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यमन: समावेशी शान्ति स्थापना के लिए ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत पर बल

यमन के दार साद में विस्थापित लोगों के लिए एक शिविर में साफ पानी लाती एक बच्ची.
© UNOCHA/Mahmoud Fadel-YPN
यमन के दार साद में विस्थापित लोगों के लिए एक शिविर में साफ पानी लाती एक बच्ची.

यमन: समावेशी शान्ति स्थापना के लिए ठोस क़दम उठाने की ज़रूरत पर बल

शान्ति और सुरक्षा

संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को सुरक्षा परिषद में जानकारी देते हुए कहा कि युद्धग्रस्त यमन में जारी राजनैतिकआर्थिक और मानवीय चुनौतियों के बीच, शान्ति की दिशा में प्रगति की तत्काल आवश्यकता है. 

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने यमन के भीतर और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपने मध्यस्थता प्रयासों के बारे में जानकारी दी. वहीं, संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता मामलों के समन्वय कार्यालय – OCHA की एक पदाधिकारी ऐडेम वोसोर्नू ने, लाखों लोगों तक राहत सहायता पहुँचाने के रास्ते में आने वाली बाधाओं और वित्त पोषण की कमी पर प्रकाश डाला.

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यमन, सऊदी नेतृत्व वाले गठबन्धन द्वारा समर्थित, यमन सरकार द्वारा समर्थित बलों और हूथी विद्रोहियों के बीच आठ वर्षों से अधिक समय से चल रहे संघर्ष के कारण, लम्बे समय से राजनैतिक, मानवीय और विकासात्मक संकट का सामना कर रहा है.

अप्रैल 2022 में हुआ दो महीने का प्रारम्भिक संघर्ष विराम, दो बार बढ़ने के बाद अक्टूबर 2022 में समाप्त हो गया था.

इच्छा को कार्रवाई में बदलें

विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग, सऊदी अरब और ओमान समेत क्षेत्रीय हितधारकों के साथ लगातार सम्पर्क में हैं व उनसे बातचीत जारी रखे हुए हैं.

उन्होंने कहा, “सभी पक्ष, समाधानों की तलाश में इच्छा दिखा रहे हैं, लेकिन इस इरादे को ठोस कार्रवाई में तब्दील करने की ज़रूरत है, विशेष रूप से आगे बढ़ने के रास्ते पर एक स्पष्ट समझौते में, जिसमें एक समावेशी यमनी राजनैतिक प्रक्रिया का पुनःआरम्भ शामिल हो.”

विशेष दूत ने बताया कि युद्ध विराम ख़त्म होने के बावजूद, पहले की तुलना में संघर्ष का स्तर बहुत कम है और नागरिक हताहतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है.

हालाँकि, कुछ मोर्चों पर छिटपुट लड़ाई व गोलीबारी की ख़बरें मिली हैं, ख़ासतौर पर ताइज़, मारिब, ढाले, हुदायदाह, शाबवा और सादा में.

उन्होंने संयम बरतने व संवाद का रास्ता अपनाने का आग्रह करते हुए कहा, “इस पृष्ठभूमि में, युद्ध पर लौटने की सार्वजनिक धमकियाँ दी गई हैं. यह बयानबाज़ी, मध्यस्थता के लिए एक उपयोगी माहौल बनाए रखने के लिए अनुकूल नहीं है.”

आर्थिक संकट, बिजली कटौती

विशेष दूत ने यमन में गम्भीर आर्थिक स्थिति पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि युद्धरत पक्ष "लगातार शत्रुतापूर्ण आर्थिक क़दम उठा रहे हैं" जिससे नागरिक प्रभावित हो रहे हैं और अविश्वास की भावना बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि यमनी सरकार को अब भी पैट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जो उसके राजस्व का प्राथमिक स्रोत है. 

वहीं, प्रतिबन्धों, अत्यधिक शुल्क और करों के कारण व्यापार भी बाधित हो रहा है. 

इस बीच, बुनियादी सेवाओं की स्थिति बदतर होती जा रही है, स्थानीय लोगों को गर्मी के मौसम में 18 घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है. 

विशेष दूत ग्रुंडबर्ग ने, एक अरब 20 करोड़ डॉलर की सऊदी प्रतिबद्धता की सराहना की, जो बिजली आपूर्ति बनाए रखने और कुछ सार्वजनिक वेतन का भुगतान करने में मदद करेगी. 

हिंसक उग्रवाद के लिए ‘तैयार ज़मीन’

विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने चेतावनी के शब्दों में कहा कि राजनैतिक और आर्थिक अस्थिरता, हिंसक चरमपंथी संगठनों के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा करती हैं.

उन्होंने अबयान और शाबवा प्रान्तों में हाल ही में हुई हिंसक चरमपंथी गतिविधियों में वृद्धि की ख़बरों पर चिन्ता व्यक्त की है. उन्होंने कहा, “यह एक और उदाहरण है जो हमें याद दिलाता है कि लम्बे समय तक संघर्ष का राजनैतिक समाधान न होने के क्या परिणाम होते हैं.”

यूएन के विशेष दूत ने मध्यस्थता प्रयासों के लिए सुरक्षा परिषद और अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुटता और निरन्तर समर्थन की अपील की.

सहायता पहुँच और वित्त पोषण

मानवीय मुद्दे पर, दोनों यूएन अधिकारियों ने 21 जुलाई को ताइज़ गवर्नरेट में विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कर्मचारी, मोयाद हमीदी की हत्या की कड़ी निन्दा की.

संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता मामलों के समन्वय कार्यालय – OCHA की संचालन एवं पैरोकारी निदेशिका ने कहा कि यमन में बढ़ती भ्रामक जानकारी और दुस्सूचना के बीच, मानवीय सहायताकर्मियों के लिए पहुँच और धनराशि सहायता के मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं. परिणामस्वरूप, यह अभियान अधिक कठिन व ख़तरनाक होते जा रहे हैं

उन्होंने कहा, “सहायताकर्मियों को मानवीय राहत प्रयासों के सभी चरणों में बाधाओं व विशाल आवाजाही प्रतिबन्धों का सामना करना पड़ रहा है. इससे विशेष रूप से हमारी राष्ट्रीय महिला कर्मचारी और वे सभी लोग प्रभावित होते हैं, जिनके लिए वो सेवारत है.”

संयुक्त राष्ट्र और साझेदार संगठन इस वर्ष यमन में एक करोड़ 70 लाख से अधिक लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य बना रहे हैं. हालाँकि, 4 अरब 30 करोड़ डॉलर की परियोजना में अभी तक केवल 30 प्रतिशत धनराशि ही जुट पाई है. उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक समर्थन का आग्रह किया है.

विशेष दूत वोसोर्नू ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि संघर्ष का राजनैतिक समाधान महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल इससे ही, मानवीय संकट का समाधान नहीं निकलेगा.

उन्होंने कहा, “केवल जब, इस प्रगति के साथ, बेहतर आर्थिक परिस्थितियों व बुनियादी सेवाओं की पुनर्बहाली सम्भव होगी, तब हम देखेंगे कि मानवीय ज़रूरतें कम होने लगेंगी.”