भारत: स्थाई भविष्य के लिए हरित कौशल पर बल
भारत में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर, हरित रोज़गार क्षेत्र में श्रमबल बढ़ाने हेतु, महिलाओं को ‘हरित रोज़गार’ में कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है. इससे न केवल महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य प्राप्त हो रहा है, बल्कि आर्थिक उन्नति में भी योगदान मिल रहा है.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सुहानी सुबह, 23 वर्षीय त्रिधा त्रिपाठी काम के लिए निकली हैं. अपने कार्यालय के चारों ओर लगे सौर पैनलों की पंक्ति की ओर इशारा करते हुए वो बताती हैं,"बहुत लोग सोचते हैं कि सौर पैनल गर्म मौसम में बेहतर काम करेंगे, लेकिन आश्चर्य की बात है कि अधिक तापमान में उनका प्रदर्शन ख़राब रहता है."
एक प्रशिक्षित सौर तकनीशियन, त्रिधा नवीकरणीय ऊर्जा पेशेवर का काम सीख रही हैं. तेज़ी से बदलती दुनिया में, जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से परे, हरित अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव लाते हुए, युवाओं को सशक्त बनाने के लिए हरित कौशल महत्वपूर्ण हैं.
हाल के अनुमानों से पता चलता है कि युवाओं की रोज़गार ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अगले 15 वर्षों में वैश्विक स्तर पर 60 करोड़ रोज़गार पैदा करने होंगे.
टिकाऊ विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता, प्रकृति-आधारित आजीविका और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में हरित कौशल, युवजन को समृद्ध करियर का निर्माण करते हुए एक स्थाई भविष्य में योगदान देने में सक्षम बनाने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं.
यूएनडीपी, जापान सरकार के समर्थन से, हरित रोज़गार के क्षेत्र में श्रमबल बढ़ाने के लिए ‘हरित रोज़गार के लिए कौशल परामर्श संस्था (SCGJ) के साथ साझेदारी कर रहा है. कौशल परिषद, उद्योग, शिक्षा और नीति के बीच एक समन्वयक के रूप में काम करते हुए उभरते हरित उद्योगों की कौशल आवश्यकताओं को पूरा करता है.
अवरोधों से निपटने के प्रयास
कार्यक्रम के एक हिस्से के तहत, अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 4 उभरती भूमिकाओं के लिए पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए, जिसमें इलैक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के बुनियादी ढाँचे, सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) और सौर तापीय उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
इसके बाद, इन मॉड्यूल का उपयोग भारत के 5 राज्यों के 1,000 व्यक्तियों को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया.आमतौर पर, कई वजहों से इन प्रशिक्षणों में महिलाओं की संख्या कम होती है, जिनमें वित्तीय और सामाजिक बाधाएँ प्रमुख हैं, जो उनके कौशल व रोज़गार हासिल करने के आड़े आती हैं.
इससे निपटने के लिए, प्रशिक्षण में भाग लेने वाली प्रत्येक महिला को 2,500 रुपये (30 अमेरिकी डॉलर) का प्रोत्साहन दिया गया.
त्रिधा बताती हैं, "इससे मुझे अपने परिवार को इस प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए मनाने में मदद मिली, क्योंकि उन्हें इसके लिए यात्रा व भोजन जैसे खर्चों की चिन्ता करने की ज़रूरत नहीं थी."
इस तरह के समर्थन से न केवल शामिल होने वाली, बल्कि प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं की संख्या में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है. प्रमाणित 1,000 प्रतिभागियों में से, 29% महिलाएँ थीं, जबकि उद्योग का औसत 10-15% था, जिससे सही समर्थन व मंच प्रदान किए जाने पर देश की आर्थिक वृद्धि और बदलाव की हरित यात्रा में महिलाओं के योगदान की अपार क्षमता स्पष्ट होती है.
45-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद, त्रिधा को मध्य प्रदेश में वाणिज्यिक और आवासीय सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में विशेषज्ञता वाले उद्यम, Saitech Energy Space Systems में सोलर पीवी इंस्टालर के रूप में काम मिला. अपने 4 महीने के छोटे से कार्यकाल में, त्रिधा ने सीखने की शानदार क्षमता दिखाई है, और आज वह संगठन के काम के अन्य क्षेत्रों, जैसेकि इन्वेंट्री प्रबंधन व क्लाइंट हैंडलिंग में योगदान दे रही है.
महिलाओं की भागीदारी
अधिक महिलाओं के गैर-पारम्परिक भूमिकाओं वाले कार्यबल में शामिल होने से कई सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याओं का समाधान होता है.
त्रिधा बताती हैं, “बचपन से ही मुझे यह विश्वास दिलाया गया कि विज्ञान और इंजीनियरिंग की भूमिकाएँ पुरुषों के लिए ही उचित हैं. उच्च शिक्षा के लिए फ़ैसला लेते समय भी मुझे वाणिज्य विषय ही चुनना पड़ा. लेकिन इस प्रशिक्षण के केवल डेढ़ महीने में मुझे अहसास हो गया कि यह कुछ ऐसा है जिसे मैं आसानी से कर सकती हूँ. इसके अलावा, अब परियोजना स्थलों की दूर-दराज़ यात्रा को लेकर भी मेरा परिवार अधिक खुल गया है, और मेरी पेशेवर यात्रा को देखकर, वो मेरे काम पर गर्व महसूस करते हैं.
''हरित व नीले नीति उपायों के कार्यान्वयन के ज़रिए, 2030 तक वैश्विक स्तर पर युवाओं के लिए अतिरिक्त 84 लाख रोज़गार पैदा किए जा सकते हैं. लैंगिक समानता और टिकाऊ विकास के लिए युवा महिलाओं को हरित कौशल में प्रशिक्षण देना आवश्यक है. नवीकरणीय ऊर्जा, संरक्षण और स्थिरता पद्धति जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को शामिल करके, हम उनकी वास्तविक क्षमता का उपयोग करते हैं, दृष्टिकोण को व्यापक बनाने व नवाचार प्रोत्साहित करने में सहायक होते हैं.
यह समावेशन, पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक प्रभावी एवं समग्र समाधान लाने में सहायक होता है. इसके अलावा, महिलाएँ घरेलू और सामुदायिक निर्णय लेने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं. उन्हें हरित कौशल प्रदान करके, हम ज़मीनी स्तर पर टिकाऊ प्रथाएँ अपनाने को बढ़ावा दे सकते हैं.
एक सर्किट बोर्ड का निरीक्षण करते हुए, त्रिधा कहती हैं,“बचपन में मुझे लगता था कि विशाल, जटिल व मशीनों वाले बिजली स्टेशनों से बिजली पैदा होती है. यह देखकर मुझे आज भी आश्चर्य होता है कि इतना छोटा उपकरण ऐसा कैसे कर सकता है.” आख़िरकार, ये छोटे बदलाव ही हैं, जो बड़े परिवर्तनों का कारण बनते हैं.
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