लब में मैच पूरे ज़ोरों पर है. ज़ुबैदा ने दूसरे चरण में पैनल्टी किक मारी. हदील और रमा भीड़ के साथ चिल्लाकर हौसला बढ़ा रही हैं. रमा ने कहा, "मैं दस साल में एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी बन जाऊँगी, क्योंकि कुछ भी असम्भव नहीं है. इंशाअल्लाह, एक दिन मैं अपने देश के लिए ज़रूर खेलूँगी.”
नई पीढ़ी की स्पष्टवादिता दिखाते हुए हदील ने कहा, "आख़िर, आप केवल एक बार ही जीते हैं, इसलिए, हमें इस समय का उपयोग मौज-मस्ती के लिए करना चाहिए, और अपने-आप को दिलचस्प एवं रोमांचक गतिविधियों में व्यस्त रखना चाहिए."